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पंचायत चुनाव में पाला बदल सकते हैं कई दिग्गज, माहौल बनाने में जुटे
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झांसी। पंचायत चुनाव के आरक्षण की स्थिति साफ होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियों ने जोर पकड़ लिया है। सामान्य मानी जा रही जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट के अचानक अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किए जाने से राजनीतिक दलों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। भाजपा, सपा व बसपा में उथलपुथल मची हुई है। पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे कई दिग्गजों के पाला बदलने की संभावनाएं नजर आने लगी हैं।
पिछले पंचायत चुनाव में जिला पंचायत के 24 सदस्यों में से समाजवादी पार्टी 16 अपने बनाने में कामयाब रही थी। जबकि, चार - चार सदस्य भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के खाते में गए थे। बहुमत होने की वजह से सपा ने आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना लिया था। हालांकि, तब प्रदेश में सपा की सरकार थी और सपाइयों ने पिछला चुनाव अनुकूल परिस्थिति में लड़ा था। लेकिन, अब राजनीति की हवा बदल चुकी है। प्रदेश की सत्ता पर भाजपा काबिज है। बावजूद, ग्रामीण मतदाताओं पर पकड़ का दावा करते हुए सपाई आगामी पंचायत चुनाव को लेकर उत्साहित हैं। वहीं, भाजपा भी पिछले लोकसभा व विधानसभा के चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों में मिली बढ़त के बूते पर पूरी दमखम के साथ पंचायत चुनाव की तैयारियां में जुटी हुई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को दोनों ही दल हथियाने के लिए आमने - सामने की स्थिति में हैं। अभी तक मान के चला जा रहा था कि ये सीट अनारक्षित रहेगी। इसी के तहत दावेदार तैयारियों में जुटे हुए थे। लेकिन, अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है, जिससे सभी दलों के राजनीतिक समीकरण एकदम से बदल गए हैं। सामान्य व पिछड़ा वर्ग के दावेदारों ने अपने पांव पीछे खींच लिए हैं। जबकि, अनुसूचित जाति वर्ग के दावेदार उत्साहित हैं। पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे कई दिग्गजों के पाला बदलने की चर्चाएं भी जोर पकड़े हुए हैं। जिला पंचायत ही नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान व क्षेत्र के पंचायत के दावेदार भी अपने लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में जुटे हुए हैं। पाला बदलने के लिए उन्होंने भी माहौल बनाना शुरू कर दिया है। इन दिनों ये चर्चाओं में बना हुआ है।
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पिछले पंचायत चुनाव में जिला पंचायत के 24 सदस्यों में से समाजवादी पार्टी 16 अपने बनाने में कामयाब रही थी। जबकि, चार - चार सदस्य भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के खाते में गए थे। बहुमत होने की वजह से सपा ने आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना लिया था। हालांकि, तब प्रदेश में सपा की सरकार थी और सपाइयों ने पिछला चुनाव अनुकूल परिस्थिति में लड़ा था। लेकिन, अब राजनीति की हवा बदल चुकी है। प्रदेश की सत्ता पर भाजपा काबिज है। बावजूद, ग्रामीण मतदाताओं पर पकड़ का दावा करते हुए सपाई आगामी पंचायत चुनाव को लेकर उत्साहित हैं। वहीं, भाजपा भी पिछले लोकसभा व विधानसभा के चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों में मिली बढ़त के बूते पर पूरी दमखम के साथ पंचायत चुनाव की तैयारियां में जुटी हुई है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को दोनों ही दल हथियाने के लिए आमने - सामने की स्थिति में हैं। अभी तक मान के चला जा रहा था कि ये सीट अनारक्षित रहेगी। इसी के तहत दावेदार तैयारियों में जुटे हुए थे। लेकिन, अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई है, जिससे सभी दलों के राजनीतिक समीकरण एकदम से बदल गए हैं। सामान्य व पिछड़ा वर्ग के दावेदारों ने अपने पांव पीछे खींच लिए हैं। जबकि, अनुसूचित जाति वर्ग के दावेदार उत्साहित हैं। पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे कई दिग्गजों के पाला बदलने की चर्चाएं भी जोर पकड़े हुए हैं। जिला पंचायत ही नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान व क्षेत्र के पंचायत के दावेदार भी अपने लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में जुटे हुए हैं। पाला बदलने के लिए उन्होंने भी माहौल बनाना शुरू कर दिया है। इन दिनों ये चर्चाओं में बना हुआ है।
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