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Jhansi News: अकेले इंसान ने पहाड़ तोड़ दिया, फिर बोर्ड परीक्षा से क्या डरना
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झांसी। इंसान ने अकेले पहाड़ तोड़ दिया था। फिर बोर्ड परीक्षा से क्या डरना। जहां चाह है, वहां राह है। सोशल मीडिया पर घंटों बर्बाद करने से कुछ हासिल नहीं होगा। ये समय है पढ़ाई में जुट जाने का। असफलता, मुश्किलें आएंगी मगर लगन और मेहनत से हम इनसे पार पा सकते हैं। बोर्ड परीक्षा से पहले सोमवार को दीनदयाल सभागार में हुए तनाव मुक्त परीक्षा कार्यक्रम में आईएएस, आईपीएस अफसरों ने जीवंत उदाहरणों से छात्रों का मनोबल मजबूत किया। कार्यक्रम में अलग-अलग बोर्ड के छात्र-छात्राओं ने अफसरों से सवाल भी पूछे, जिसका अधिकारियों ने बखूबी जवाब दिया। अपने जीवन में आए कठिन दौर और असफलताओं का जिक्र करते हुए अधिकारियों ने विद्यार्थियों को ये अहसास दिलाया कि जहां से चाह लें, वहीं से नई शुरूआत हो सकती है। अगर दृढ़ इच्छा शक्ति और लगन से कोई काम किया जाएगा, तो सफलता जरूर कदम चूमेगी।
रील न बनाएं, रोजाना अखबार जरूर पढ़ें: डीआईजी
डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने कहा कि बोर्ड परीक्षा नजदीक है। छात्रों ने जो अपने नोट्स बनाएं हैं, उनका रिवीजन करते रहें। जमकर पढ़ाई करें और पर्याप्त नींद लें। जो आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी करेंगे, उन्हें रोज अखबार पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। खासकर संपादकीय पन्ना पढ़ने की। नोट्स बनाने से लेखनी सुधरती है। यूपीएससी में तभी चयन होगा, जब लेखनी अच्छी होगी। अगर अच्छे से किताब पढ़ ली तो मॉडल पेपर की बहुत जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने सच्ची घटना पर आयोजित एक बॉलीवुड फिल्म का जिक्र करते हुए बताया कि अकेले इंसान ने ही पहाड़ तोड़कर रास्ता बना दिया था। मजबूत मन से परीक्षा की तैयारी करें तो सफल जरूर होंगे।
हमें तय करना होगा सोशल मीडिया प्राथमिकता है या पढ़ाई: डीएम
कार्यक्रम में डीएम रविंद्र कुमार ने जब छात्रों से पूछा कि किसका-किसका सोशल मीडिया पर अकाउंट है, तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। फिर उन्होंने कहा कि कई छात्र पढ़ते समय सोशल मीडिया अकाउंट भी देखते रहते हैं। ये भटकाव का काम करता है और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता। हमें तय करना होगा कि सोशल मीडिया प्राथमिकता है या फिर पढ़ाई। इसके अलावा जो विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर तनाव ले रहे हैं, इससे नुकसान ही होगा। घबराने से दिमाग कमजोर हो जाता है। परीक्षा के दौरान क्षमता घट जाती है। समयबद्धता के साथ पढ़ाई करें। परीक्षा के समय सबसे पहले आ रहे सवालों के उत्तर लिखें। इससे कठिन सवालों को हल करने के लिए आपको समय मिल जाएगा।
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दो बार यूपीएससी परीक्षा पास की पर आईएएस नहीं बन पाया: एसएसपी
