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पंचायत चुनाव दे गया पांच हजार से अधिक संक्रमित मरीज
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झांसी। पंचायत चुनाव ग्रामीण इलाकों को गहरा जख्म दे गया। चुनाव शुरू होते ही गांवों में संक्रमण ने पांव पसारने शुरू कर दिए। मतगणना खत्म होने के बाद अब कोई इलाका ऐसा नहीं बचा है, जहां कोरोना संक्रमित न हों। पांच हजार से अधिक लोग चुनाव की वजह से संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें सरकारी कर्मचारियों की संख्या अच्छी खासी तादाद है। चुनावी ड्यूटी से लौटे 50 कर्मचारियों की अब तक मौत भी हो चुकी है।
पिछले साल कोरोना लहर में मजबूत प्रतिरक्षण क्षमता के चलते संक्रमण के सामने ग्रामीण इलाके मजबूत दीवार बने रहे, लेकिन पंचायत चुनावों ने उनका यह सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। चुनाव के चलते दूसरी लहर में ग्रामीण इलाके बुरी तरफ संक्रमण की चपेट में आए हैं। प्रचार के दौरान गांव-गांव घूमने वाले उम्मीदवार एवं समर्थकों ने भी जमकर इसका संक्रमण फैलाया। प्रचार के दौरान जिसकी भी तबियत खराब हुई, वह खुद को आइसोलेट करने के बजाय प्रचार मेें जुटा रहा। कोविड संक्रमण बढ़ाने में पंचायत चुनावों की पुष्टि कोविड-19 की जांच रिपोर्ट के आंकड़े भी करते हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च तक जनपद में कुल संक्रमितों की संख्या 10771 थी, लेकिन तीन अप्रैल से शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया के बाद इसमें अचानक तेजी दिखाई पड़ी। 15 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद कोविड संक्रमितों की संख्या दो गुने से अधिक 24906 हो गई। हालत इस कदर चिंताजनक है कि यहां के हर तीसरे घर में लोग बुखार, जुकाम जैसे प्रारंभिक लक्षणों की चपेट में हैं। अस्पताल में जो मरीज पहुंच रहे, उनमें अधिकांश ग्रामीण इलाकों के हैं। इसी तरह करीब दो हजार से अधिक सरकारी कर्मचारी अब तक संक्रमित हो चुके। रोजाना इनके सामने आने का सिलसिला जारी है। सिर्फ झांसी में अभी तक पचास से अधिक कर्मचारियों की मौत हो चुकी। शिक्षकों की संख्या इनमें सर्वाधिक है। इस संख्या में रोजाना बढ़ोत्तरी हो रही है।
जांच कराने को आगे नहीं आ रहे ग्रामीण
कोरोना ने ग्रामीण इलाकों में भले दस्तक दे दी हो लेकिन, अभी ग्रामीण इसकी जांच के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है रोजाना ग्रामीण इलाकों से ऐसे मरीज सामने आ रहे जिनमें बुखार, गले में खराश, सर्दी जुकाम जैसे लक्षण है लेकिन, इन लक्षणों के बावजूद भी वह जांच कराने को राजी नहीं। गांव में ही मेडिकल केमिस्ट से दवाई पूछकर अपना इलाज कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है यह स्थिति कभी भी भयावह हो सकती है।
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चुनावी ड्यूटी से लौटे पुलिसकर्मी भी संक्रमित
पंचायत चुनावों की ड्यूटी पुलिस फोर्स को भी काफी भारी पड़ी। चुनाव ड्यूटी से लौटने के बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी संक्रमित पाए गए। इनको वीरगंना होटल में बने अस्थाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पिछले दिनों एसएसपी रोहन पी कनय के निर्देश पर पुलिस लाइन समेत सभी थानों में पुलिसकर्मियों की कोरोना जांच कराई गई थी। इसमें कुल पचास पुलिसकर्मी संक्रमित पाए गए। संक्रमितों में सर्वाधिक संख्या चुनावी ड्यूटी से वापस लौटने वाले पुलिसकर्मियों की रही। एसएसपी के मुताबिक संक्रमित पुलिसकर्मियों को कोविड प्रोटोकाल के मुताबिक उपचार शुरू करा दिया गया है।
बंगरा, मऊरानीपुर में तादाद अधिक
