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मुसाफिर ही बिगाड़ रहे मेमो ट्रेनों की सूरत, बार- बार चोरी हो रहे उपकरण
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झांसी। बुंदेलखंड के लिए सौगात बनी मेमू ट्रेनों की सूरत मुसाफिर ही बिगाड़ रहे हैं। इन ट्रेनों में लगे उपकरण बार- बार चोरी हो रहे हैं। यात्री कूड़ा फैलाकर भी कोचों को गंदा कर रहे हैं। खासकर बांदा की तरफ जाने वालीं दोनों मेमू गाड़ियों का बुरा हाल है।
रेल मंडल में 30 सितंबर से अप और डाउन की पांच जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इन ट्रेनों के चलने से छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए सफर करना बेहद सुविधाजनक हो गया है। इनमें झांसी से बांदा के लिए दोपहर 12.25 बजे, झांसी से मानिकपुर के लिए शाम 5.25 बजे, झांसी से ललितपुर के लिए सुबह 6.10 बजे, झांसी से कानपुर के लिए सुबह 8.50 बजे और ललितपुर से बीना के लिए सुबह 10.25 बजे मेमू चलती है। मेमू ट्रेन की कई सुविधाएं सफर की थकान को कम करती हैं। मेमू ट्रेन के दरवाजे बड़े हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने तथा उतरने में आसानी होती है। यात्रियों के लिए सीट के अलावा कोच में खड़े रहने के लिए हैंडल की सुविधा है। मेमू कोच में लाइटिंग तथा पंखों की संख्या अधिक है। ट्रेन के कोच अंदर से एक दूसरे से कनेक्ट होते है, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आ-जा सकते हैं। कोच में बायो टॉयलेट की सुविधा है। टॉयलेट में मैटिंग बिछाई गई है। साथ ही इंडियन सीट के साथ जंजीर से बंधा स्टील का डिब्बा, प्रेशर पाइप व वॉशबेसिन लगा है।
मगर डेढ़ महीने में ही मेमू ट्रेनों के तमाम उपकरण चोरी हो गए हैं। इनमें ट्रेन के वॉशबेसिन के नल, टॉयलेट के प्रेशर पाइप समेत तमाम सामान गायब है। कानपुर स्थित वॉशिंग साइडिंग पर कई बार उपकरण बदले गए, लेकिन हर बार उपकरण गायब हो जाते हैं।
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- मेमू ट्रेनों का मेंटेनेंस कानपुर वॉशिंग साइडिंग पर होता है। झांसी में ट्रेन की साफ- सफाई कराई जाती है। वैसे रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। यात्रियों को जागरूक बनकर अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
मेमू का सफर बेहद आरामदायक है। अगर कोई इसे नुकसान पहुंचाता है तो यह गलत है।
वीएस सेंगर।
ट्रेन में जो सुविधाएं हैं उनको सुरक्षित रखना हम सबका कर्तव्य है।
श्वेता।
नई ट्रेन हैं। इसके बाद भी अधिकांश कोचों में गंदगी फैली पड़ी है।
छाया।
ट्रेन हम सबकी संपत्ति है। इसका सभी को ध्यान रखना चाहिए।
अनिल वर्मा।
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रेल मंडल में 30 सितंबर से अप और डाउन की पांच जोड़ी मेमू ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया था। इन ट्रेनों के चलने से छोटे स्टेशनों के यात्रियों के लिए सफर करना बेहद सुविधाजनक हो गया है। इनमें झांसी से बांदा के लिए दोपहर 12.25 बजे, झांसी से मानिकपुर के लिए शाम 5.25 बजे, झांसी से ललितपुर के लिए सुबह 6.10 बजे, झांसी से कानपुर के लिए सुबह 8.50 बजे और ललितपुर से बीना के लिए सुबह 10.25 बजे मेमू चलती है। मेमू ट्रेन की कई सुविधाएं सफर की थकान को कम करती हैं। मेमू ट्रेन के दरवाजे बड़े हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने तथा उतरने में आसानी होती है। यात्रियों के लिए सीट के अलावा कोच में खड़े रहने के लिए हैंडल की सुविधा है। मेमू कोच में लाइटिंग तथा पंखों की संख्या अधिक है। ट्रेन के कोच अंदर से एक दूसरे से कनेक्ट होते है, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आ-जा सकते हैं। कोच में बायो टॉयलेट की सुविधा है। टॉयलेट में मैटिंग बिछाई गई है। साथ ही इंडियन सीट के साथ जंजीर से बंधा स्टील का डिब्बा, प्रेशर पाइप व वॉशबेसिन लगा है।
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मगर डेढ़ महीने में ही मेमू ट्रेनों के तमाम उपकरण चोरी हो गए हैं। इनमें ट्रेन के वॉशबेसिन के नल, टॉयलेट के प्रेशर पाइप समेत तमाम सामान गायब है। कानपुर स्थित वॉशिंग साइडिंग पर कई बार उपकरण बदले गए, लेकिन हर बार उपकरण गायब हो जाते हैं।
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- मेमू ट्रेनों का मेंटेनेंस कानपुर वॉशिंग साइडिंग पर होता है। झांसी में ट्रेन की साफ- सफाई कराई जाती है। वैसे रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है। यात्रियों को जागरूक बनकर अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
मेमू का सफर बेहद आरामदायक है। अगर कोई इसे नुकसान पहुंचाता है तो यह गलत है।
वीएस सेंगर।
ट्रेन में जो सुविधाएं हैं उनको सुरक्षित रखना हम सबका कर्तव्य है।
श्वेता।
नई ट्रेन हैं। इसके बाद भी अधिकांश कोचों में गंदगी फैली पड़ी है।
छाया।
ट्रेन हम सबकी संपत्ति है। इसका सभी को ध्यान रखना चाहिए।
अनिल वर्मा।