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अब छह दिन में खपाई जाएगी करोड़ों की रकम
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झांसी। वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब महज छह दिन शेष हैं लेकिन, तमाम महकमे करोड़ों रुपये दबाए बैठे रहे। शासन भी दरियादिली दिखाते हुए पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई जैसे महकमों को आखिरी माह में भी दनादन वित्तीय स्वीकृतियां दे रहा है। ऐसे में इस रकम को खर्च करने के लिए इन दिनों इन विभागों के बीच दोगुनी रफ्तार से फाइल दौड़ लगा रही हैं।
कोविड-19 के चलते विभिन्न विभागों को मिलने वाली ग्रांट में भारी-भरकम कटौती हुई लेकिन, फिर भी कई विभागों के पास करोड़ों रुपये बिना खर्च किए पड़े हैं। इनमें जेडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, लघु सिंचाई, सेतू निगम, आरईएस जैसे अहम विभाग शामिल हैं। दिलचस्प बात यह कि वित्तीय गड़बड़ी रोकने को फरवरी माह से नई वित्तीय स्वीकृतियों पर रोक लगाई गई लेकिन, कई महकमों की झोली आखिरी माह में भी भरती रही। लघु सिंचाई विभाग को मार्च महीने में लघु सिंचाई योजना के तहत 73.66 लाख रुपये जारी किए गए।
इसी तरह सिंचाई विभाग को सिल्ट सफाई के नाम पर फरवरी महीने में 65 लाख रुपये दिए गए। पीडब्ल्यूडी के खाते में भी इसी माह मोटी रकम आई है। इस रकम के अलावा इन महकमों के पास मोटी रकम पहले से भी पड़ी है। ऐसे में अब स्थानीय स्तर पर दनादन पुरानी स्वीकृतियां दी जा रही हैं। दफ्तरों के रखरखाव एवं मरम्मत के नाम पर भी अफसर दोनों हाथों से पैसा खर्च कर रहे हैं। बजट सरेंडर करने से बचने के लिए सिंचाई विभाग के एक आला अफसर के चैंबर का भी नए सिरे से रंग-रोगन करा दिया गया। इनके अलावा दूसरे विभागों में भी बजट खपाने के लिए शाम के बाद भी दफ्तर खोलकर बिल निपटाए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों के खुद के बजट के अलावा इस बार विभिन्न कार्यों के लिए अलग से कुल 30872.97 लाख रुपये आंवटित किए गए थे।
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कोविड-19 के चलते विभिन्न विभागों को मिलने वाली ग्रांट में भारी-भरकम कटौती हुई लेकिन, फिर भी कई विभागों के पास करोड़ों रुपये बिना खर्च किए पड़े हैं। इनमें जेडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, लघु सिंचाई, सेतू निगम, आरईएस जैसे अहम विभाग शामिल हैं। दिलचस्प बात यह कि वित्तीय गड़बड़ी रोकने को फरवरी माह से नई वित्तीय स्वीकृतियों पर रोक लगाई गई लेकिन, कई महकमों की झोली आखिरी माह में भी भरती रही। लघु सिंचाई विभाग को मार्च महीने में लघु सिंचाई योजना के तहत 73.66 लाख रुपये जारी किए गए।
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इसी तरह सिंचाई विभाग को सिल्ट सफाई के नाम पर फरवरी महीने में 65 लाख रुपये दिए गए। पीडब्ल्यूडी के खाते में भी इसी माह मोटी रकम आई है। इस रकम के अलावा इन महकमों के पास मोटी रकम पहले से भी पड़ी है। ऐसे में अब स्थानीय स्तर पर दनादन पुरानी स्वीकृतियां दी जा रही हैं। दफ्तरों के रखरखाव एवं मरम्मत के नाम पर भी अफसर दोनों हाथों से पैसा खर्च कर रहे हैं। बजट सरेंडर करने से बचने के लिए सिंचाई विभाग के एक आला अफसर के चैंबर का भी नए सिरे से रंग-रोगन करा दिया गया। इनके अलावा दूसरे विभागों में भी बजट खपाने के लिए शाम के बाद भी दफ्तर खोलकर बिल निपटाए जा रहे हैं। विभिन्न विभागों के खुद के बजट के अलावा इस बार विभिन्न कार्यों के लिए अलग से कुल 30872.97 लाख रुपये आंवटित किए गए थे।
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