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महज पंद्रह पुलिसकर्मियों के सहारे ही महिला थाना
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झांसी। महिला थाना काम की अधिकता व महिला पुलिसकर्मियों की कमी से जूझ रहा है। प्रतिदिन औसतन 15 से 20 शिकायतें थाने पर पहुंच रही हैं। थाने में इंस्पेक्टर समेत कुल पंद्रह पुलिसकर्मी ही होनेे से न तो समस्या सुलझ पा रही और न ही पुलिस दबिश दे पा रही है। बार-बार पीड़ित महिलाओं को अपनी समस्या दूर कराने के लिए थानों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
501.327 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जिले में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी महिला पुलिस की है। ऐसे में जिले के एक मात्र महिला थाने में एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर, 38 कांस्टेबिल हैं।
लेकिन, थाने के बाहर पेट्रोलिंग वाहन समेत अन्य जगहों पर ड्यूटी लगने के कारण यहां स्टाफ आधे से भी कम रह जाता है। ऐसे में काम भी प्रभावित होता है। महिला थाने के स्टाफ के मुताबिक यहां करीब छह एसआई व 40 कांस्टेबिल की जरूरत है। वर्तमान में थाने में तैनात एक महिला सब इंस्पेक्टर को आशा ज्योति केंद्र व दूसरी को रिपोर्टिंग चौकी महिला थाना भेज दिया गया है।
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जांच अधिकारियों पर काम का बोझ
महिला थाने में एक साल के भीतर करीब 210 मामले दर्ज किए गए। इनकी जांच पुलिसकर्मियों के जिम्मे है। जांच के अलावा प्रतिदिन आठ से दस दंपति या परिवारों की काउंसिलिंग की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। एक महिला पुलिसकर्मी ने बताया कि काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
विवेचना करने बाहर कैसे जाएं
स्टाफ पर थाने में दर्ज होने और ट्रांसफर की जाने वाले मामलों की विवेचनाएं करने की जिम्मेदारी रहती है। यहां अधिकतर मामले में दहेज उत्पीड़न के दर्ज होते हैं। जिनमें परामर्श केंद्र में समझौता ना होने के बाद दर्ज किया जाता है। ऐसे में स्टाफ कम होने के चलते इन पर भार भी बढ़ जाता है। अधिकतर मामलों में छानबीन के चलते स्टाफ को दूसरे जिलों में भी जाना पड़ता है। इसके चलते केस में देरी बढ़ जाती है।
भले ही स्टाफ की कमी हो, लेकिन पुलिस पूरी तत्परता के साथ काम कर रही है। इसका व्यवस्थाओं पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। जरूरत पड़ने पर अन्य पुलिसकर्मियों का सहयोग समय-समय पर लिया जाता है। विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी
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501.327 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जिले में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी महिला पुलिस की है। ऐसे में जिले के एक मात्र महिला थाने में एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर, 38 कांस्टेबिल हैं।
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लेकिन, थाने के बाहर पेट्रोलिंग वाहन समेत अन्य जगहों पर ड्यूटी लगने के कारण यहां स्टाफ आधे से भी कम रह जाता है। ऐसे में काम भी प्रभावित होता है। महिला थाने के स्टाफ के मुताबिक यहां करीब छह एसआई व 40 कांस्टेबिल की जरूरत है। वर्तमान में थाने में तैनात एक महिला सब इंस्पेक्टर को आशा ज्योति केंद्र व दूसरी को रिपोर्टिंग चौकी महिला थाना भेज दिया गया है।
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जांच अधिकारियों पर काम का बोझ
महिला थाने में एक साल के भीतर करीब 210 मामले दर्ज किए गए। इनकी जांच पुलिसकर्मियों के जिम्मे है। जांच के अलावा प्रतिदिन आठ से दस दंपति या परिवारों की काउंसिलिंग की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। एक महिला पुलिसकर्मी ने बताया कि काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
विवेचना करने बाहर कैसे जाएं
स्टाफ पर थाने में दर्ज होने और ट्रांसफर की जाने वाले मामलों की विवेचनाएं करने की जिम्मेदारी रहती है। यहां अधिकतर मामले में दहेज उत्पीड़न के दर्ज होते हैं। जिनमें परामर्श केंद्र में समझौता ना होने के बाद दर्ज किया जाता है। ऐसे में स्टाफ कम होने के चलते इन पर भार भी बढ़ जाता है। अधिकतर मामलों में छानबीन के चलते स्टाफ को दूसरे जिलों में भी जाना पड़ता है। इसके चलते केस में देरी बढ़ जाती है।
भले ही स्टाफ की कमी हो, लेकिन पुलिस पूरी तत्परता के साथ काम कर रही है। इसका व्यवस्थाओं पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। जरूरत पड़ने पर अन्य पुलिसकर्मियों का सहयोग समय-समय पर लिया जाता है। विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी