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केन-बेतवा लिंक परियोजना का स्थलीय परीक्षण शुरू
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झांसी। बुंदेलखंड के लिए अहम मानी जाने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना का स्थलीय परीक्षण शुरू हो गया। बेतवा परियोजना के मुख्य अभियंता महेश्वरी प्रसाद की अगुवाई में अभियंताओं के दल ने सोमवार को गांव दौधन पहुंचकर स्थलीय परीक्षण किया। यहीं केन नदी पर सबसे पहला करीब 77 मीटर ऊंचा दौधन बांध बनेगा। अभियंताओं ने यहां पहुंचकर बांध स्थल की मार्किंग की। दौधन बांध से लगभग 221 किमी लंबी केन-बेतवा लिंक नहर निकलेगी। झांसी में बरूआसागर के पास बेतवा नदी से जोड़ दिया जाएगा।
सिंचाई अभियंताओं का यह काम किसी भी कीमत में दिसंबर से पहले आरंभ कराने के निर्देश हैं। इसको देखते हुए सिंचाई विभाग ने कवायद तेज कर दी है। सिंचाई अफसरों का कहना है कि परियोजना के लिए शिलान्यास का काम अक्तूबर से नवंबर माह के बीच कराने की कोशिश की जा रही है। शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री के यहां आने की उम्मीद है। बता दें, परियोजना की कुल लागत की 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि दस फीसदी में यूपी एवं मप्र सरकार बराबर की हिस्सेदारी करेंगे। परियोजना के जरिए बरियारपुर पिकअप वीयर, पारीछा वीयर, बरूआसागर बांध एवं बरूआ नाला को भी दुरुस्त किया जाएगा।
यूपी को सलाना 750 एमसीएम पानी
परियोजना के जरिए यूपी को सलाना 750 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिल सकेगा। हालांकि इस बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच काफी अरसे तक पेच फंसा रहा। मप्र जहां पूरे साल का पानी एक साथ देने की बात कह रहा था। वहीं उप्र फसली सीजन के मुताबिक पानी मांग रहा था। उप्र का कहना था मानसून के बाद भी 780 मिलियन क्यूबिक मीटर(एमसीएम) पानी की आवश्यकता है। जबकि मप्र पूरे साल में 700 एमसीएम से अधिक पानी देने को राजी नहीं था। केंद्र के दखल के बाद दोनों राज्य नए फार्मूले पर राजी हुए। उसके मुताबिक यूपी को सलाना 750 एमसीएम पानी दिया जाना है। इस तरह 71 प्रतिशत पानी मप्र के हिस्से में आएगा जबकि 29 प्रतिशत पानी उप्र को दिया जाएगा।
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सिंचाई अभियंताओं का यह काम किसी भी कीमत में दिसंबर से पहले आरंभ कराने के निर्देश हैं। इसको देखते हुए सिंचाई विभाग ने कवायद तेज कर दी है। सिंचाई अफसरों का कहना है कि परियोजना के लिए शिलान्यास का काम अक्तूबर से नवंबर माह के बीच कराने की कोशिश की जा रही है। शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री के यहां आने की उम्मीद है। बता दें, परियोजना की कुल लागत की 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि दस फीसदी में यूपी एवं मप्र सरकार बराबर की हिस्सेदारी करेंगे। परियोजना के जरिए बरियारपुर पिकअप वीयर, पारीछा वीयर, बरूआसागर बांध एवं बरूआ नाला को भी दुरुस्त किया जाएगा।
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यूपी को सलाना 750 एमसीएम पानी
परियोजना के जरिए यूपी को सलाना 750 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी मिल सकेगा। हालांकि इस बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच काफी अरसे तक पेच फंसा रहा। मप्र जहां पूरे साल का पानी एक साथ देने की बात कह रहा था। वहीं उप्र फसली सीजन के मुताबिक पानी मांग रहा था। उप्र का कहना था मानसून के बाद भी 780 मिलियन क्यूबिक मीटर(एमसीएम) पानी की आवश्यकता है। जबकि मप्र पूरे साल में 700 एमसीएम से अधिक पानी देने को राजी नहीं था। केंद्र के दखल के बाद दोनों राज्य नए फार्मूले पर राजी हुए। उसके मुताबिक यूपी को सलाना 750 एमसीएम पानी दिया जाना है। इस तरह 71 प्रतिशत पानी मप्र के हिस्से में आएगा जबकि 29 प्रतिशत पानी उप्र को दिया जाएगा।
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