झांसी। कोरोना महामारी ने इस बार त्योहारों के उत्साह को खत्म कर दिया है। ढाई दशक बाद ऐसी स्थिति बनी है, जब ट्रेनों में दीपावली और दशहरे पर बड़ी संख्या में लोग रिजर्वेशन नहीं करा रहे हैं। अन्यथा ट्रेन खुलने के चार महीने पहले ही उक्त त्योहारों पर ट्रेनों में सीट पाने के लिए मारामारी मच जाती थी।
बुंदेलखंड के हजारों लोग पूणे, मुंबई, बंगलूरू, सूरत, अहमदाबाद, नागपुर समेत विभिन्न शहरों में नौकरी, मजदूरी या पढ़ाई कर रहे हैं। दीपावली और दशहरे पर घर लौटने को लेकर इन लोगों में उत्साह रहता था। यही कारण है कि ट्रेनों में चार महीने पहले रिजर्वेशन मिलना शुरू होते ही कंफर्म सीट पाने के लिए मारामारी मच जाती थी। लेकिन इस बार कोरोना महामारी ने त्योहारों के उत्साह पर पानी फेर दिया है। इस बार दीपावली 14 नवंबर और दशहरा 25 अक्तूबर को पड़ रहा है। अक्तूबर और नवंबर में आरक्षण मिलना शुरू हो गया है, लेकिन उक्त त्योहारों के आसपास की तिथियों में सीटें खाली पड़ीं हैं। पहले तो कुशीनगर एक्सप्रेस, पुष्पक एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, गोवा एक्सप्रेस, बंगलूरू राजधानी एक्सप्रेस, साबरमती एक्सप्रेस, लोकमान्य तिलक गोरखपुर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में शुरूआत के पहले हफ्ते में ही सीटें भर जाती थीं। सीटें भरने पर लोगों को तत्काल टिकट के भरोसे रहना पड़ता था। इस समय लोग कोरोना संक्रमण के चलते ट्रेन में सफर करने से बच रहे हैं। बेहद जरूरत पर ही लोग सफर कर रहे हैं। झांसी स्टेशन से जहां प्रतिदिन 20 हजार अनारक्षित और पांच हजार आरक्षित टिकटों पर यात्री सफर करते थे। अभी यह संख्या घटकर तीन से चार हजार रह गई है।