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Jhansi News: दिल-दिमाग पर भारी ठंड, एक माह में अटैक और स्ट्रोक से 21 की मौत
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झांसी। सर्दी की अभी शुरूआत ही हुई है और महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में दिसंबर में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक से 21 लोगों की जान जा चुकी है। कई मरीजों की जान तो बच गई मगर लकवा की वजह से वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक के मरीज बढ़ जाते हैं। इसलिए ठंड से बचाव करना जरूरी है।
सर्दियों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इसके अलावा शरीर की नसें भी सिकुड़ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब नसें सिकुड़ती हैं तो खून का संचार धीमा होने से थक्का बन सकता है। वहीं, ज्यादा ब्लड प्रेशर बढ़ जाए तो खून की नस फटने की आशंका रहती है। इसी वजह से सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के मामले ज्यादा आते हैं।
वहीं, जिन लोगों के ह्रदय में पहले से ही ब्लॉकेज होते हैं। उनमें सर्दियों में नसें सिकुड़ने से ह्रदय में खून की सप्लाई बंद हो जाती है। ऐसे में हार्ट अटैक पड़ जाता है। इसी महीने से सर्दियां शुरू हुई हैं और न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में दिसंबर में ही मेडिकल कॉलेज में ह्रदयघात के 160 और लकवा के 140 मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें हार्ट अटैक से 15 और ब्रेन स्ट्रोक से छह लोगों की मौत हो गई। इसमें कई युवा भी शामिल हैं।
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सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि कॉलेज में आने वाले 90 फीसदी हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मरीज ठीक हुए हैं।
ह्रदयघात, लकवा का इन्हें ज्यादा खतरा
- बीपी का रोगी होना
- अनियंत्रित मधुमेह
- धूम्रपान का सेवन करना
- मोटापा होना
- ज्यादा उम्र
इन बातों का रखें ध्यान
- तनाव न लें
- ठंड से बचाव करें
- नियमित व्यायाम करें
- कम वसा वाला खाना खाएं
- बीपी, शुगर की नियमित दवा खाएं
- धूम्रपान, तंबाकू का सेवन न करें
सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के केस काफी बढ़ जाते हैं। जिन्हें बीपी, मधुमेह या मोटापा है, या जिनकी अधिक उम्र है और वह धूम्रपान करते हैं, उन्हें बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। - डॉ. अरविंद कनकने, न्यूरोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
जिन लोगों को पहले से ही हार्ट में ब्लॉकेज हैं, उन्हें सर्दियों में हार्ट अटैक आने का खतरा ज्यादा रहता है। क्योंकि, सर्दियों में नसें सिकुड़ने से हार्ट में खून की सप्लाई बंद हो जाती है। - डॉ. आलोक शर्मा, कार्डियोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
इन दिनों लोगों को ठंड से बचाव करने की जरूरत है। खासकर बुजुर्ग लोग सुबह जल्द टहलने से बचें। ब्रेन स्ट्रोक के मरीज का समय पर थक्का घोलने की दवा नहीं मिली तो फिर जान चली जाती है। इसलिए इलाज में देरी न करें। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन।
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सर्दियों में शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इसके अलावा शरीर की नसें भी सिकुड़ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब नसें सिकुड़ती हैं तो खून का संचार धीमा होने से थक्का बन सकता है। वहीं, ज्यादा ब्लड प्रेशर बढ़ जाए तो खून की नस फटने की आशंका रहती है। इसी वजह से सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के मामले ज्यादा आते हैं।
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वहीं, जिन लोगों के ह्रदय में पहले से ही ब्लॉकेज होते हैं। उनमें सर्दियों में नसें सिकुड़ने से ह्रदय में खून की सप्लाई बंद हो जाती है। ऐसे में हार्ट अटैक पड़ जाता है। इसी महीने से सर्दियां शुरू हुई हैं और न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। ऐसे में दिसंबर में ही मेडिकल कॉलेज में ह्रदयघात के 160 और लकवा के 140 मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें हार्ट अटैक से 15 और ब्रेन स्ट्रोक से छह लोगों की मौत हो गई। इसमें कई युवा भी शामिल हैं।
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सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने बताया कि कॉलेज में आने वाले 90 फीसदी हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मरीज ठीक हुए हैं।
ह्रदयघात, लकवा का इन्हें ज्यादा खतरा
- बीपी का रोगी होना
- अनियंत्रित मधुमेह
- धूम्रपान का सेवन करना
- मोटापा होना
- ज्यादा उम्र
इन बातों का रखें ध्यान
- तनाव न लें
- ठंड से बचाव करें
- नियमित व्यायाम करें
- कम वसा वाला खाना खाएं
- बीपी, शुगर की नियमित दवा खाएं
- धूम्रपान, तंबाकू का सेवन न करें
सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के केस काफी बढ़ जाते हैं। जिन्हें बीपी, मधुमेह या मोटापा है, या जिनकी अधिक उम्र है और वह धूम्रपान करते हैं, उन्हें बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। - डॉ. अरविंद कनकने, न्यूरोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
जिन लोगों को पहले से ही हार्ट में ब्लॉकेज हैं, उन्हें सर्दियों में हार्ट अटैक आने का खतरा ज्यादा रहता है। क्योंकि, सर्दियों में नसें सिकुड़ने से हार्ट में खून की सप्लाई बंद हो जाती है। - डॉ. आलोक शर्मा, कार्डियोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
इन दिनों लोगों को ठंड से बचाव करने की जरूरत है। खासकर बुजुर्ग लोग सुबह जल्द टहलने से बचें। ब्रेन स्ट्रोक के मरीज का समय पर थक्का घोलने की दवा नहीं मिली तो फिर जान चली जाती है। इसलिए इलाज में देरी न करें। - डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन।