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Jhansi News: मम्मी-पापा दे रहे 98 प्रतिशत लाने का दबाव...परीक्षा और नंबरों का बोझ बच्चों को दे रहा जानलेवा तनाव

Sat, 21 Jan 2023 08:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2023 08:00 AM IST
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Parents are giving pressure to get 98 percent...the burden of exams and numbers is giving life-threatening stress to the children
झांसी। परीक्षा की तैयारी और अच्छे नंबर लाने का दबाव परीक्षार्थियों पर इस कदर हावी हो रहा है कि वह अपनी जान पर खेल रहे हैं। महज दो दिन में झांसी में दो छात्राओं ने आत्महत्या कर ली। दोनों ही परीक्षा की तैयारी को लेकर तनाव में थीं। उधर, मुझे अकेला छोड़ दीजिए, मैं पढ़ने बैठता हूं तो मुझे घबराहट होने लगती है। मेरा मन करता है कहीं भाग जाऊं, खुद को एक कमरे में बंद कर कुछ कर लूं...। किसी बोर्ड, विश्वविद्यालय या फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा आपका बच्चा भी इन दिनों कुछ ऐसी ही बातें कर रहा है तो इसे सिर्फ एग्जाम फोबिया भर न समझें, जान लें कि आपके बच्चे को आपके लगाव और हर क्षण उस पर नजर रखने की जरूरत है। परीक्षा और अच्छे नंबरों का दबाव उसे अपने साथ कुछ गलत करने के लिए उकसा सकता है।
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मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र और जिला अस्पताल में मनोचिकित्सकों के पास इन दिनों हर हफ्ते तकरीबन 40-50 केस पहुंच रहे हैं। इन केसों में जो सबसे अहम बात है वह यह है कि बच्चे काउंसलिंग के दौरान खुद पर अच्छे नंबर लाने के दबाव से तनाव में हैं। वह बता रहे हैं कि मम्मी-पापा का कहना है कि अब 90 प्रतिशत तो हर कोई ले आता है। परीक्षा में 95 फीसदी से कम नंबर नहीं आना चाहिए। परीक्षा में बैक पेपर तो बिल्कुल न आए। कई बच्चे तो यहां तक बता रहे हैं कि पेपर की स्कीम आते ही उन्हें अजीब सा डर लगने लगा है। उन्हें डरावने सपने आ रहे हैं कि वह फेल हो गए।
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केस-1
10वीं कक्षा के एक छात्र ने मां से कहा कि वह परीक्षा नहीं देना चाहता, उसकी तैयारी अच्छी नहीं है। वह फेल हो गया तो सभी दोस्त उस पर हंसेंगे, पापा की डांट पड़ेगी। मां ने भी अच्छे नंबर लाने का दबाव बनाया तो बच्चे ने कहा कि वह परेशान हो गया है, वह अपनी जान दे देगा। अब मां अपने बेटे की काउंसलिंग करा रही है।
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केस-2
12वीं की एक छात्रा को 10 वीं में अच्छे नंबर मिले थे। लेकिन कोरोना काल में वह ठीक से पढ़ नहीं पाई। अब परीक्षा की तैयारी के दौरान उसे घबराहट, चिड़चिड़ापन, सिर में दर्द और पढ़ाई के दौरान तनाव महसूस होने लगा। घर में सभी ने उससे कह रखा है कि कम से कम 95 फीसदी नंबर आने चाहिए।
केस-3
10वीं कक्षा के एक छात्र के माता-पिता जिला अस्पताल में बच्चे को लेकर पहुंचे, उन्होंने डॉक्टर को बताया कि बच्चे की परीक्षा पास में है। लेकिन वह ठीक से खाना नहीं खा रहा है। वह गुमसुम सा हो गया है। डॉक्टर से उसे मनोचिकित्सक के पास भेजा। काउंसलिंग में पता चला कि बच्चा परीक्षा को लेकर तनाव में है।
एक परीक्षा आपकी जिंदगी नहीं बदल सकती
-आजकल कम नंबरों के बावजूद कॅ रिअर के कई अच्छे विकल्प हैं।
-पढ़ाई का तनाव आप पर हावी है तो बुरे ख्याल दिमाग में न लाएं, परिवार के लिए नंबर नहीं बल्कि आप जरूरी हैं।
-यदि आपको लगे कि परीक्षा की तैयारी अच्छी नहीं हुई तो अपने शिक्षक व माता-पिता को बताएं, वह आपकी मदद जरूर करेंगे।
