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Jhansi News: एक बूंद भी नहीं आया पानी, थमा दिया 37 हजार से ज्यादा का बिल
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। नल कनेक्शन लेने के बाद भी उपभोक्ता को जल संस्थान पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा था। अप्रैल 2022 से एक बूंद पानी नल में नहीं आया पर जल संस्थान ने उसे 37,307 रुपये का बिल उसे थमा दिया। बिल भरने का जल संस्थान के अधिकारी दबाव बना रहे थे। उपभोक्ता न्यायालय ने सुनवाई करते हुए जल संस्थान को बिल वसूलने पर रोक लगा दी।
सैंयर गेट बाहर निवासी चौधरी मोहम्मद ने उपभोक्ता न्यायालय में 7 अप्रैल 2018 में वाद दायर करते हुए बताया कि उन्होंने सुविधा के लिए जल संस्थान से पानी के लिए संयोजन ले रखा था। जब तक पानी आता रहा, वह बिल की अदायगी भी करते रहे पर अप्रैल 2002 के बाद से उनके यहां पानी आना बंद हो गया। आलम यह हुआ कि नल में एक बूंद पानी न मिलने के कारण उन्हें यहां-वहां से व्यवस्था करनी होती थी। दूसरी ओर, जल संस्थान ने उन्हें 37,307 रुपये का बिल थमा दिया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि जब उन्हें पानी नहीं मिल रहा ताे फिर किस बात का बिल और उन्होंने बिल अदायगी से इंकार कर दिया। इधर, अधिकारी उन पर बिल भरने का दबाव बनाने लगे। इस पर उन्होंने उपभोक्ता न्यायालय की शरण ली। उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्य देवेश अग्निहोत्री और ज्योतिप्रभा जैन ने मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद तीनों ने निर्णय लिया कि जब उपभोक्ता को पानी उपलब्ध नहीं किया गया तो जल संस्थान को किसी प्रकार की अदायगी का हक नहीं बनता। इस परिवादी को दिए गए 37,307 के बिल की वसूली पर रोक लगा दी।
झांसी। नल कनेक्शन लेने के बाद भी उपभोक्ता को जल संस्थान पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहा था। अप्रैल 2022 से एक बूंद पानी नल में नहीं आया पर जल संस्थान ने उसे 37,307 रुपये का बिल उसे थमा दिया। बिल भरने का जल संस्थान के अधिकारी दबाव बना रहे थे। उपभोक्ता न्यायालय ने सुनवाई करते हुए जल संस्थान को बिल वसूलने पर रोक लगा दी।
सैंयर गेट बाहर निवासी चौधरी मोहम्मद ने उपभोक्ता न्यायालय में 7 अप्रैल 2018 में वाद दायर करते हुए बताया कि उन्होंने सुविधा के लिए जल संस्थान से पानी के लिए संयोजन ले रखा था। जब तक पानी आता रहा, वह बिल की अदायगी भी करते रहे पर अप्रैल 2002 के बाद से उनके यहां पानी आना बंद हो गया। आलम यह हुआ कि नल में एक बूंद पानी न मिलने के कारण उन्हें यहां-वहां से व्यवस्था करनी होती थी। दूसरी ओर, जल संस्थान ने उन्हें 37,307 रुपये का बिल थमा दिया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि जब उन्हें पानी नहीं मिल रहा ताे फिर किस बात का बिल और उन्होंने बिल अदायगी से इंकार कर दिया। इधर, अधिकारी उन पर बिल भरने का दबाव बनाने लगे। इस पर उन्होंने उपभोक्ता न्यायालय की शरण ली। उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्य देवेश अग्निहोत्री और ज्योतिप्रभा जैन ने मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद तीनों ने निर्णय लिया कि जब उपभोक्ता को पानी उपलब्ध नहीं किया गया तो जल संस्थान को किसी प्रकार की अदायगी का हक नहीं बनता। इस परिवादी को दिए गए 37,307 के बिल की वसूली पर रोक लगा दी।
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