एसएसपी राजेश एस ने कहा कि उन्होंने दो बार यूपीएससी परीक्षा पास की मगर आईएएस नहीं बन पाए। मगर इसका उन्हें अफसोस नहीं है। उनके साथ यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले दोस्त साक्षात्कार देने के बाद चयनित नहीं हो सके। अब कोई शिक्षक है तो कोई खुद का व्यवसाय कर रहा है। मगर वो भी अपने जीवन में सफल हैं। हर कोई आईएएस, आईपीएस नहीं बन सकता। इसलिए अपने लिए दूसरे विकल्प भी खुले रखें। कहा कि जब वह स्कूल में थे तो सुबह उठकर पढ़ते थे। जब कॉलेज में प्रवेश लिया तो देर रात तक पढ़ने लगे। पढ़ने का कोई समय नहीं होता है। जो समय अच्छा लगे, उस समय पढ़ें। हमें ये पता होना चाहिए कि हम किस विषय में मजबूत हैं और किस में कमजोर। जिस विषय में कमजोर हैं, उसकी तैयारी के लिए ज्यादा समय दें।
छात्र-छात्राएं बुलेट प्वाइंट्स में तैयार करें नोट्स: जेडीए उपाध्यक्ष
जेडीए उपाध्यक्ष आलोक यादव ने कहा कि छात्र-छात्राएं बुलेट प्वाइंट्स यानी सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदु के आधार पर नोट्स बनाएं। नोट्स बनाने से पढ़ा हुआ ज्यादा बेहतर याद हो पाता है। इसका समय-समय पर रिवीजन भी करते रहना चाहिए। बोले कि छात्र-छात्राओं पर परिजन अच्छी रैंक लाने का दबाव बनाते रहते हैं। इसको लेकर ज्यादा चिंतित न हों। हर व्यक्ति की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए जब पढ़ाई कर रहे हों तो परीक्षा या परिणाम के बारे में न सोचें। बस खुद पर आत्मविश्वास रखें। ऐसी न जाने आगे कितनी परीक्षाएं होंगी। कभी सफलता हाथ लगेगी तो कभी असफलता। मगर असफलता को भी सीख के रूप में लें। देखें कहां कमी रह गई है। फिर उसे दूर करें।
छात्रों के सवाल, अफसरों के जवाब
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सवाल: सभी विषयों की पढ़ाई कर ली है। अब रिवीजन कर रहीं हूं पर डर लगता है कि कहीं परीक्षा के दौरान भूल न जाऊं। - सभ्यता पाल, ज्ञानस्थली पब्लिक स्कूल।
जवाब: अप्रैल से सत्र शुरू होता है। अगर जुलाई से ही छात्र ने पढ़ाई की है तो उसके लिए बोर्ड परीक्षा खिलौने जैसी लगेगी। इसलिए घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इस समय पढ़ाई करें और पर्याप्त नींद लें। - डीआईजी।
सवाल: पढ़ने बैठते हैं तो कुछ देर बीच में टॉपिक को छोड़ने का मन करता है। पढ़ने में स्थिरता कैसे बनाए रखें। - अफजल रजा, मॉर्डन पब्लिक स्कूल।
जवाब: जिस समय आपका पढ़ाई में ज्यादा मन लगता है और ज्यादा समझ आता है, उस समय पढ़ाई करें। फिर कुछ देर टहल लें या गाना सुन लें। फिर पढ़ने बैठ जाएं। जितनी देर पढ़ें, उस समय दूसरी बातें न सोचें। - डीएम।
सवाल: परीक्षा को लेकर तैयारी तो अच्छी है। मगर परीक्षा में बैठने को लेकर डर सता रहा है। इसको कैसे दूर किया जाए। - जिगर वर्मा, सेंटर उमर कॉलेज।
जवाब: जब पढ़ रहे हैं तो परीक्षा और उसके परिणाम के बारे में न सोचें। सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें। जैसे आपने स्कूल में प्री बोर्ड परीक्षा दी है। जब बोर्ड की परीक्षा देने बैठेंगे तो कोई डर नहीं लगेगा। - जेडीए उपाध्यक्ष।
