{"_id":"588113a34f1c1b632aefea22","slug":"pac-start-building-campus-forensic-lab","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएसी परिसर में फोरेंसिक लैब का निर्माण शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएसी परिसर में फोरेंसिक लैब का निर्माण शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
lab, jhansi news
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लंबे समय से अधर में लटकी फोरेंसिक लैब के निर्माण का काम 33 वीं वाहिनी पीएसी राजगढ़ के परिसर में शुरू हो गया है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। 29 करोड़ की लागत से बनने वाली लैब का काम 2018 तक पूरा होना है।
फोरेंसिक लैब नहीं होने से बुंदेलखंड पुलिस को काफी परेशानी हो रही थी। घटनास्थल अथवा लाश के पास से एकत्रित सबूतों की जांच महीनों बाद भी नहीं हो पा रही थी। तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित पड़ी हुई हैं। इन हालातों के चलते करीब तीन साल पहले प्रदेश सरकार ने झांसी में लैब बनाने की संस्तुति की। इसके लिए लखनऊ से आए उच्चाधिकारियों ने कोतवाली के उन्नाव गेट बाहर नगर निगम की जमीन को चुना। हर तरफ से क्लीन चिट मिलने के बाद शासन ने 29 करोड़ के प्रस्ताव में से आठ करोड़ रुपये कार्यदायी संस्था को जारी कर दिए।
कार्यदायी संस्थान ने लैब का निर्माण कार्य शुरू कर दिया लेकिन कुछ समय बाद काम रुकवा दिया गया। तर्क दिया गया कि लैब तक पहुंचने का एप्रोच मार्ग सही नहीं है। लैब आने वाले पुलिस कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद लैब का काम अधर में लटक गया। पुलिस विभाग ने नगर निगम से जमीन मांगी लेकिन वह नहीं दिखा सका। इसके बाद पीएसी के राजगढ़ स्थित परिसर के अंदर जमीन देखी जिसको लेकर काफी उहापोह की स्थिति रही।
विज्ञापन
अंत में पुलिस उच्चाधिकारियों ने पीएसी परिसर की जमीन की क्लीन चिट दे दी। एक पखवाड़ा पहले इस जमीन पर कार्यदायी संस्था ने लैब का निर्माण कार्य शुरू कर दिया, जो साल 2018 में पूरा हो जाएगा। फोरेंसिक विभाग के प्रभारी हेमंत ने बताया कि पीएसी परिसर में एक पखवाड़ा पहले लैब का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
विज्ञापन
फोरेंसिक लैब नहीं होने से बुंदेलखंड पुलिस को काफी परेशानी हो रही थी। घटनास्थल अथवा लाश के पास से एकत्रित सबूतों की जांच महीनों बाद भी नहीं हो पा रही थी। तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित पड़ी हुई हैं। इन हालातों के चलते करीब तीन साल पहले प्रदेश सरकार ने झांसी में लैब बनाने की संस्तुति की। इसके लिए लखनऊ से आए उच्चाधिकारियों ने कोतवाली के उन्नाव गेट बाहर नगर निगम की जमीन को चुना। हर तरफ से क्लीन चिट मिलने के बाद शासन ने 29 करोड़ के प्रस्ताव में से आठ करोड़ रुपये कार्यदायी संस्था को जारी कर दिए।
विज्ञापन
कार्यदायी संस्थान ने लैब का निर्माण कार्य शुरू कर दिया लेकिन कुछ समय बाद काम रुकवा दिया गया। तर्क दिया गया कि लैब तक पहुंचने का एप्रोच मार्ग सही नहीं है। लैब आने वाले पुलिस कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद लैब का काम अधर में लटक गया। पुलिस विभाग ने नगर निगम से जमीन मांगी लेकिन वह नहीं दिखा सका। इसके बाद पीएसी के राजगढ़ स्थित परिसर के अंदर जमीन देखी जिसको लेकर काफी उहापोह की स्थिति रही।
विज्ञापन
अंत में पुलिस उच्चाधिकारियों ने पीएसी परिसर की जमीन की क्लीन चिट दे दी। एक पखवाड़ा पहले इस जमीन पर कार्यदायी संस्था ने लैब का निर्माण कार्य शुरू कर दिया, जो साल 2018 में पूरा हो जाएगा। फोरेंसिक विभाग के प्रभारी हेमंत ने बताया कि पीएसी परिसर में एक पखवाड़ा पहले लैब का निर्माण शुरू कर दिया गया है।