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15 प्रतिशत रह गई दवाओं की मांग, 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन, 2400 रेमडेसिविर की भरमार
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पंद्रह प्रतिशत रह गई दवाओं की मांग, 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन, 2400 रेमडेसिविर की भरमार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कोरोना से घटते मामलों के चलते अब महामारी से मुकाबले के लिए जरूरत से ज्यादा सामग्री जिले में उपलब्ध है। अब झांसी में दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर की मांग घटकर 80 फीसदी घटकर महज 15 लाख के आसपास रह गई है। इसके अलावा ऑक्सीजन की उपलब्धता 80 मीट्रिक टन है, जो कि क्षमता का शत-प्रतिशत है। वहीं, मौजूदा समय में लगभग 2400 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी हैं, जिसको लेकर कोरोना के पीक के दौरान हाहाकार मचा रहा।
झांसी में कोरोना महामारी की दूसरी लहर अप्रैल में आई थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे अव्यवस्थाएं बढ़ती चली गईं। जिले के अस्पतालों में बेड कम पड़ गई तो ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत शुरू हो गई। हालांकि, केंद्र और प्रदेश सरकार के तेज प्रयासों की बदौलत चार से पांच दिनों में इस समस्या को काफी हद तक दूर कर दिया गया। सबसे ज्यादा हो-हल्ला रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मचा। जबरदस्त कालाबाजारी और नकली सप्लाई ने जनता की कमर तोड़कर रख दी। इसके पीछे का बड़ा कारण जिले के अफसरों का ढुलमुल रवैया रहा। नाकामी इस कदर रही कि लंबे समय पर नकली इंजेक्शन करने वालों पर कार्रवाई ही नहीं हुई। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तक शासन तक गूंज पहुंची। वहां से आदेश आने के बाद तत्काल कार्रवाई शुरू हुई। मगर अब इस इंजेक्शन की मांग भी घट गई है। हाल ये है कि प्रतिदिन 15-20 इंजेक्शन की खपत है और मौजूदा समय में 2400 इंजेक्शन उपलब्ध हैं। वहीं, 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भी उपलब्ध है। जबकि, अब प्रतिदिन छह मीट्रिक टन की मांग है। वहीं, कोरोना के पीक के दौरान झांसी में दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर समेत कोरोना से जुड़ी किट का कारोबार दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो कि अब घटकर महज 25 लाख ही रह गया है।
इन दवाओं में इतनी गिरावट
दवा मांग घटी
पैरासिटामोल 90 प्रतिशत
एंटीबायोटिक 90 प्रतिशत
स्टेरॉयड 95 प्रतिशत
मास्क 75 प्रतिशत
सैनिटाइजर 80 प्रतिशत
वेंटिलेटर बेड तक खाली, मेडिकल कॉलेज में फ्लोर एक बंद
कोरोना के घटते मामलों के चलते अब सरकारी अस्पतालों में भी बेड खाली हो गए हैं। अब मेडिकल कॉलेज में फ्लोर नंबर एक को बंद कर दिया गया है। यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं है। वहीं, 60 में से 30 वेंटिलेटर बेड खाली हैं। कुल मिलाकर कोविड अस्पताल में 250 में से 100 में मरीज भर्ती है। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी दो-चार ही कोरोना के मरीज भर्ती हैं।