सवाल: परीक्षा की घड़ी नजदीक है। किस तरह शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करनी चाहिए। ताकि, कोर्स का पूरा रिवीजन हो जाए। - रिया प्रजापति, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: कुछ लोग सुबह जल्दी उठकर पढ़ते हैं। कुछ लोग देर रात तक पढ़ते हैं। ये आपको तय करना है कि आप किस समय मन लगाकर पढ़ सकते हैं। मगर जब भी पढ़ें पूरा ध्यान पढ़ाई पर होना चाहिए। - एसएसपी।
सवाल: जब इतिहास विषय को पढ़ते हैं तो लगता है कि सब महत्वपूर्ण है और पूरी किताब पढ़ लूं। ऐसे में इसके नोट्स कैसे बनाएं। - रहमान सिद्दीकी, मॉडर्न पब्लिक स्कूल।
जवाब: ये सही है कि ह्यूमैनिटीज में सब कुछ अहम होता है। नोट्स बनाने का मतलब होता है कि आपने टॉपिक को किस तरह समझा। किताब पढ़नी जरूरी है। मगर परीक्षा से पहले रिवीजन करने पर नोट्स काम आते हैं। - जेडीए उपाध्यक्ष।
सवाल: जैसे ही परीक्षा का प्रश्नपत्र मिलता है, वैसे ही घबराहट होने लगती है। इस घबराहट को कैसे दूर किया जाए। - अमन, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: परीक्षा के दौरान कई विद्यार्थियों के साथ ऐसा होता है। मगर ये तब होता है, जब तैयारी पूरी नहीं होती है। ऐसे में पेपर देखने के बाद जो सवाल आ रहे हों, उन्हें पहले हल करें। सबसे अंत में कठिन सवालों को हल करें। - डीएम।
सवाल: इतना सिलेबस होता है कि रिवीजन करने का समय नहीं मिलता। परीक्षा नजदीक है। फिर कैसे रिवीजन करें। - वंशिका बबेले, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: दिनभर में जो पढ़ा है, उसे रात में सोते समय मन में सोचें। फिर वो आपके अवचेतन मन (सब कांशस माइंड) में दर्ज हो जाएगा। जब आप रिवीजन करना शुरू करेंगे तो आपको याद आता जाएगा। - एसएसपी।
सवाल: प्री बोर्ड परीक्षाएं स्कूल में दी हैं। मगर बोर्ड परीक्षा दूसरे स्कूल में जाकर देनी पड़ेगी। इसको लेकर डर बना है। - स्तुति अग्रवाल, महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल।
जवाब: चाहें स्कूल में परीक्षा हो या फिर दूसरे केंद्र पर आपने जो पढ़ा है, उससे जुड़े सवाल ही प्रश्नपत्र में आएंगे। जब आप पेपर देने बैठेंगे तो केंद्र को भूल जाएंगे। पूरा फोकस सिर्फ पेपर पर ही रहेगा। - जेडीए उपाध्यक्ष।
सवाल: सब कहते हैं कि समय प्रबंधन करना जरूरी है। मगर कैसे किया जाए? अधिकारी कैसे टाइम मैनेजमेंट करते हैं? - कृष्णा गुप्ता, महात्मा हंसराज मॉर्डन स्कूल।
जवाब: हमारे सामने भी समय प्रबंधन की चुनौती रहती है। मगर ये बहुत बड़ी चीज नहीं है। महत्वपूर्ण पहलू तय करके उसके लिए समय का निर्धारण करें। रोज का चार्ट बनाकर काम करेंगे तो चीजें आसान होती जाएंगी। - डीएम।
सवाल: बोर्ड परीक्षा में बेहतर करने की उम्मीद परिजन, शिक्षक और रिश्तेदार लगाए बैठे हैं और हम दबाव महसूस कर रहे हैं। - वंशिका तिवारी, सेंट उमर कॉलेज।
जवाब: अपनी क्षमता को दूसरों से छिपाए रखें। ज्यादा पढ़ें मगर कम बताएं। जो अपनी क्षमता को प्रचारित नहीं करते हैं, उनकी मेहनत दिखाई दे जाती है। परिजन, रिश्तेदार या फिर शिक्षक भी दबाव नहीं बनाते हैं। - डीआईजी।
सवाल: पढ़ते समय अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। ऐसा क्या करें कि लक्ष्य से न भटकें। - हर्ष कुमार, महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल।
