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शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में नई तकनीक की कपलिंग लगाई
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शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में अब नहीं लगेगा झटका
झांसी। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में लगे एलएचबी कोचों के बफर में नई तकनीक के कप्लर लगाए गए हैं। इससे ब्रेक लगने पर अब ट्रेन में यात्रियों को जर्क (झटका ) नहीं लगेगा। दुर्घटना होेने पर कोच एक दूसरे पर भी नहीं चढ़ेंगे। इससे इन ट्रेनों में यात्रा अब और अधिक सुगम हो गई है।
रेट पटरियों पर अभी आधे से अधिक आईसीएफ (इंट्रीगल कोच फैक्ट्री) कोच (सवारी डिब्बे) दौड़ रहे हैं। आईसीएफ कोच में दो डिब्बों की कपलिंग के बीच एक लोहे की रॉड डाल दी जाती है। दुर्घटना होने पर इन डिब्बों के एक दूसरे पर चढ़ने की संभावना रहती है। मगर, पिछले दो साल से इन कोचों का निर्माण बंद कर दिया गया है। इनकी जगह अब सभी फैक्ट्रियों में एलएचबी कोच (लिंक हॉफमैन बुश) बनाए जा रहे हैं। नई तकनीक की कपलिंग में डिब्बों के एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना कम होती है। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगने के बाद उनमें नई तकनीक के कप्लर लगा दिए हैं।
मालूम हो कि एलएचबी कोच में एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण इसके डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते हैं। इसमें डिस्क ब्रेक सिस्टम होता है, जिससे ट्रेन को जल्दी रोका जा सकता है। व्हील बेस आईसीएफ कोच के मुकाबले छोटा होता है जो हाई स्पीड होने पर भी रेल को सुरक्षित रखता है। इससे दुर्घटना की आशंका कम होती है। इन कोचों को हर पांच लाख किलोमीटर पर मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। इन कोच में अगर आप बैठेंगे तो ट्रेन के चलने की आवाज और झटके आपको ज्यादा परेशान नहीं करते हैं। इसका साउंड लेवल 60 डेसीबल का होता है। एवरेज स्पीड 160 से 200 किलोमीटर होती है।
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झांसी। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में लगे एलएचबी कोचों के बफर में नई तकनीक के कप्लर लगाए गए हैं। इससे ब्रेक लगने पर अब ट्रेन में यात्रियों को जर्क (झटका ) नहीं लगेगा। दुर्घटना होेने पर कोच एक दूसरे पर भी नहीं चढ़ेंगे। इससे इन ट्रेनों में यात्रा अब और अधिक सुगम हो गई है।
रेट पटरियों पर अभी आधे से अधिक आईसीएफ (इंट्रीगल कोच फैक्ट्री) कोच (सवारी डिब्बे) दौड़ रहे हैं। आईसीएफ कोच में दो डिब्बों की कपलिंग के बीच एक लोहे की रॉड डाल दी जाती है। दुर्घटना होने पर इन डिब्बों के एक दूसरे पर चढ़ने की संभावना रहती है। मगर, पिछले दो साल से इन कोचों का निर्माण बंद कर दिया गया है। इनकी जगह अब सभी फैक्ट्रियों में एलएचबी कोच (लिंक हॉफमैन बुश) बनाए जा रहे हैं। नई तकनीक की कपलिंग में डिब्बों के एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना कम होती है। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगने के बाद उनमें नई तकनीक के कप्लर लगा दिए हैं।
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मालूम हो कि एलएचबी कोच में एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होता है, जिसके कारण इसके डिब्बे आसानी से पटरी से नहीं उतर पाते हैं। इसमें डिस्क ब्रेक सिस्टम होता है, जिससे ट्रेन को जल्दी रोका जा सकता है। व्हील बेस आईसीएफ कोच के मुकाबले छोटा होता है जो हाई स्पीड होने पर भी रेल को सुरक्षित रखता है। इससे दुर्घटना की आशंका कम होती है। इन कोचों को हर पांच लाख किलोमीटर पर मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है। इन कोच में अगर आप बैठेंगे तो ट्रेन के चलने की आवाज और झटके आपको ज्यादा परेशान नहीं करते हैं। इसका साउंड लेवल 60 डेसीबल का होता है। एवरेज स्पीड 160 से 200 किलोमीटर होती है।
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