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ऑनलाइन शॉपिंग ने छीनी बाजार की रौनक, त्योहार पर दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार

Sat, 16 Oct 2021 10:24 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 10:24 PM IST
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Online shopping snatched the beauty of the market, shopkeepers wait for customers on the festival
ऑन लाइन व्यापार के कारण ठप पड़ा रेडीमेड कपड़े की दुकानों पर छाया सन्नाटा। अमर उजाला
झांसी। त्योहार पर ऑनलाइन शॉपिंग के मायाजाल ने बाजार की चाल बिगाड़ दी है। त्योहार पर दुकानों में भरपूर स्टॉक है, लेकिन बाजार में उतने ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालात यह हैं कि व्यापारियों को भरोसा नहीं कि दीपावली तक उनका माल बिक पाएगा। इस कारण दुकानदार कार्ड स्क्रैच समेत कुछ आकर्षक प्रस्तावों के जरिये ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं।
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नवरात्र से त्योहार का सीजन शुरू होते ही लोग नए सामान की खरीदारी शुरू कर देते हैं। यह सिलसिला दीपावली तक बना रहता है। सबसे ज्यादा फ्रिज, वाशिंग मशीन, एलईडी, मिक्सी, ओवन, एसी, इंडेक्शन चूल्हे, मोबाइल, कपड़े, जूता चप्पल, फर्नीचर समेत व्यक्तिगत उपयोग की ढेर सारी वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। दुकानदार भी अधिक से अधिक मुनाफे के लिए भरपूर स्टॉक रखते हैं। भले ही ग्राहकों के लिए ऑनलाइन बाजार फायदे का सौदा साबित हो, लेकिन छोटे व मध्यम वर्ग दर्जे के व्यापारी वर्ग को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन बाजार ने उनके धंधे को आधा कर दिया है।
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ऑनलाइन शॉपिंग से इलेक्ट्रानिक बाजार साठ फीसदी तक कम हो गया है। दूसरा, पहले एक वस्तु बेचने पर दस फीसदी तक फायदा हो जाता था, लेकिन अब ग्राहक दाम जानने के बाद तुरंत इंटरनेट पर उसकी सही कीमत देख लेते हैं। इसके बाद रेट कम करने पड़ते हैं। एक- दो फीसदी का धंधा रह गया है। दुकान के खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है।
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सुनील सोनी, इलेक्ट्रानिक कारोबारी।
ऑनलाइन बाजार से गारमेंट्स का काम 25 से 30 फीसदी कम हो गया है। जबकि ग्राहकों को मालूम होना चाहिए कि कंपनियां उनको ऑनलाइन पुराना माल खरीदकर सस्ते में बेच देती हैं। हालांकि, जिनको कपड़ों की परख है वह दुकान पर ही आकर लेते हैं। कपड़ों की सामने खरीदारी करने से ग्राहकों को संतुष्ट रहते हैं।
रंजीत राठौर, गारमेंट्स कारोबारी।
ऑनलाइन बाजार से मोबाइल कारोबार पर 50 फीसदी से ज्यादा असर पड़ा है। जबकि ग्राहकों को मालूम होना चाहिए कि दुकान से मोबाइल खरीदने पर संतुष्टि रहती है। मोबाइल की सर्विस से लेकर और कोई दिक्कत आ जाए तो सारी जिम्मेदारी दुकानदार की रहती है। ऑनलाइन में यह सब सुविधाएं नहीं मिलती है। ग्राहकों को लुभाने के लिए कई आकर्षक योजनाएं चलाने पड़ रहीं हैं।
श्याम सोनी, मोबाइल कारोबारी।
ऑनलाइन शॉपिंग से जूता- चप्पल का कारोबार 30 से 40 फीसदी खत्म हो गया है। कंपनियों ने कई तरह की छूट देकर इस कारोबार बहुत प्रभावित किया है। जबकि ग्राहकों को मालूम होना चाहिए कि ऑनलाइन में ओरिजनल माल की गारंटी नहीं रहती है। असलियत छुपाकर ग्राहकों को गुमराह किया जाता है।
प्रकाश नरयानी, फुटवेयर कारोबारी।
हर दिन लग रही दो करोड़ की चपत
जिले में रोजाना करीब दो करोड़ का व्यापार ऑनलाइन मार्केट के माध्यम से हो रहा है। इसमें रोजमर्रा की जरूरत के सामान के अलावा घरेलू और व्यक्तिगत उपयोग की ढेर सारी सामग्री शामिल है। कह सकते है कि ऑनलाइन खरीदारी ने घरों की किचन, बेडरूम समेत हर हिस्से में दस्तक दे दी है।

ग्राहकों को लुभा रहा सस्ता सामान
ग्राहकों के मन में एक धारणा बैठ गई है कि बाजार में मिलने वाले सामान की अपेक्षा ऑनलाइन मिलने वाले सामान पर अधिक छूट मिलती है। प्रतिस्पर्धा के चक्कर में कंपनियां ग्राहकों को 30 से 50 फीसदी तक की भी छूट देती है। इससे ग्राहकों का झुकाव ऑनलाइन बाजार की तरफ ज्यादा बढ़ता जा रहा है।
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