जवाब: हमें अपनी प्राथमिकता तय करनी चाहिए। ये तय करना होगा कि सोशल मीडिया हमारी प्राथमिकता है या फिर पढ़ाई। पढ़ते समय सोशल मीडिया देखेंगे तो लक्ष्य से भटकेंगे। इन दिनों सोशल मीडिया से दूर रहें। - डीएम।
सवाल: जो पूरे साल पढ़ते हैं, वो भी पास हो जाते हैं। जो साल भर पढ़ाई नहीं हैं, वो भी उत्तीर्ण हो जाते हैं। - जिली साहू, सेंट उमर कॉलेज।
जवाब: हमारा फोकस खुद पर होना चाहिए, दूसरों पर नहीं। हमसे जो पीछे है, उसके बारे में न सोचें। बल्कि, जो आगे है, उससे आगे निकलने की सोचें। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन भी जरूरी होती है। - डीआईजी।
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डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने कहा कि बोर्ड परीक्षा नजदीक है। छात्रों ने जो अपने नोट्स बनाएं हैं, उनका रिवीजन करते रहें। जमकर पढ़ाई करें और पर्याप्त नींद लें। जो आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी करेंगे, उन्हें रोज अखबार पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। खासकर संपादकीय पन्ना पढ़ने की। नोट्स बनाने से लेखनी सुधरती है। यूपीएससी में तभी चयन होगा, जब लेखनी अच्छी होगी। अगर अच्छे से किताब पढ़ ली तो मॉडल पेपर की बहुत जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने सच्ची घटना पर आयोजित एक बॉलीवुड फिल्म का जिक्र करते हुए बताया कि अकेले इंसान ने ही पहाड़ तोड़कर रास्ता बना दिया था। मजबूत मन से परीक्षा की तैयारी करें तो सफल जरूर होंगे।
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कार्यक्रम में डीएम रविंद्र कुमार ने जब छात्रों से पूछा कि किसका-किसका सोशल मीडिया पर अकाउंट है, तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। फिर उन्होंने कहा कि कई छात्र पढ़ते समय सोशल मीडिया अकाउंट भी देखते रहते हैं। ये भटकाव का काम करता है और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता। हमें तय करना होगा कि सोशल मीडिया प्राथमिकता है या फिर पढ़ाई। इसके अलावा जो विद्यार्थी पढ़ाई को लेकर तनाव ले रहे हैं, इससे नुकसान ही होगा। घबराने से दिमाग कमजोर हो जाता है। परीक्षा के दौरान क्षमता घट जाती है। समयबद्धता के साथ पढ़ाई करें। परीक्षा के समय सबसे पहले आ रहे सवालों के उत्तर लिखें। इससे कठिन सवालों को हल करने के लिए आपको समय मिल जाएगा।
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एसएसपी राजेश एस ने कहा कि उन्होंने दो बार यूपीएससी परीक्षा पास की मगर आईएएस नहीं बन पाए। मगर इसका उन्हें अफसोस नहीं है। उनके साथ यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले दोस्त साक्षात्कार देने के बाद चयनित नहीं हो सके। अब कोई शिक्षक है तो कोई खुद का व्यवसाय कर रहा है। मगर वो भी अपने जीवन में सफल हैं। हर कोई आईएएस, आईपीएस नहीं बन सकता। इसलिए अपने लिए दूसरे विकल्प भी खुले रखें। कहा कि जब वह स्कूल में थे तो सुबह उठकर पढ़ते थे। जब कॉलेज में प्रवेश लिया तो देर रात तक पढ़ने लगे। पढ़ने का कोई समय नहीं होता है। जो समय अच्छा लगे, उस समय पढ़ें। हमें ये पता होना चाहिए कि हम किस विषय में मजबूत हैं और किस में कमजोर। जिस विषय में कमजोर हैं, उसकी तैयारी के लिए ज्यादा समय दें।