-मन में आत्महत्या करने का ख्याल न लाएं, एक परीक्षा आपकी पूरी जिंदगी नहीं बदल सकती, खुद पर यकीन करें।
माता-पिता परीक्षा को हौव्वा न बनाएं
-बच्चे की परीक्षा की तैयारी पर जोर दें, उस पर 98-99 प्रतिशत नंबर लाने का दबाव न डालें।
-परीक्षा से पहले बच्चा डिप्रेशन में है तो उसकी दवाइयों और काउंसलिंग पर ध्यान जरूर दें। उस पर नजर रखें।
-बच्चे को यकीन दिलाएं कि कुछ नंबर जिंदगी की सफलता तय नहीं करते, वह सिर्फ मन लगाकर पढ़ाई करे।
-बच्चे की तुलना दूसरों से न करें, हर बच्चे की मानसिक स्थिति और पढ़ाई करने का तरीका अलग होता है।
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इन्होंने खत्म कर ली अपनी जिंदगी
-19 जनवरी 2023 : बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बीटेक की छात्रा सृष्टि राय ने पढ़ाई के दबाव के चलते आत्महत्या कर ली। उसने परीक्षा से एक दिन पहले अपनी मां से भी बात की थी। छात्रा की मां शिक्षिका है।
-20 जनवरी 2023: रक्सा के खैरा गांव में दसवीं की छात्रा अभिलाषा परिहार (17) ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों का कहना है कि परीक्षा करीब आने के बाद से वह परेशान थी। वह पढ़ाई से डरने लगी थी।
-फरवरी 2022 में दतिया निवासी एक छात्र जो कि झांसी के मेहंदीबाग इलाके में किराए का कमरा लेकर एमएससी की पढ़ाई करता था। उसने परीक्षा की अच्छी तैयारी न होने से आत्महत्या कर ली थी।
-मार्च 2022 : ललितपुर के थाना बार के ग्राम मरौली में पढ़ाई न करने पर पिता ने 10वीं की छात्रा अपनी बेटी सोनम अहिरवार को डांटा तो तनाव में आकर बेटी ने कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली।
-जून 2022 में हमीरपुर निवासी एक छात्र ने जोकि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में फिजियोथेरेपी द्तिीय वर्ष का छात्र था, वह शिवाजी नगर में किराए का कमरा लेकर रहता था। उसने कमरे में आत्महत्या कर ली थी।
-वर्ष 2021 : टीकमगढ़ के बेडरी गांव निवासी अंशुमन ललितपुर के महरौनी में अपने नाना के घर रहकर 10वीं की पढ़ाई कर रहा था। छात्र ने यूट्यूब पर तनाव में फांसी कैसे लगाए सर्च किया और दुपट्टे से फांसी लगाकर जान दे दी।
-नौ जुलाई 2019 : झांसी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा मान्या तिवारी ने मेडिकल कॉलज की बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से ठीक पहले उसने अपनी मां को फोन किया था।
-मई 2018 : बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ओबीसी गर्ल्स हॉस्टल की एक छात्रा ने फांसी लगा ली थी। उसने सुसाइड नोट में लिखा था कि अच्छी पढ़ाई न कर पाने के कारण वह आत्महत्या कर रही है।
प्रतिदिन तीन-चार केस आ रहे
परीक्षा और नंबरों को बच्चे के लिए हौव्वा न बनाएं। बच्चे तनाव में आ रहे हैं। उनकी बात सुनें और उन्हें बताएं कि वह सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें, जो भी नंबर आएंगे उसके हिसाब से कॅरिअर का विकल्प तलाश लेंगे। उन पर दबाव बनाना उन पर भारी पड़ सकता है। परीक्षा के तनाव के लेकर प्रतिदिन तीन-चार केस आ रहे हैं।

डॉ. शिकाफा जाफरीन-मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
नंबरों का दबाव न बनाएं
काउंसलिंग लेने वाले बच्चे बता रहे हैं कि माता-पिता अच्छे नंबरों का दबाव बना रहे हैं, जबकि वे परीक्षा की अच्छी तैयारी न कर पा रहे हैं। उन्हें लगता है कि यही स्थिति रही तो वह फेल हो जाएंगे या फिर अपने आप को कुछ कर लेंगे, कोई उन्हें समझ नहीं रहा है। वह बहुत तनाव महसूस कर रहे हैं।
डॉ. मनीष, मनोवैज्ञानिक, मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र
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