कोविड मरीजों की सर्वाधिक संख्या मऊरानीपुर, मोंठ एवं बंगरा ब्लॉक से मिली है। सिर्फ इन्हीं तीन ब्लॉकों से ही तीन हजार से अधिक मरीज सामने आ चुके। चिरगांव, बबीना एवं बामौर ब्लॉक में कोविड मरीजों की संख्या अच्छी-खासी है लेकिन, यहां तमाम ग्रामीण जांच के लिए सामने आने से कतरा रहे हैं। बड़ागांव ब्लॉक से करीब 1300 मरीज मिले हैं। इस ब्लॉक के कई गांवों के शहरी इलाकों से सटे होने की वजह से यहां मरीजों की संख्या काफी अधिक है।
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पिछले साल कोरोना लहर में मजबूत प्रतिरक्षण क्षमता के चलते संक्रमण के सामने ग्रामीण इलाके मजबूत दीवार बने रहे, लेकिन पंचायत चुनावों ने उनका यह सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। चुनाव के चलते दूसरी लहर में ग्रामीण इलाके बुरी तरफ संक्रमण की चपेट में आए हैं। प्रचार के दौरान गांव-गांव घूमने वाले उम्मीदवार एवं समर्थकों ने भी जमकर इसका संक्रमण फैलाया। प्रचार के दौरान जिसकी भी तबियत खराब हुई, वह खुद को आइसोलेट करने के बजाय प्रचार मेें जुटा रहा। कोविड संक्रमण बढ़ाने में पंचायत चुनावों की पुष्टि कोविड-19 की जांच रिपोर्ट के आंकड़े भी करते हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 31 मार्च तक जनपद में कुल संक्रमितों की संख्या 10771 थी, लेकिन तीन अप्रैल से शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया के बाद इसमें अचानक तेजी दिखाई पड़ी। 15 अप्रैल को मतदान खत्म होने के बाद कोविड संक्रमितों की संख्या दो गुने से अधिक 24906 हो गई। हालत इस कदर चिंताजनक है कि यहां के हर तीसरे घर में लोग बुखार, जुकाम जैसे प्रारंभिक लक्षणों की चपेट में हैं। अस्पताल में जो मरीज पहुंच रहे, उनमें अधिकांश ग्रामीण इलाकों के हैं। इसी तरह करीब दो हजार से अधिक सरकारी कर्मचारी अब तक संक्रमित हो चुके। रोजाना इनके सामने आने का सिलसिला जारी है। सिर्फ झांसी में अभी तक पचास से अधिक कर्मचारियों की मौत हो चुकी। शिक्षकों की संख्या इनमें सर्वाधिक है। इस संख्या में रोजाना बढ़ोत्तरी हो रही है।
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जांच कराने को आगे नहीं आ रहे ग्रामीण
कोरोना ने ग्रामीण इलाकों में भले दस्तक दे दी हो लेकिन, अभी ग्रामीण इसकी जांच के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है रोजाना ग्रामीण इलाकों से ऐसे मरीज सामने आ रहे जिनमें बुखार, गले में खराश, सर्दी जुकाम जैसे लक्षण है लेकिन, इन लक्षणों के बावजूद भी वह जांच कराने को राजी नहीं। गांव में ही मेडिकल केमिस्ट से दवाई पूछकर अपना इलाज कर रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है यह स्थिति कभी भी भयावह हो सकती है।
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चुनावी ड्यूटी से लौटे पुलिसकर्मी भी संक्रमित
पंचायत चुनावों की ड्यूटी पुलिस फोर्स को भी काफी भारी पड़ी। चुनाव ड्यूटी से लौटने के बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी संक्रमित पाए गए। इनको वीरगंना होटल में बने अस्थाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पिछले दिनों एसएसपी रोहन पी कनय के निर्देश पर पुलिस लाइन समेत सभी थानों में पुलिसकर्मियों की कोरोना जांच कराई गई थी। इसमें कुल पचास पुलिसकर्मी संक्रमित पाए गए। संक्रमितों में सर्वाधिक संख्या चुनावी ड्यूटी से वापस लौटने वाले पुलिसकर्मियों की रही। एसएसपी के मुताबिक संक्रमित पुलिसकर्मियों को कोविड प्रोटोकाल के मुताबिक उपचार शुरू करा दिया गया है।
बंगरा, मऊरानीपुर में तादाद अधिक
कोविड मरीजों की सर्वाधिक संख्या मऊरानीपुर, मोंठ एवं बंगरा ब्लॉक से मिली है। सिर्फ इन्हीं तीन ब्लॉकों से ही तीन हजार से अधिक मरीज सामने आ चुके। चिरगांव, बबीना एवं बामौर ब्लॉक में कोविड मरीजों की संख्या अच्छी-खासी है लेकिन, यहां तमाम ग्रामीण जांच के लिए सामने आने से कतरा रहे हैं। बड़ागांव ब्लॉक से करीब 1300 मरीज मिले हैं। इस ब्लॉक के कई गांवों के शहरी इलाकों से सटे होने की वजह से यहां मरीजों की संख्या काफी अधिक है।