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Jhansi News: तीन साल में ही संरक्षित सूची से बाहर कर दी गईं नौ ऐतिहासिक धरोहरें
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से वाकिफ कराने वाली इमारतों को सहेजने के बजाय उनको धीरे-धीरे संरक्षित सूची से ही बाहर किया जा रहा है। पिछले तीन साल में झांसी मंडल में रघुनाथ राव महल समेत नौ ऐतिहासिक इमारतें संरक्षित सूची से बाहर की जा चुकी हैं। बदलाव करने की पांबदियां भी खत्म हो गई। अब इनके स्वरूप में मनचाहा बदलाव किया जा सकेगा। पुरातत्व विभाग के अफसरों का तर्क है कि पर्यटन बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल पर देने के लिए संरक्षित सूची से बाहर किया गया।
बुंदेलखंड में मध्य काल में बुंदेला, चंदेल आदि राजघरानों ने ऐतिहासिक किले, गढ़ी, सराय समेत कई इमारतें बनवाईं। अधिकांश इमारतों का आज भी वजूद कायम है। इनके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए दशकों पहले इनके सरंक्षण का जिम्मा पुरातत्व विभाग को सौंपा गया, लेकिन धीरे-धीरे इन इमारतों का जिम्मा विभाग से वापस लिया जा रहा है। तीन साल पहले इसकी शुरुआत हुई। सबसे पहले झांसी स्थित फूटा दरवाजे के सामने की जमीन को पुरातत्व विभाग से लेकर डी-नोटिफाई किया गया। उसके बाद से यह सिलसिला आगे बढ़ गया। तीन साल के भीतर नौ महत्वपूर्ण इमारतों को पुरातत्व विभाग से वापस लिया जा चुका है। रघुनाथ राव महल, रानी महल के सामने की जमीन, बरुआसागर किला, टहरौली का किला, दिगारा की गढ़ी समेत कई अहम स्थान इसमें शामिल हैं। पुरातत्व अधिकारी राजीव त्रिवेदी का कहना है कि शासन स्तर पर लिए गए निर्णय के चलते इन इमारतों को डी-नोटिफाई किया गया।
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संरक्षित सूची से बाहर हुईं इमारतें
फूटा दरवाजे के सामने की भूमि झांसी
रानी महल के सामने की भूमि, झांसी
रघुनाथ राव महल झांसी
बरुआसागर किला, झांसी
चंपतराय का महल, झांसी
टहरौली का किला, झांसी
बालाबेहट किला, ललितपुर
सेनापति महल, कुलपहाड़, महोबा
दिगारा गढ़ी, झांसी
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अभी पुरातत्व विभाग के पास संरक्षित किले एवं गढ़ियां
बौना चोर का किला, बौंडा
ठकुरपुरा की गढ़ी
अम्मरगढ़ का किला
डिमरौनी की गढ़ी
गुसाइयों का किला
बुनकरों की गढ़ी
लोहागढ़ किला
गुरसराय का किला
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रघुनाथ राव महल को संवारने पर खर्च हो चुके करोड़ों
ऐतिहासिक रघुनाथ राव महल को संवारने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। नगर निगम ने यहां बने पार्क को नए सिरे से खूबसूरत बनाने पर अमृत योजना के तहत 1.74 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह काम भी चार साल पहले ही कराए गए। इस वजह से आसपास हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगी थी। पुरातत्व विभाग से संरक्षित जमीन होने के नाते अतिक्रमण भी नहीं हो रहा था, लेकिन अब इस पर फिर से संकट पैदा हो गया।
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