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पूरा हुआ वर्दी का सपना, खिल गए बेटों के चेहरे
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झांसी। बृहस्पतिवार सुबह पुलिस लाइन के मैदान का नजारा बदला हुआ था। वर्दी में सजे-धजे रंगरूट मैदान पर जबरदस्त कदमताल का नजारा पेश कर रहे थे। 2019 बैच के 213 रिक्रूट कांस्टेबल पासिंग आउट परेड के साथ यूपी पुलिस का हिस्सा बन गए। वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ तो परेड के बाद सभी के चेहरे खिल उठे। पासिंग आउट परेड में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
पुलिस लाइन मैदान पर आयोजित हुए दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि आईजी सुभाष सिंह बघेल ने शपथ दिलाने के बाद कहा कि अब पुलिस में शामिल होने के बाद आपकी जिंदगी के मायने और मकसद बदल जाएंगे। पुलिस विभाग की अपनी अलग छवि है, हमें निष्पक्षता, ईमानदारी और अच्छे व्यवहार से काम करना है। साथ ही दुश्मनों पर कहर बनकर टूटना है। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्त्रस्म सभी के जीवन में नया अध्याय शुरू करेगा। वर्तमान में पुलिस विभाग में कई चुनौतियां हैं। जनता की अपेक्षा के अनुसार काम करना है। यह तभी हो सकेगा, जब हमारा शरीर स्वस्थ होगा। स्वस्थ शरीर के लिए फील्ड में रोजाना अभ्यास जरूरी है। दीक्षांत समारोह के लिए पुलिस लाइन का मैदान भी देखते बन रहा था। इस दौरान परेड में भाग ले रहे रंगरूटों को देखकर साथियों में भी जबरदस्त उत्साह नजर आया।
परेड का संचालन कमांडर अरुण कुमार, आकाश कुमार, प्रशांत कुमार ने किया। इस मौके पर डीएम आंद्रा वामसी, एसएसपी दिनेश कुमार पी, एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव, एसपी देहात राहुल मिठास, सीओ सिटी संग्राम सिंह, प्रतिसार निरीक्षक रामजीत यादव मौजूद रहे।
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जोश व जज्बे के साथ रवाना हुए रंगरूट
फर्ज के लिए मर मिटने की कसम खाते हुए खाकी के जोशीले जांबाज अपनी-अपनी मंजिल की ओर रवाना हुए। साल 2019 में शुरू हुए रिक्रूट आरक्षियों के प्रशिक्षण के दौरान कानून की बारीक जानकारियों से उच्च अधिकारियों द्वारा रिक्रूटों को अवगत कराया गया। साथ ही, वर्तमान समय में पुलिस की बदलती व बढ़ती चुनौतियों से निपटने के गुर भी सिखाए।
42 फेल हुए
258 रिक्रूट ट्रेनिंग के लिए आए थे। इसमें तीन पीएसी में वापस चले गए थे, जबकि 42 फेल हो गए। अब इन सभी को एनडीआरएफ के साथ अलीगढ़, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर में स्थित पीएसी में तैनाती मिलेगी।
17 ने किया बेहतर प्रदर्शन
ट्रेनिंग के दौरान सर्वोत्तम कृष्ण कुमार, बृजेश कुमार सिंह, निखिल कुमार, आकाश कुमार, मनीष कुमार, नितिन कुमार, नवीन तेवतिया, विश्वराज चौहान, पुष्पेंद्र सिंह, अमित कुमार, अभिषेक कुमार समेत अन्य रिक्रूट का बेहतर प्रदर्शन रहा।
..............