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जिले में ऑक्सीजन की उपलब्धता 80 मीट्रिक टन है, जबकि प्रतिदिन छह मीट्रिक टन की ही खपत बची है। अब झांसी में ऑक्सीजन की कमी कतई नहीं होगी। इसके अलावा 2400 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी उपलब्ध हैं। वहीं, मांग महज 15 से 20 की है। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर और पल्स ऑक्सीमीटर की मांग में एकदम से काफी कमी आ गई है। कोरोना जब पीक पर था तो दो करोड़ रुपये तक कोरोना किट से जुड़ी दवाएं, उपकरण बिक रहे थे, वो अब घटकर महज 25 लाख के आसपास रह गए हैं। - नितिन मोदी, सचिव, जिला केमिस्ट एसोसिएशन।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कोरोना से घटते मामलों के चलते अब महामारी से मुकाबले के लिए जरूरत से ज्यादा सामग्री जिले में उपलब्ध है। अब झांसी में दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर की मांग घटकर 80 फीसदी घटकर महज 15 लाख के आसपास रह गई है। इसके अलावा ऑक्सीजन की उपलब्धता 80 मीट्रिक टन है, जो कि क्षमता का शत-प्रतिशत है। वहीं, मौजूदा समय में लगभग 2400 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी हैं, जिसको लेकर कोरोना के पीक के दौरान हाहाकार मचा रहा।
झांसी में कोरोना महामारी की दूसरी लहर अप्रैल में आई थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे अव्यवस्थाएं बढ़ती चली गईं। जिले के अस्पतालों में बेड कम पड़ गई तो ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत शुरू हो गई। हालांकि, केंद्र और प्रदेश सरकार के तेज प्रयासों की बदौलत चार से पांच दिनों में इस समस्या को काफी हद तक दूर कर दिया गया। सबसे ज्यादा हो-हल्ला रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मचा। जबरदस्त कालाबाजारी और नकली सप्लाई ने जनता की कमर तोड़कर रख दी। इसके पीछे का बड़ा कारण जिले के अफसरों का ढुलमुल रवैया रहा। नाकामी इस कदर रही कि लंबे समय पर नकली इंजेक्शन करने वालों पर कार्रवाई ही नहीं हुई। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तक शासन तक गूंज पहुंची। वहां से आदेश आने के बाद तत्काल कार्रवाई शुरू हुई। मगर अब इस इंजेक्शन की मांग भी घट गई है। हाल ये है कि प्रतिदिन 15-20 इंजेक्शन की खपत है और मौजूदा समय में 2400 इंजेक्शन उपलब्ध हैं। वहीं, 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भी उपलब्ध है। जबकि, अब प्रतिदिन छह मीट्रिक टन की मांग है। वहीं, कोरोना के पीक के दौरान झांसी में दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर समेत कोरोना से जुड़ी किट का कारोबार दो करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो कि अब घटकर महज 25 लाख ही रह गया है।
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इन दवाओं में इतनी गिरावट
दवा मांग घटी
पैरासिटामोल 90 प्रतिशत
एंटीबायोटिक 90 प्रतिशत
स्टेरॉयड 95 प्रतिशत
मास्क 75 प्रतिशत
सैनिटाइजर 80 प्रतिशत
वेंटिलेटर बेड तक खाली, मेडिकल कॉलेज में फ्लोर एक बंद
कोरोना के घटते मामलों के चलते अब सरकारी अस्पतालों में भी बेड खाली हो गए हैं। अब मेडिकल कॉलेज में फ्लोर नंबर एक को बंद कर दिया गया है। यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं है। वहीं, 60 में से 30 वेंटिलेटर बेड खाली हैं। कुल मिलाकर कोविड अस्पताल में 250 में से 100 में मरीज भर्ती है। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी दो-चार ही कोरोना के मरीज भर्ती हैं।
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जिले में ऑक्सीजन की उपलब्धता 80 मीट्रिक टन है, जबकि प्रतिदिन छह मीट्रिक टन की ही खपत बची है। अब झांसी में ऑक्सीजन की कमी कतई नहीं होगी। इसके अलावा 2400 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी उपलब्ध हैं। वहीं, मांग महज 15 से 20 की है। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
दवाओं, मास्क, सैनिटाइजर और पल्स ऑक्सीमीटर की मांग में एकदम से काफी कमी आ गई है। कोरोना जब पीक पर था तो दो करोड़ रुपये तक कोरोना किट से जुड़ी दवाएं, उपकरण बिक रहे थे, वो अब घटकर महज 25 लाख के आसपास रह गए हैं। - नितिन मोदी, सचिव, जिला केमिस्ट एसोसिएशन।