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Jhansi News: मंडल के 16 स्टेशनों पर सिर्फ उतरते हैं यात्री, चढ़ता कोई नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रेल मंडल के 16 स्टेशन ऐसे हैं, जहां ट्रेनें रुकती तो हैं लेकिन यहां से बीते एक साल में एक भी यात्री सवार नहीं हुआ। रेलवे ने यहां टिकट खिड़की भी खोली है पर यात्री नहीं ही मिले। इसके अलावा, 22 स्टेशन ऐसे हैं, जहां से यात्रियों की संख्या ने दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं किया। हालांकि, यहां उतरने वालों की संख्या साल भर में सैकड़ों में रही है।
स्टेशन पर ट्रेन रुकती है तो इसमें 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। ऐसा इसलिए कि ट्रेन के ब्रेक और रफ्तार पकड़ने में बिजली की खपत बढ़ती है। इसके अलावा, उस ट्रेन के पीछे चल रही ट्रेन को भी दूसरे स्टेशन पर रोका जाता है या रफ्तार कम की जाती है। रेलवे की भाषा में इस खर्च को ट्रैफिक कॉस्ट कहा जाता है। झांसी रेल मंडल इस प्रकार का नुकसान यात्री सेवा के नाम पर प्रतिदिन झेल रहा है। मंडल के 16 स्टेशन पर यात्री सुविधा के लिए जिन 20 जोड़ी ट्रेनों को रोका जा रहा है, उनमें वित्तीय वर्ष में एक भी यात्री सवार नहीं हुए हैं।
अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, इन स्टेशन से एक भी टिकट तक नहीं बिका है। ऐसे में रेलवे को दोगुना नुकसान उठाना पड़ा है।
वर्जन
रेलवे का मानक है कि पहले वैकल्पिक रूप से ट्रेनों का ठहराव छह माह के लिए किया जाता है। यात्रियों का आंकड़ा जुटाया जाता है कि उस स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने वाले यात्रियों की संख्या कितनी है। यदि यात्रियों की संख्या रेलवे के खर्च के अनुसार या उससे अधिक रहती है तो ही स्टेशनों पर ट्रेन का ठहराव नियमित किया जाता है। - मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी
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इन स्टेशन से ट्रेनों में नहीं चढ़े एक भी यात्री
मंडल के अंबिकेश्वर, भटपुरा, विजयपुर रोड, बसारी, दुर्गापुरी, ग्वालियर एनई, झांसी सीबी, कैमराकलां, रमपुरा, राम पहाड़ी, सेरोनी रोड, सिकरौदा संदलपुर, श्योपुरकलां, सरसोकी और सेमई से एक भी यात्री नहीं चढ़े।
इन स्टेशन से हर दिन चढ़े इतने यात्री
अनंतपेठ - 6, आगासोद - 9, भुआ - 8, बिजौली - 8, बुढ़पुरा - 7, बिरारी - 5, छितारी - 2, दैलवारा - 9, दोहरू - 7, जीरोन - 6, करारी - 7, कोटरा - 6, मवई - 1, मोहासा - 4, नंदखास - 9, नूराबाद - 2, राघौली - 8, सांक - 6, सिकरौदा क्वांरी - 4, सिमरियाताल - 1, टीला - 2, ऊसरगांव - 9
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झांसी। रेल मंडल के 16 स्टेशन ऐसे हैं, जहां ट्रेनें रुकती तो हैं लेकिन यहां से बीते एक साल में एक भी यात्री सवार नहीं हुआ। रेलवे ने यहां टिकट खिड़की भी खोली है पर यात्री नहीं ही मिले। इसके अलावा, 22 स्टेशन ऐसे हैं, जहां से यात्रियों की संख्या ने दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं किया। हालांकि, यहां उतरने वालों की संख्या साल भर में सैकड़ों में रही है।
स्टेशन पर ट्रेन रुकती है तो इसमें 15 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। ऐसा इसलिए कि ट्रेन के ब्रेक और रफ्तार पकड़ने में बिजली की खपत बढ़ती है। इसके अलावा, उस ट्रेन के पीछे चल रही ट्रेन को भी दूसरे स्टेशन पर रोका जाता है या रफ्तार कम की जाती है। रेलवे की भाषा में इस खर्च को ट्रैफिक कॉस्ट कहा जाता है। झांसी रेल मंडल इस प्रकार का नुकसान यात्री सेवा के नाम पर प्रतिदिन झेल रहा है। मंडल के 16 स्टेशन पर यात्री सुविधा के लिए जिन 20 जोड़ी ट्रेनों को रोका जा रहा है, उनमें वित्तीय वर्ष में एक भी यात्री सवार नहीं हुए हैं।
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अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, इन स्टेशन से एक भी टिकट तक नहीं बिका है। ऐसे में रेलवे को दोगुना नुकसान उठाना पड़ा है।
वर्जन
रेलवे का मानक है कि पहले वैकल्पिक रूप से ट्रेनों का ठहराव छह माह के लिए किया जाता है। यात्रियों का आंकड़ा जुटाया जाता है कि उस स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने वाले यात्रियों की संख्या कितनी है। यदि यात्रियों की संख्या रेलवे के खर्च के अनुसार या उससे अधिक रहती है तो ही स्टेशनों पर ट्रेन का ठहराव नियमित किया जाता है। - मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी
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इन स्टेशन से ट्रेनों में नहीं चढ़े एक भी यात्री
मंडल के अंबिकेश्वर, भटपुरा, विजयपुर रोड, बसारी, दुर्गापुरी, ग्वालियर एनई, झांसी सीबी, कैमराकलां, रमपुरा, राम पहाड़ी, सेरोनी रोड, सिकरौदा संदलपुर, श्योपुरकलां, सरसोकी और सेमई से एक भी यात्री नहीं चढ़े।
इन स्टेशन से हर दिन चढ़े इतने यात्री
अनंतपेठ - 6, आगासोद - 9, भुआ - 8, बिजौली - 8, बुढ़पुरा - 7, बिरारी - 5, छितारी - 2, दैलवारा - 9, दोहरू - 7, जीरोन - 6, करारी - 7, कोटरा - 6, मवई - 1, मोहासा - 4, नंदखास - 9, नूराबाद - 2, राघौली - 8, सांक - 6, सिकरौदा क्वांरी - 4, सिमरियाताल - 1, टीला - 2, ऊसरगांव - 9