मैदान पर वीडियो कॉलिंग कर बांटी खुशियां
झांसी। शायद यह पुलिस महकमे के लिए भी इतिहास रहा, जब पहली बार दीक्षांत समारोह में रिक्रूटों के परिजन शामिल नहीं हुए। उनकी खुशी का जश्न भी पूरी तरह फीका रहा। मैदान के चारों तरफ सन्नाट रहा। कुर्सियां भी पूरी तरह खाली पड़ी रहीं। केवल अधिकारी व पुलिसकर्मी पल-पल तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाते नजर आए। कोरोना के चलते दीक्षांत समारोह इस बार पूरी तरह फीका नजर आया। इसके पहले हुए कार्यक्रमों में चौतरफा लोगों की भीड़ नजर आती थी, लेकिन इस बार सीमित दायरे में कार्यक्रम हुआ। रिक्रूट बिना परिजनों के अकेले ही खुशियां मनाते दिखे। इस बात का सभी को मलाल भी रहा कि काश परिजन शामिल होते। कार्यक्रम के बाद रिक्रूट मोबाइल से वीडियो कॉलिंग कर खुशी का जश्न मनाते दिखे।
परिजन नहीं आए मलाल रहेगा
मेरी जिंदगी के लिए सबसे बड़े कार्यक्रम में परिजनों के शामिल न होने का जिंदगी भर अफसोस रहेगा। लेकिन, घर पहुंचकर परिजनों के साथ खुशी को साझा करूंगा।
- विश्वराज चौहान, खुर्जा
घर पहुंचकर खुशी होगी दोगुनी
मैंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि यह वक्त भी आएगा। पहली बार मेरे वर्दी पहनने के दौैरान मेरे माता-पिता साथ नहीं है। अब घर पहुंचकर उनके सामने वर्दी पहनकर खुशी दोगुनी करूंगा।
नितिन कुमार, सिकंदराबाद
अब अधिकारी बनने का है सपना
वर्दी पहनने का सपना आज पूरा हो गया। लेकिन, अब अधिकारी बनने का सपना है। ड्यूटी करने के साथ मैं आगे की पढ़ाई जारी रखूंगा। अब अधिकारी बनना मेरा लक्ष्य है।
मनीष तेवतिया, बुलंदशहर
माता-पिता का सपना किया पूरा
आज वर्दी पहनकर मैंने माता-पिता का सपना पूरा कर दिया। मेरी जहां भी ड्यूटी लगेगी, पूरी ईमानदारी के साथ फर्ज को निभाऊंगा। मैंने वर्दी पाने के लिए बहुत मेहनत की।
निखिल कुमार, बुलंदशहर
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पुलिस लाइन मैदान पर आयोजित हुए दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि आईजी सुभाष सिंह बघेल ने शपथ दिलाने के बाद कहा कि अब पुलिस में शामिल होने के बाद आपकी जिंदगी के मायने और मकसद बदल जाएंगे। पुलिस विभाग की अपनी अलग छवि है, हमें निष्पक्षता, ईमानदारी और अच्छे व्यवहार से काम करना है। साथ ही दुश्मनों पर कहर बनकर टूटना है। उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्त्रस्म सभी के जीवन में नया अध्याय शुरू करेगा। वर्तमान में पुलिस विभाग में कई चुनौतियां हैं। जनता की अपेक्षा के अनुसार काम करना है। यह तभी हो सकेगा, जब हमारा शरीर स्वस्थ होगा। स्वस्थ शरीर के लिए फील्ड में रोजाना अभ्यास जरूरी है। दीक्षांत समारोह के लिए पुलिस लाइन का मैदान भी देखते बन रहा था। इस दौरान परेड में भाग ले रहे रंगरूटों को देखकर साथियों में भी जबरदस्त उत्साह नजर आया।
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परेड का संचालन कमांडर अरुण कुमार, आकाश कुमार, प्रशांत कुमार ने किया। इस मौके पर डीएम आंद्रा वामसी, एसएसपी दिनेश कुमार पी, एसपी सिटी राहुल श्रीवास्तव, एसपी देहात राहुल मिठास, सीओ सिटी संग्राम सिंह, प्रतिसार निरीक्षक रामजीत यादव मौजूद रहे।
