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अब वन विभाग की जमीनों पर नहीं हो सकेंगे कब्जे
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झांसी। वन विभाग की सतर्कता और कड़े कानून के बाद भी वन भूमियों पर अतिक्रमण और कब्जों के कारण हर समय विवाद की स्थिति बनी रहती है। विवाद के स्थायी निदान के लिए विभाग द्वारा जिले के वन क्षेत्र का डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिसनिंग सिस्टम (डीजीपीएस) का सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए मुख्यालय से ही टीम का गठन किया जाएगा।
वर्तमान में जिले का भौगोलिक क्षेत्र 5054 वर्ग किलोमीटर है। जिसमें वन क्षेत्र 33422.920 हेक्टेयर है। विभाग के पास कर्मचारियों की कमी व वन क्षेत्र का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण आए दिन वन विभाग की जमीनों पर कब्जे व अतिक्रमण की शिकायतें मिलती रहती रहती हैं। सबसे अधिक कब्जों की शिकायतें उस जगह से मिलती हैं जहां पर करीब में ही आबादी बसी होती है। नियमित निगरानी नहीं होने के कारण वन विभाग की कई जमीनों पर कब्जे भी कर लिए गए हैं। कई वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। वहीं राजस्व विभाग और वन विभाग में भी कई बार भूमि विवाद सामने आ चुके हैं। दोनों ही विभागों के संयुक्त सर्वे के बाद ही भूमि विवाद का निपटारा होता है। हालांकि विभाग के पास मैनुअली मानचित्र है। लेकिन अब परेशानी से निजात पाने के लिए वन विभाग ने डीजीपीएस के माध्यम से सर्वे कराकर डिजीटल मैप बनाने की योजना को तैयार किया है। जिसके तहत जिले के वन क्षेत्र का सर्वे डीजीपीएस के माध्यम से कराया जाएगा। सर्वे की जिम्मेंदारी भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान देहरादून को सौंपी गई है। संस्थान द्वारा तकनीकी विशेषज्ञ संस्था से सेटेलाइट के माध्यम से वन क्षेत्र का सर्वे कराकर डिजीटल मैप को तैयार किया जाएगा।
विभाग द्वारा वन क्षेत्र का सर्वे डीजीपीएस के माध्यम से कराना सुनिश्चित किया गया है। डिजीटल मैप होने से जमीनी विवाद पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी। जल्द ही सर्वे शुरू किया जाएगा।
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वीके मिश्रा, जिला वन अधिकारी
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वर्तमान में जिले का भौगोलिक क्षेत्र 5054 वर्ग किलोमीटर है। जिसमें वन क्षेत्र 33422.920 हेक्टेयर है। विभाग के पास कर्मचारियों की कमी व वन क्षेत्र का क्षेत्रफल अधिक होने के कारण आए दिन वन विभाग की जमीनों पर कब्जे व अतिक्रमण की शिकायतें मिलती रहती रहती हैं। सबसे अधिक कब्जों की शिकायतें उस जगह से मिलती हैं जहां पर करीब में ही आबादी बसी होती है। नियमित निगरानी नहीं होने के कारण वन विभाग की कई जमीनों पर कब्जे भी कर लिए गए हैं। कई वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। वहीं राजस्व विभाग और वन विभाग में भी कई बार भूमि विवाद सामने आ चुके हैं। दोनों ही विभागों के संयुक्त सर्वे के बाद ही भूमि विवाद का निपटारा होता है। हालांकि विभाग के पास मैनुअली मानचित्र है। लेकिन अब परेशानी से निजात पाने के लिए वन विभाग ने डीजीपीएस के माध्यम से सर्वे कराकर डिजीटल मैप बनाने की योजना को तैयार किया है। जिसके तहत जिले के वन क्षेत्र का सर्वे डीजीपीएस के माध्यम से कराया जाएगा। सर्वे की जिम्मेंदारी भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान देहरादून को सौंपी गई है। संस्थान द्वारा तकनीकी विशेषज्ञ संस्था से सेटेलाइट के माध्यम से वन क्षेत्र का सर्वे कराकर डिजीटल मैप को तैयार किया जाएगा।
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विभाग द्वारा वन क्षेत्र का सर्वे डीजीपीएस के माध्यम से कराना सुनिश्चित किया गया है। डिजीटल मैप होने से जमीनी विवाद पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी। जल्द ही सर्वे शुरू किया जाएगा।
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वीके मिश्रा, जिला वन अधिकारी