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शादीशुदा बेटी को मां-बाप का घर तत्काल छोड़ने का आदेश
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झांसी। न्यायालय उप जिला मजिस्ट्रेट /वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी क्षितिज द्विवेदी ने एक शादीशुदा बेटी को माता पिता का घर छोड़ने का आदेश जारी किया है। प्रेमनगर थाना पुलिस को इस आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में वृद्ध माता-पिता ने अपनी विवाहिता बेटी पर जबरियां उनके घर में रहने और उत्पीड़ित करने का आरोप लगाया था।
गढ़ियागांव की अंबेडकर नगर कॉलोनी में रहने वाले रेलवे से सेवानिवृत्त 73 वर्षीय बुजुर्ग सुरेश कुमार शर्मा और उनकी पत्नी शारदा शर्मा ने ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम - 2007’ के तहत ट्रिब्यूनल में वाद दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी वारिणी की शादी 2012 में अलीगढ़ निवासी युवक से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद गर्भावस्था में पुत्री उनके घर आ गई थी तथा एक पुत्र को जन्म दिया था। इसके कुछ समय बाद पुत्री अपनी ससुराल चली गई थी। लेकिन, दो माह बाद वापस झांसी आ गई और तब से अपने पुत्र के साथ जबरियां उनके मकान में रह रही है। बेटी उच्च शिक्षित और डिप्लोमाधारी है तथा अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है। कई बार पुत्री को ससुराल वापस जाने के लिए समझाया, यहां तक कि उसका पति भी उसे लेने आया, परंतु वो नहीं गई। इसी बीच पुत्री का व्यवहार उनके प्रति खराब होता चला गया, नौबत गाली-गलौज और मारपीट तक आ गई। इस पर बुजुर्ग माता-पिता ने ट्रिब्यूनल में पुत्री के खिलाफ वाद दायर किया। अधिवक्ता सुमित अग्रवाल ने बताया कि पूरे मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बेटी को तत्काल प्रभाव से माता-पिता का मकान खाली करने का आदेश जारी किया। साथ ही प्रेमनगर थाना पुलिस को निर्देश दिए कि आदेश का पालन कराते हुए अविलंब मकान खाली कराना सुनिश्चित करे।
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गढ़ियागांव की अंबेडकर नगर कॉलोनी में रहने वाले रेलवे से सेवानिवृत्त 73 वर्षीय बुजुर्ग सुरेश कुमार शर्मा और उनकी पत्नी शारदा शर्मा ने ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम - 2007’ के तहत ट्रिब्यूनल में वाद दाखिल किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी वारिणी की शादी 2012 में अलीगढ़ निवासी युवक से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद गर्भावस्था में पुत्री उनके घर आ गई थी तथा एक पुत्र को जन्म दिया था। इसके कुछ समय बाद पुत्री अपनी ससुराल चली गई थी। लेकिन, दो माह बाद वापस झांसी आ गई और तब से अपने पुत्र के साथ जबरियां उनके मकान में रह रही है। बेटी उच्च शिक्षित और डिप्लोमाधारी है तथा अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है। कई बार पुत्री को ससुराल वापस जाने के लिए समझाया, यहां तक कि उसका पति भी उसे लेने आया, परंतु वो नहीं गई। इसी बीच पुत्री का व्यवहार उनके प्रति खराब होता चला गया, नौबत गाली-गलौज और मारपीट तक आ गई। इस पर बुजुर्ग माता-पिता ने ट्रिब्यूनल में पुत्री के खिलाफ वाद दायर किया। अधिवक्ता सुमित अग्रवाल ने बताया कि पूरे मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बेटी को तत्काल प्रभाव से माता-पिता का मकान खाली करने का आदेश जारी किया। साथ ही प्रेमनगर थाना पुलिस को निर्देश दिए कि आदेश का पालन कराते हुए अविलंब मकान खाली कराना सुनिश्चित करे।
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