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जोश व जज्बे के साथ रवाना हुए रंगरूट
फर्ज के लिए मर मिटने की कसम खाते हुए खाकी के जोशीले जांबाज अपनी-अपनी मंजिल की ओर रवाना हुए। साल 2019 में शुरू हुए रिक्रूट आरक्षियों के प्रशिक्षण के दौरान कानून की बारीक जानकारियों से उच्च अधिकारियों द्वारा रिक्रूटों को अवगत कराया गया। साथ ही, वर्तमान समय में पुलिस की बदलती व बढ़ती चुनौतियों से निपटने के गुर भी सिखाए।
42 फेल हुए
258 रिक्रूट ट्रेनिंग के लिए आए थे। इसमें तीन पीएसी में वापस चले गए थे, जबकि 42 फेल हो गए। अब इन सभी को एनडीआरएफ के साथ अलीगढ़, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर में स्थित पीएसी में तैनाती मिलेगी।
17 ने किया बेहतर प्रदर्शन
ट्रेनिंग के दौरान सर्वोत्तम कृष्ण कुमार, बृजेश कुमार सिंह, निखिल कुमार, आकाश कुमार, मनीष कुमार, नितिन कुमार, नवीन तेवतिया, विश्वराज चौहान, पुष्पेंद्र सिंह, अमित कुमार, अभिषेक कुमार समेत अन्य रिक्रूट का बेहतर प्रदर्शन रहा।
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मैदान पर वीडियो कॉलिंग कर बांटी खुशियां
झांसी। शायद यह पुलिस महकमे के लिए भी इतिहास रहा, जब पहली बार दीक्षांत समारोह में रिक्रूटों के परिजन शामिल नहीं हुए। उनकी खुशी का जश्न भी पूरी तरह फीका रहा। मैदान के चारों तरफ सन्नाट रहा। कुर्सियां भी पूरी तरह खाली पड़ी रहीं। केवल अधिकारी व पुलिसकर्मी पल-पल तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाते नजर आए। कोरोना के चलते दीक्षांत समारोह इस बार पूरी तरह फीका नजर आया। इसके पहले हुए कार्यक्रमों में चौतरफा लोगों की भीड़ नजर आती थी, लेकिन इस बार सीमित दायरे में कार्यक्रम हुआ। रिक्रूट बिना परिजनों के अकेले ही खुशियां मनाते दिखे। इस बात का सभी को मलाल भी रहा कि काश परिजन शामिल होते। कार्यक्रम के बाद रिक्रूट मोबाइल से वीडियो कॉलिंग कर खुशी का जश्न मनाते दिखे।
परिजन नहीं आए मलाल रहेगा
मेरी जिंदगी के लिए सबसे बड़े कार्यक्रम में परिजनों के शामिल न होने का जिंदगी भर अफसोस रहेगा। लेकिन, घर पहुंचकर परिजनों के साथ खुशी को साझा करूंगा।
- विश्वराज चौहान, खुर्जा
घर पहुंचकर खुशी होगी दोगुनी
मैंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि यह वक्त भी आएगा। पहली बार मेरे वर्दी पहनने के दौैरान मेरे माता-पिता साथ नहीं है। अब घर पहुंचकर उनके सामने वर्दी पहनकर खुशी दोगुनी करूंगा।
नितिन कुमार, सिकंदराबाद
अब अधिकारी बनने का है सपना
वर्दी पहनने का सपना आज पूरा हो गया। लेकिन, अब अधिकारी बनने का सपना है। ड्यूटी करने के साथ मैं आगे की पढ़ाई जारी रखूंगा। अब अधिकारी बनना मेरा लक्ष्य है।
मनीष तेवतिया, बुलंदशहर
माता-पिता का सपना किया पूरा
आज वर्दी पहनकर मैंने माता-पिता का सपना पूरा कर दिया। मेरी जहां भी ड्यूटी लगेगी, पूरी ईमानदारी के साथ फर्ज को निभाऊंगा। मैंने वर्दी पाने के लिए बहुत मेहनत की।
निखिल कुमार, बुलंदशहर

आरटीसी की ट्रनिंग पूरी करने वाले रिकूट की पासआउट परेड में नए बने सिपाही।