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पंचायतों के पास डंप पड़े हैं 15 करोड़
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झांसी। कोविड के प्रभाव की वजह से जहां तमाम विकास कार्यों के बजट में भारी-भरकम कटौती हो रही है वहीं, यहां तमाम पंचायतों ने मोटी धनराशि खर्च ही नहीं की। यहां सौ से अधिक पंचायतें ऐसी हैं जिनके पास चौदहवें वित्त आयोग से मिले दस लाख रुपये से अधिक की रकम पड़ी हुई है लेकिन, वह अभी तक इसे खर्च नहीं कर सके जबकि इस वित्त आयोग का कार्यकाल इसी वर्ष पूरा हो चुका। पूरे जनपद में 14.85 करोड़ की धनराशि पंचायतों के पास बकाया बताई जा रही है।
केंद्र सरकार ग्राम पंचायतों को वित्त आयोग के जरिए आर्थिक मदद मुहैया कराती है। इन पैसों से पंचायत पेयजल, सफाई, अवस्थापना सुधार, सामुदायिक भवन आदि के निर्माण में पैसे खर्च कर सकते हैं। 14वें वित्त आयोग के जरिए भी केंद्र सरकार ने पंचायतों को मदद मुहैया कराई लेकिन पंचायतों ने समय पर यह पैसा खर्च ही नहीं किया। झांसी में 496 ग्राम पंचायतों में सौ से अधिक पंचायतें ऐसी हैं जिनके पास इस मद का करीब दस लाख रुपये से अधिक की मोटी धनराशि बिना खर्च हुए ही पड़ी हुई है। पंचायत राज अधिकारियों के मुताबिक अब तक यह रकम बढ़कर 14.85 करोड़ हो गई है। केंद्र सरकार की निधि होने की वजह से इनको दूसरे कार्यों में खर्च भी नहीं किया जा सकता हालांकि सरकार ने इसे खर्च करने की समयसीमा में इजाफा कर दिया। वहीं दूसरी ओर पंचायतों के पास पड़ी इस मोटी धनराशि पर सरकार ने भी नजर गड़ा दी हैं। उसने एक शासनादेश के जरिए पंचायतों में शेष बची धनराशि के जरिए पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय एवं कायाकल्प का कार्य कराने का निर्देश दिया है। इस निर्देश ने ग्राम प्रधानों के होश उड़ा दिए हैं। चुनावी साल होने के नाते सबकी कोशिश गांव में खड़ंजा आदि बिछवाने की है लेकिन, अब इस निर्देश के बाद ग्राम प्रधानों को न अटकते बन रहा और न निगलते। वहीं, डीपीआरओ का कहना है सरकारी धन को शासकीय शासनादेश के मुताबिक ही खर्च किया जाएगा।
पंद्रहवें वित्त आयोग से भी मिले 31 करोड़
ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त आयोग के खत्म होने के बाद अब पंद्रहवें वित्त आयोग के जरिए आर्थिक मदद मिल रही है। केंद्र सरकार ने इसकी पहली किस्त भी जारी कर दी। इसके जरिए झांसी के 496 ग्राम पंचायतों के लिए 31 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
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केंद्र सरकार ग्राम पंचायतों को वित्त आयोग के जरिए आर्थिक मदद मुहैया कराती है। इन पैसों से पंचायत पेयजल, सफाई, अवस्थापना सुधार, सामुदायिक भवन आदि के निर्माण में पैसे खर्च कर सकते हैं। 14वें वित्त आयोग के जरिए भी केंद्र सरकार ने पंचायतों को मदद मुहैया कराई लेकिन पंचायतों ने समय पर यह पैसा खर्च ही नहीं किया। झांसी में 496 ग्राम पंचायतों में सौ से अधिक पंचायतें ऐसी हैं जिनके पास इस मद का करीब दस लाख रुपये से अधिक की मोटी धनराशि बिना खर्च हुए ही पड़ी हुई है। पंचायत राज अधिकारियों के मुताबिक अब तक यह रकम बढ़कर 14.85 करोड़ हो गई है। केंद्र सरकार की निधि होने की वजह से इनको दूसरे कार्यों में खर्च भी नहीं किया जा सकता हालांकि सरकार ने इसे खर्च करने की समयसीमा में इजाफा कर दिया। वहीं दूसरी ओर पंचायतों के पास पड़ी इस मोटी धनराशि पर सरकार ने भी नजर गड़ा दी हैं। उसने एक शासनादेश के जरिए पंचायतों में शेष बची धनराशि के जरिए पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय एवं कायाकल्प का कार्य कराने का निर्देश दिया है। इस निर्देश ने ग्राम प्रधानों के होश उड़ा दिए हैं। चुनावी साल होने के नाते सबकी कोशिश गांव में खड़ंजा आदि बिछवाने की है लेकिन, अब इस निर्देश के बाद ग्राम प्रधानों को न अटकते बन रहा और न निगलते। वहीं, डीपीआरओ का कहना है सरकारी धन को शासकीय शासनादेश के मुताबिक ही खर्च किया जाएगा।
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पंद्रहवें वित्त आयोग से भी मिले 31 करोड़
ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त आयोग के खत्म होने के बाद अब पंद्रहवें वित्त आयोग के जरिए आर्थिक मदद मिल रही है। केंद्र सरकार ने इसकी पहली किस्त भी जारी कर दी। इसके जरिए झांसी के 496 ग्राम पंचायतों के लिए 31 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
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