छात्र-छात्राएं बुलेट प्वाइंट्स में तैयार करें नोट्स: जेडीए उपाध्यक्ष
जेडीए उपाध्यक्ष आलोक यादव ने कहा कि छात्र-छात्राएं बुलेट प्वाइंट्स यानी सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदु के आधार पर नोट्स बनाएं। नोट्स बनाने से पढ़ा हुआ ज्यादा बेहतर याद हो पाता है। इसका समय-समय पर रिवीजन भी करते रहना चाहिए। बोले कि छात्र-छात्राओं पर परिजन अच्छी रैंक लाने का दबाव बनाते रहते हैं। इसको लेकर ज्यादा चिंतित न हों। हर व्यक्ति की क्षमता अलग-अलग होती है। इसलिए जब पढ़ाई कर रहे हों तो परीक्षा या परिणाम के बारे में न सोचें। बस खुद पर आत्मविश्वास रखें। ऐसी न जाने आगे कितनी परीक्षाएं होंगी। कभी सफलता हाथ लगेगी तो कभी असफलता। मगर असफलता को भी सीख के रूप में लें। देखें कहां कमी रह गई है। फिर उसे दूर करें।
छात्रों के सवाल, अफसरों के जवाब
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सवाल: सभी विषयों की पढ़ाई कर ली है। अब रिवीजन कर रहीं हूं पर डर लगता है कि कहीं परीक्षा के दौरान भूल न जाऊं। - सभ्यता पाल, ज्ञानस्थली पब्लिक स्कूल।
जवाब: अप्रैल से सत्र शुरू होता है। अगर जुलाई से ही छात्र ने पढ़ाई की है तो उसके लिए बोर्ड परीक्षा खिलौने जैसी लगेगी। इसलिए घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इस समय पढ़ाई करें और पर्याप्त नींद लें। - डीआईजी।
सवाल: पढ़ने बैठते हैं तो कुछ देर बीच में टॉपिक को छोड़ने का मन करता है। पढ़ने में स्थिरता कैसे बनाए रखें। - अफजल रजा, मॉर्डन पब्लिक स्कूल।
जवाब: जिस समय आपका पढ़ाई में ज्यादा मन लगता है और ज्यादा समझ आता है, उस समय पढ़ाई करें। फिर कुछ देर टहल लें या गाना सुन लें। फिर पढ़ने बैठ जाएं। जितनी देर पढ़ें, उस समय दूसरी बातें न सोचें। - डीएम।
सवाल: परीक्षा को लेकर तैयारी तो अच्छी है। मगर परीक्षा में बैठने को लेकर डर सता रहा है। इसको कैसे दूर किया जाए। - जिगर वर्मा, सेंटर उमर कॉलेज।
जवाब: जब पढ़ रहे हैं तो परीक्षा और उसके परिणाम के बारे में न सोचें। सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दें। जैसे आपने स्कूल में प्री बोर्ड परीक्षा दी है। जब बोर्ड की परीक्षा देने बैठेंगे तो कोई डर नहीं लगेगा। - जेडीए उपाध्यक्ष।
सवाल: परीक्षा की घड़ी नजदीक है। किस तरह शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करनी चाहिए। ताकि, कोर्स का पूरा रिवीजन हो जाए। - रिया प्रजापति, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: कुछ लोग सुबह जल्दी उठकर पढ़ते हैं। कुछ लोग देर रात तक पढ़ते हैं। ये आपको तय करना है कि आप किस समय मन लगाकर पढ़ सकते हैं। मगर जब भी पढ़ें पूरा ध्यान पढ़ाई पर होना चाहिए। - एसएसपी।
सवाल: जब इतिहास विषय को पढ़ते हैं तो लगता है कि सब महत्वपूर्ण है और पूरी किताब पढ़ लूं। ऐसे में इसके नोट्स कैसे बनाएं। - रहमान सिद्दीकी, मॉडर्न पब्लिक स्कूल।
जवाब: ये सही है कि ह्यूमैनिटीज में सब कुछ अहम होता है। नोट्स बनाने का मतलब होता है कि आपने टॉपिक को किस तरह समझा। किताब पढ़नी जरूरी है। मगर परीक्षा से पहले रिवीजन करने पर नोट्स काम आते हैं। - जेडीए उपाध्यक्ष।
