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Jhansi News: अब बदले जाएंगे अंग्रेजों के जमाने वाले गेट
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड के सबसे पुराने पारीछा बांध में पानी रोकने को लगाए गए अंग्रेजों के जमाने के गेट अब बदले जाएंगे। इनकी जगह नई तकनीक पर आधारित गेट लगेंगे। इससे बारिश में गेट बंद करने एवं खोलने में आसानी होगी। इसके डीपीआर बनाने का काम पूरा करा लिया गया है।
पारीछा बांध का निर्माण वर्ष 1875 में कराया गया था। उस जमाने में पत्थर, चूना एवं सुर्खी से बना यह बांध आज भी मजबूती के मामले में बेजोड़ है। उसी जमाने में बांध में पानी रोकने के लिए 318 बड़े-बड़े गेट लगाए गए थे। बारिश के दिनों में पानी रोकने के लिए यह गेट खड़े कर दिए जाते हैं। इनके विशाल काय होने की वजह से बड़ी संख्या में श्रमिकों को लगाना पड़ता है। सैकड़ों साल से यह गेट मैनुअल तरीके से ही काम कर रहे हैं हालांकि इसमें परेशानी भी होती है। सिंचाई अभियंताओं का कहना है एक इंच पानी अधिक होने पर गेट खड़ा रख पाना मुश्किल होता है। ऐसे में बांध का समुचित उपयोग नहीं हो पाता। इसको देखते हुए गेट को आधुनिक तकनीकी पर करने की जरूरत बताई गई। केन-बेतवा लिंक परियोजना के जरिए पारीछा बांध में सुधार होना है। इसको देखते हुए पहले चरण में गेट संचालन को आधुनिक किया जाएगा। अभियंताओं ने बताया कि इसका डीपीआर बना लिया गया है। नए प्रस्ताव के मुताबिक यहां 318 गेट की जगह अब महज 118 गेट लगाए जाएंगे। इस पर तकनीकी टीम ने भी सहमति जता दी है। अधिशासी अभियंता अरविंद सचान के मुताबिक डीपीआर मंजूर होने के बाद यह काम कराया जाएगा।
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झांसी। बुंदेलखंड के सबसे पुराने पारीछा बांध में पानी रोकने को लगाए गए अंग्रेजों के जमाने के गेट अब बदले जाएंगे। इनकी जगह नई तकनीक पर आधारित गेट लगेंगे। इससे बारिश में गेट बंद करने एवं खोलने में आसानी होगी। इसके डीपीआर बनाने का काम पूरा करा लिया गया है।
पारीछा बांध का निर्माण वर्ष 1875 में कराया गया था। उस जमाने में पत्थर, चूना एवं सुर्खी से बना यह बांध आज भी मजबूती के मामले में बेजोड़ है। उसी जमाने में बांध में पानी रोकने के लिए 318 बड़े-बड़े गेट लगाए गए थे। बारिश के दिनों में पानी रोकने के लिए यह गेट खड़े कर दिए जाते हैं। इनके विशाल काय होने की वजह से बड़ी संख्या में श्रमिकों को लगाना पड़ता है। सैकड़ों साल से यह गेट मैनुअल तरीके से ही काम कर रहे हैं हालांकि इसमें परेशानी भी होती है। सिंचाई अभियंताओं का कहना है एक इंच पानी अधिक होने पर गेट खड़ा रख पाना मुश्किल होता है। ऐसे में बांध का समुचित उपयोग नहीं हो पाता। इसको देखते हुए गेट को आधुनिक तकनीकी पर करने की जरूरत बताई गई। केन-बेतवा लिंक परियोजना के जरिए पारीछा बांध में सुधार होना है। इसको देखते हुए पहले चरण में गेट संचालन को आधुनिक किया जाएगा। अभियंताओं ने बताया कि इसका डीपीआर बना लिया गया है। नए प्रस्ताव के मुताबिक यहां 318 गेट की जगह अब महज 118 गेट लगाए जाएंगे। इस पर तकनीकी टीम ने भी सहमति जता दी है। अधिशासी अभियंता अरविंद सचान के मुताबिक डीपीआर मंजूर होने के बाद यह काम कराया जाएगा।
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