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चोखा पाटा में जमीन को लेकर फंसा पेच
झांसी / ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2015 11:29 PM IST
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सरकारी जमीनों का सीमांकन नहीं होने के कारण आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है। मध्य प्रदेश की सीमा से सटे बिजौली में चोखा पाटा के पास शनिवार को कुछ लोगों द्वारा जमीन पर कब्जा करने की सूचना पर पहुंची संपत्ति विभाग की टीम ने बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य रुकवा दिया। तय किया कि सोमवार को जमीन की पैमाइश कराई जाएगी।
महानगर स्थित बिजौली क्षेत्र का कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। इसी क्षेत्र में चोखा पाटा पीएसी के बगल में नगर निगम की सरकारी जमीन है। शनिवार को मध्य प्रदेश के कुछ लोग वहां निर्माण कार्य करा रहे थे। अपर नगर आयुक्त को इस आशय की शिकायत मिली तो उन्होंने मौके पर संपत्ति विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस को भेजा। वहां निर्माण कर रहे लोगों से अभिलेख मांगे गए।
उन्होंने अभिलेख दिखाकर दावा किया कि जमीन उनकी है। नगर निगम के संपत्ति विभाग ने भी दावा ठोका कि यह जमीन उनकी है। इन हालातों में पुलिस की मदद से निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। संपत्ति अधिकारी डा. पुष्पराज गौतम द्वारा निर्णय लिया गया कि सोमवार को तहसील टीम व पुलिस के साथ जमीन की पैमाइश कराई जाएगी। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि जमीन सीमांकन के दौरान जितनी जमीन नगर निगम की होगी, वहां पर पिलर लगा दिए जाएंगे। शेष जमीन संबंधित व्यक्तियों को सौंप दी जाएगी। उन्होंने स्वीकारा कि जमीन की पैमाइश नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बन रही है।
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महानगर स्थित बिजौली क्षेत्र का कुछ हिस्सा मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। इसी क्षेत्र में चोखा पाटा पीएसी के बगल में नगर निगम की सरकारी जमीन है। शनिवार को मध्य प्रदेश के कुछ लोग वहां निर्माण कार्य करा रहे थे। अपर नगर आयुक्त को इस आशय की शिकायत मिली तो उन्होंने मौके पर संपत्ति विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस को भेजा। वहां निर्माण कर रहे लोगों से अभिलेख मांगे गए।
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उन्होंने अभिलेख दिखाकर दावा किया कि जमीन उनकी है। नगर निगम के संपत्ति विभाग ने भी दावा ठोका कि यह जमीन उनकी है। इन हालातों में पुलिस की मदद से निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। संपत्ति अधिकारी डा. पुष्पराज गौतम द्वारा निर्णय लिया गया कि सोमवार को तहसील टीम व पुलिस के साथ जमीन की पैमाइश कराई जाएगी। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि जमीन सीमांकन के दौरान जितनी जमीन नगर निगम की होगी, वहां पर पिलर लगा दिए जाएंगे। शेष जमीन संबंधित व्यक्तियों को सौंप दी जाएगी। उन्होंने स्वीकारा कि जमीन की पैमाइश नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बन रही है।
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