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दीपावली पर नहीं फोड़ें बम और पटाखे, हवा रहेगी शुद्ध तो आप भी रहेंगे स्वस्थ

Sun, 01 Nov 2020 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2020 01:15 AM IST
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Patakha and bum not burst in Dewali
प्रदूषण - फोटो : ???????
झांसी। दीपावली पर होने वाली आतिशबाजी से बिगड़ने वाली आबोहवा दस फीसदी सांस के रोगी बढ़ा देती है। हर बार बढ़ते वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। पुराने सांस के मरीजों का तो दम घुटने लगता है। ऐसे में विशेषज्ञ भी लोगों से आतिशबाजी से दूरी बनाने की बात कह रहे हैं। खासकर इस कोरोना काल में तो इस पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
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पिछली दीपावली भी लोगों ने जमकर आतिशबाजी की थी, इससे झांसी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से ऊपर पहुंचने के कारण झांसी की हवा खराब हो गई थी। पर्व के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों में सांस रोगियों की संख्या में इजाफा हो गया था। 100 की ओपीडी में 110 मरीज पहुंचने लगे थे। इसमें अधिकतर मरीज बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं थीं। चूंकि, इनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए इन्हें जल्दी बीमारी घेर लेती है। प्रकाश का यह पर्व किसी पर भारी न पड़ जाए, इसलिए चिकित्सक भी लोगों से बम, पटाखे नहीं फोड़ने की अपील कर रहे हैं।
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ये जहरीली गैसें निकलतीं
पटाखों में सल्फर होता है। इसलिए पटाखों के कारण वायु में कार्बन मोनोडाइऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, पोटेशियम ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इससे फेफड़े, अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके साथ ही एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस और एलर्जिक राइनाइटिस को भी बढ़ावा मिलता है।
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आतिशबाजी के दौरान कार्बन मोनोडाइऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं। इससे पहले से सांस के रोगियों को दिक्कत तो बढ़ती ही है, साथ ही नए रोगी भी बढ़ जाते हैं। पिछले साल दीपावली के बाद ओपीडी में दस फीसदी मरीज बढ़ गए थे। ऐसे में लोगों को आतिशबाजी से दूरी बनानी चाहिए। - डॉ. मधुर्मय शास्त्री, चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
पटाखे छुड़ाने के बाद जहरीली गैसें तीन से चार दिन तक वातावरण में रहती हैं। इससे एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस और एलर्जिक राइनाइटिस के रोगियों की संख्या में इजाफा होता है। हार्ट के मरीजों के लिए भी पटाखों का प्रदूषण ठीक नहीं होता है। साथ ही तेज आवाज में पटाखे, बम छुड़ाने से ध्वनि प्रदूषण भी होता है, जो बुजुर्ग, बच्चों को प्रभावित करता है। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल।
कोरोनाकाल चल रहा है। ऐसे में प्रदूषण लोगों की सेहत और बिगड़ सकता है। सांस रोगियों की संख्या में इजाफा हो सकता है। लोग घर को सजाएं लेकिन पटाखे न जलाएं। - दिव्या प्रजापति, सिविल लाइन।
दो साल से पटाखे छुड़ा ही नहीं रहे हैं। आतिशबाजी खरीदने में खर्च होने वाले पैसे से जरूरतमंदों की मदद करें। गरीबों को जरूरी सामान भेंट करें। इससे उन्हें भी काफी खुशी होगी। - पल्लवी, बाहर सैंयर गेट।
लॉकडाउन के दौरान झांसी की आबोहवा अच्छी हो गई थी। वाहन चलने से निकलने वाले धुएं से फिर प्रदूषण बढ़ गया। अब अगर आतिशबाजी करेंगे तो स्थिति और बिगड़ेगी। - पूजा बाजपेयी, रायगंज।
जिन पैसों से आतिशबाजी खरीदते हैं, उनसे मिठाई, कपड़े खरीदकर जरूरतमंदों को बांटें, ताकि उनका त्योहार भी अच्छे से मन सके। मदद करने वालों को भी अलग सुख मिलेगा। - नेहा सिंह चौहान, सीपरी बाजार।
तीन-चार साल से पटाखे छुड़ाना बंद कर रखा है। दीपावली पर दीप जलाते हैं और एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं। पिछले साल से झांसी का प्रदूषण काफी बढ़ गया था। लोग इससे सबक लें। - ज्योति खरे, खातीबाबा।

हम खुद भी दीपावली पर आतिशबाजी नहीं करते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। बम, पटाखे छुड़ाने से वायु के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ जाता है। - निखिल रायजादा, आवास विकास।
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