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डाकू पंचम सिंह बने ‘राजयोगी’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2016 01:05 AM IST
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panchm singh. jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। किसी जमाने में जिन पंचम सिंह के हाथ में बंदूक थी, अब उनके हाथ में माला है और जुबान पर भगवान का भजन। कभी वह दस्यु सम्राट कहे जाते थे और लोग उनसे थर-थर कांपते थे, लेकिन अब उनको राजयोगी का तमगा मिला है और अपने प्रवचनों के जरिए बता रहे हैं कि किस तरह बुराई का रास्ता छोड़ा जा सकता है। वह बता रहे हैं कि बुराई किस तरह इंसान को बर्बाद कर देती है और अच्छाई किस तरह उसे मोक्ष के दरवाजे तक ले जाती है।
यह कहानी है कि डाकू से राजयोगी बने पंचम सिंह की। उन पर हत्या, डकैती और अपहरण के सैकड़ों मामले दर्ज थे। गिरफ्तार हुए, जेल गए और फांसी की सजा सुनाई गई। राष्ट्रपति से गुहार की तो सजा आजीवन कारावास में तब्दील कर दी गई। आठ साल सजा काटने के बाद अच्छे चालचलन पर आगे की सजा माफ कर दी गई। अब पंचम सिंह 94 साल के हैं। इस उम्र में भी बिल्कुल फिट और फुर्तीले। जेल जीवन के दौरान ही वह प्रजापिता ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़ गए। वहां की सदस्य जेल में आकर प्रवचन करतीं और उससे पंचम सिंह प्रभावित हुए। उनका ह्दय परिवर्तन हो गया और वह जेल में ही अच्छे काम करने लगे। कैदियों को इकट्ठा करते और उन्हें बताते कि किस तरह उन्होंने बुरे रास्ते पर चलकर अपना जीवन बर्बाद कर लिया। बुराई छोड़ो और अच्छे बनो।
मध्य प्रदेश के भिंड जिला के सिंहपुरा गांव में लगभग 65 साल पहले पंचम सिंह का पंचायत चुनाव के दौरान झगड़ा हुआ और इसके बाद उनके नाम न जाने कितने आपराधिक मामले जुड़ते गए। वह चंबल में कूद गए और गिरोह बनाया। 14 साल तक उनकी बंदूक गरजती रही। 1972 में लोकनायक जय प्रकाश नारायण की पहल पर डकैत मोहर सिंह और माधव सिंह के साथ पंचम सिंह ने भी अपने साथियों सहित आत्म समर्पण कर दिया। उन्हें मुंगावली गुना की खुली जेल में रखा गया। 1980 में रिहा कर दिया गया। वह शनिवार को प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विद्यालय के मसीहागंज सीपरी सेवाकेंद्र में आए। इस दौरान बताया कि रिहाई के बाद परिवार चलाने के लिए सरकार से मिली जमीन पर पौधा नर्सरी का काम शुरू किया। साथ ही सत्संग जारी रखा। पिछले 35 वर्षों के दौरान 25 राज्यों की 400 जेलों में प्रवचन कर चुके हैं। वह कहते हैं कि दृढ़ संकल्प हो तो इंसान बुराई छोड़ कर नेकी के रास्ते पर चल सकता है। जो अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर और समाज को अर्पित कर दे, उसे राजयोगी ब्रह्म कुमार कहते हैं।
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एकजुटता की आवश्यकता
मसीहागंज सीपरी बाजार में आयोजित सत्संग में सेवाके ंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी पार्वती दीदी ने कहा कि ईश्वरीय प्रयत्नों के बिना भारत को राम राज्य नहीं बना सकते है। आज भेदभाव की नहीं, बल्कि एकजुटता की आवश्यकता है।
राजयोगी पंचम सिंह ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान से मानव बुराईयों से लड़ सकता है। क्योंकि उसे सत्य मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त होती है। ब्रह्मा कुमारी शिल्पी बहन ने कहा कि सच्चे प्रयास के आधार पर ही सुखमय जीवन की कल्पना की जा सकती है। इस अवसर पर बलवंत, अनुराग, रेखा सिंह, विश्वनाथ आदि मौजूद रहे।
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यह कहानी है कि डाकू से राजयोगी बने पंचम सिंह की। उन पर हत्या, डकैती और अपहरण के सैकड़ों मामले दर्ज थे। गिरफ्तार हुए, जेल गए और फांसी की सजा सुनाई गई। राष्ट्रपति से गुहार की तो सजा आजीवन कारावास में तब्दील कर दी गई। आठ साल सजा काटने के बाद अच्छे चालचलन पर आगे की सजा माफ कर दी गई। अब पंचम सिंह 94 साल के हैं। इस उम्र में भी बिल्कुल फिट और फुर्तीले। जेल जीवन के दौरान ही वह प्रजापिता ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़ गए। वहां की सदस्य जेल में आकर प्रवचन करतीं और उससे पंचम सिंह प्रभावित हुए। उनका ह्दय परिवर्तन हो गया और वह जेल में ही अच्छे काम करने लगे। कैदियों को इकट्ठा करते और उन्हें बताते कि किस तरह उन्होंने बुरे रास्ते पर चलकर अपना जीवन बर्बाद कर लिया। बुराई छोड़ो और अच्छे बनो।
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मध्य प्रदेश के भिंड जिला के सिंहपुरा गांव में लगभग 65 साल पहले पंचम सिंह का पंचायत चुनाव के दौरान झगड़ा हुआ और इसके बाद उनके नाम न जाने कितने आपराधिक मामले जुड़ते गए। वह चंबल में कूद गए और गिरोह बनाया। 14 साल तक उनकी बंदूक गरजती रही। 1972 में लोकनायक जय प्रकाश नारायण की पहल पर डकैत मोहर सिंह और माधव सिंह के साथ पंचम सिंह ने भी अपने साथियों सहित आत्म समर्पण कर दिया। उन्हें मुंगावली गुना की खुली जेल में रखा गया। 1980 में रिहा कर दिया गया। वह शनिवार को प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विद्यालय के मसीहागंज सीपरी सेवाकेंद्र में आए। इस दौरान बताया कि रिहाई के बाद परिवार चलाने के लिए सरकार से मिली जमीन पर पौधा नर्सरी का काम शुरू किया। साथ ही सत्संग जारी रखा। पिछले 35 वर्षों के दौरान 25 राज्यों की 400 जेलों में प्रवचन कर चुके हैं। वह कहते हैं कि दृढ़ संकल्प हो तो इंसान बुराई छोड़ कर नेकी के रास्ते पर चल सकता है। जो अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर और समाज को अर्पित कर दे, उसे राजयोगी ब्रह्म कुमार कहते हैं।
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एकजुटता की आवश्यकता
मसीहागंज सीपरी बाजार में आयोजित सत्संग में सेवाके ंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी पार्वती दीदी ने कहा कि ईश्वरीय प्रयत्नों के बिना भारत को राम राज्य नहीं बना सकते है। आज भेदभाव की नहीं, बल्कि एकजुटता की आवश्यकता है।
राजयोगी पंचम सिंह ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान से मानव बुराईयों से लड़ सकता है। क्योंकि उसे सत्य मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त होती है। ब्रह्मा कुमारी शिल्पी बहन ने कहा कि सच्चे प्रयास के आधार पर ही सुखमय जीवन की कल्पना की जा सकती है। इस अवसर पर बलवंत, अनुराग, रेखा सिंह, विश्वनाथ आदि मौजूद रहे।