सवाल: जैसे ही परीक्षा का प्रश्नपत्र मिलता है, वैसे ही घबराहट होने लगती है। इस घबराहट को कैसे दूर किया जाए। - अमन, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: परीक्षा के दौरान कई विद्यार्थियों के साथ ऐसा होता है। मगर ये तब होता है, जब तैयारी पूरी नहीं होती है। ऐसे में पेपर देखने के बाद जो सवाल आ रहे हों, उन्हें पहले हल करें। सबसे अंत में कठिन सवालों को हल करें। - डीएम।
सवाल: इतना सिलेबस होता है कि रिवीजन करने का समय नहीं मिलता। परीक्षा नजदीक है। फिर कैसे रिवीजन करें। - वंशिका बबेले, महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कॉलेज।
जवाब: दिनभर में जो पढ़ा है, उसे रात में सोते समय मन में सोचें। फिर वो आपके अवचेतन मन (सब कांशस माइंड) में दर्ज हो जाएगा। जब आप रिवीजन करना शुरू करेंगे तो आपको याद आता जाएगा। - एसएसपी।
सवाल: प्री बोर्ड परीक्षाएं स्कूल में दी हैं। मगर बोर्ड परीक्षा दूसरे स्कूल में जाकर देनी पड़ेगी। इसको लेकर डर बना है। - स्तुति अग्रवाल, महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल।
जवाब: चाहें स्कूल में परीक्षा हो या फिर दूसरे केंद्र पर आपने जो पढ़ा है, उससे जुड़े सवाल ही प्रश्नपत्र में आएंगे। जब आप पेपर देने बैठेंगे तो केंद्र को भूल जाएंगे। पूरा फोकस सिर्फ पेपर पर ही रहेगा। - जेडीए उपाध्यक्ष।
सवाल: सब कहते हैं कि समय प्रबंधन करना जरूरी है। मगर कैसे किया जाए? अधिकारी कैसे टाइम मैनेजमेंट करते हैं? - कृष्णा गुप्ता, महात्मा हंसराज मॉर्डन स्कूल।
जवाब: हमारे सामने भी समय प्रबंधन की चुनौती रहती है। मगर ये बहुत बड़ी चीज नहीं है। महत्वपूर्ण पहलू तय करके उसके लिए समय का निर्धारण करें। रोज का चार्ट बनाकर काम करेंगे तो चीजें आसान होती जाएंगी। - डीएम।
सवाल: बोर्ड परीक्षा में बेहतर करने की उम्मीद परिजन, शिक्षक और रिश्तेदार लगाए बैठे हैं और हम दबाव महसूस कर रहे हैं। - वंशिका तिवारी, सेंट उमर कॉलेज।
जवाब: अपनी क्षमता को दूसरों से छिपाए रखें। ज्यादा पढ़ें मगर कम बताएं। जो अपनी क्षमता को प्रचारित नहीं करते हैं, उनकी मेहनत दिखाई दे जाती है। परिजन, रिश्तेदार या फिर शिक्षक भी दबाव नहीं बनाते हैं। - डीआईजी।
सवाल: पढ़ते समय अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। ऐसा क्या करें कि लक्ष्य से न भटकें। - हर्ष कुमार, महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल।
जवाब: हमें अपनी प्राथमिकता तय करनी चाहिए। ये तय करना होगा कि सोशल मीडिया हमारी प्राथमिकता है या फिर पढ़ाई। पढ़ते समय सोशल मीडिया देखेंगे तो लक्ष्य से भटकेंगे। इन दिनों सोशल मीडिया से दूर रहें। - डीएम।
सवाल: जो पूरे साल पढ़ते हैं, वो भी पास हो जाते हैं। जो साल भर पढ़ाई नहीं हैं, वो भी उत्तीर्ण हो जाते हैं। - जिली साहू, सेंट उमर कॉलेज।
जवाब: हमारा फोकस खुद पर होना चाहिए, दूसरों पर नहीं। हमसे जो पीछे है, उसके बारे में न सोचें। बल्कि, जो आगे है, उससे आगे निकलने की सोचें। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन भी जरूरी होती है। - डीआईजी।