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UP: जाम में सांसें थम रहीं थीं हमारी... रुक नहीं रहे थे आंसू, लग रहा मौत के मुंह से निकल आए, परिजनों की आपबीती

Tue, 27 Jun 2023 02:16 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 27 Jun 2023 02:16 PM IST
सार

रविवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर दस किलोमीटर लंबे जाम के बीच एंबुलेंस में मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज जा रहे तीमारदारों ने आपबीती सुनाई। आपबीती सुनकर उनके मरीज रो पड़े। वह हाथ जोड़कर बार-बार भगवान का नाम लेते रहे।

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patients Relatives trapped in ambulance narrated their ordeal in 10 km long jam Baragaon and Chirgaon Jhansi
10 किलोमीटर लंबे जाम में फंसीं एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दस किलोमीटर लंबे उस जाम ने हमारी सांसें रोक दी थीं, एंबुलेंस में दर्द से बेहाल हमारे अपने तड़प रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अब प्राण निकल जाएंगे। सब एक-दूसरे से चिपटकर रो रहे थे। कौन किसे दिलासा दे, ये समझ ही नहीं आ रहा था। भीषण जाम में पीछे से कई आवाजें आ रही थीं, लोग कह रहे थे कि कई एंबुलेंस फंसी हैं...। 
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ये सुनकर हम लोग बार-बार गाड़ियों से उतरकर जाम से निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे, लेकिन हालत ये थी कि दो-तीन घंटे तो गाड़ियां टस से मस नहीं हो पाईं। भगवान ने बचा लिया, बस...वरना पता नहीं क्या से क्या हो जाता। 
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ये आपबीती सुना रहे रविवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर दस किलोमीटर लंबे जाम के बीच एंबुलेंस में मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज जा रहे तीमारदारों ने सुनाई तो उनके मरीज रो पड़े। वह हाथ जोड़कर बार-बार भगवान का नाम लेते रहे।
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सोमवार को तीमारदारों ने कहा कि जाम का ऐसा नजारा वह जीवन भर नहीं भूलेंगे। रविवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर पारीछा पावर प्लांट के पास टैंकर पलटने से बड़ागांव से चिरगांव के बीच करीब दस किलोमीटर लंबे जाम में आठ एंबुलेंस भी कई घंटे तक फंसी रहीं थीं। इनमें दो एंबुलेंस अति गंभीर मरीजों को लेकर जा रही थीं। 

मुश्किल से खुले जाम के कारण रविवार को आधी रात के बाद इन मरीजों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इनकी हालत में अब कुछ सुधार है। वहीं इनके परिजनों का कहना है कि जाम में फंसने से लगातार अनहोनी का डर सता रहा था। बस आंखों से आंसू टपक रहे थे। उधर, उस जाम में दो दिन के नवजात ने दम तोड़ दिया था।

 

बिगड़ती जा रही थी नाना की हालत, सब रोए जा रहे थे बस
उरई निवासी पुष्पेंद्र ने बताया कि उनके नाना गौरीशंकर को हार्ट अटैक आने के बाद उरई में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उनको मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रविवार शाम एक प्राइवेट एंबुलेंस से वह नाना को लेकर झांसी के लिए रवाना हुए थे। लेकिन, जैसे ही वह चिरगांव होते हुए पारीछा की ओर पहुंचे, रास्ते में लगे जाम में फंस गए। 

 

पुष्पेंद्र का कहना है कि जाम इतना लंबा था कि गाड़ी को अगल-बगल घुमाने की जगह तक नहीं थी। पुष्पेंद्र ने बताया कि उसने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से भी मदद मांगी लेकिन, कई किलोमीटर तक वाहनों की कतार लगे होने से पुलिसकर्मी भी मदद नहीं कर पाए। नाना की लगातार बिगड़ती हालत देख परिवार के सभी लोग रो रहे थे। लेकिन, सब बेबस
थे। ऐसे में सिर्फ भगवान ही सहारा थे। जाम से निकलकर नाना को आधी रात में यहां लेकर आए। अब उनकी हालात खतरे से बाहर बताई जा रही है।

 

दर्द से छटपटाते नाती को देखकर एंबुलेंस से उतरकर आंसू छिपा रहा था
अपने नाती को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे नूर आलम भी किसी तरह जाम से निकलकर आने में कामयाब हुए। उन्होंने बताया कि उनका नाती कुछ दिन पहले छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने को कहा था। इसलिए वह उसे लेकर झांसी आ रहे थे कि उनकी एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। करीब चार घंटे तक एंबुलेंस फंसी रही। रेंग-रेंगकर किसी तरह रात 12 बजे के बाद एंबुलेंस किसी तरह जाम से बाहर निकल सकी। उस पूरे रास्ते नाती दर्द से छटपटाता रहा। उसकी हालत देख-देखकर मैं तो अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था। एंबुलेंस से बाहर निकलकर किसी तरह आंसू रोकने की कोशिश करता तो बच्चे की चीखें सुनकर फिर एंबुलेंस में बैठ जाता था। पूरे रास्ते भर उसे चुप कराता कि बेटा तू बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा। हम जल्दी अस्पताल पहुंच जाएंगे।


 

बहू की हालत देखकर बहुत डर लग रहा था
अपनी बहू को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचीं कलावती भी जाम में फंसी हुई थीं। उन्होंने बताया कि जाम में उनकी एंबुलेंस करीब दो घंटे तक फंसी रही। बहू को श्वांस लेने में परेशानी हो रही थी। एंबुलेंस के जाम में फंस जाने से वह लोग परेशान हो गए। बहू की हालत देखकर बहुत डर लग रहा था। रात में मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उसे भर्ती कराया तब जाकर उसे राहत मिली। 
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