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Jhansi News: तन पर न तो लिबास बचा न मांस... मां की पहनाई सोने की चेन ने कराई दूल्हे की पहचान
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हाईवे पर हादसा-फालोअप
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। तन पर न तो लिबास बचा था और न ही मांस। आग ने अरमानों और खुशियों को तो राख किया ही साथ ही चारों शवों की पहचान तक छीन ली। पारीछा ओवरब्रिज पर कार में लगी आग बुझने के बाद जब कार का दरवाजा खुला तो दूल्हा समेत चारों मृतकों के शवों की केवल हड्डियां ही निकलीं। दूल्हे का मासूम भतीजा तो अपने पापा की गोद में बैठे-बैठे ही राख हो गया। पुलिसकर्मी भी एकबारगी शवों का हाल देख सिहर गए। कार के भीतर से खुरचकर जैसे-तैसे शव के हिस्से इकट्ठा किए गए। जब शवों का पोस्टमार्टम हुआ तो मां की पहनाई सोने की चेन ने दूल्हे आकाश की पहचान कराई। वहीं हाथ में चिपके बैग से दूल्हे के भाई आशीष को पहचाना जा सका।
शुक्रवार रात 12 बजे पारीछा ओवर ब्रिज पर दर्दनाक हादसे में कार के अंदर जलकर मरे गांव करके की विलायटी निवासी दूल्हा आकाश (25), उसके बड़े भाई आशीष (30), भतीजा मयंक (4) और चालक जयकरन (32) के शव इतनी बुरी तरह से जल गए थे कि उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी। बचाव कार्य में लगे पुलिसकर्मियों का कहना है कि कार के अंदर का दृश्य बेहद वीभत्स था। भीषण दुर्गंध आ रही थी। शव गाड़ी में जगह जगह चिपके हुए थे। मृतकों के सिर, हाथ, पांव में मांस ही नहीं बचा था। सिर्फ हड्डियां ही दिख रही थीं। परिवार वालों ने बताया कि जब दूल्हा आकाश बरात लेकर घर से निकल रहा था तब बरात की विदाई से पहले उसकी मां विमलेश ने शगुन के रूप में सोने की चेन पहनाई थी। पोस्टमार्टम के दौरान यही सोने की चेन उसकी गले की हड्डियों से चिपकी मिली। इसी चेन से आकाश को पहचाना गया।
दूल्हे के भाई आशीष और चालक जयकरन के शव भी पहचान में नहीं आ रहे थे। बरात निकलने से पहले आशीष ने हाथ में काले रंग का बैग लिया था। आशीष के हाथ में वही बैग चिपका मिला। इसी काले रंग के बैग से आशीष की पहचान हुई। इसके बाद चालक जयकरन और आशीष के बेटे मयंक की पहचान की गई। वैसे तो पोस्टमार्टम के लिए शवों में कुछ बचा नहीं था लेकिन फिर भी प्रक्रिया को पूरा किया गया। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक जल जाने की वजह से शव काफी हद तक नष्ट हो गए थे।
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गांव में मचा रहा कोहराम
गांव करके की विलायटी में मृतकों के घर पर रविवार को भी कोहराम मचा रहा। मां विमलेश एवं आशीष की पत्नी अर्चना का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजन समेत गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे। मां विमलेश दोनों बेटों और पोते को याद करके बार-बार बेहोश हो जा रहीं थी। परिवार के लोग उनको किसी तरह संभालते रहे। वहीं गांवभर में गमगीन माहौल रहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। तन पर न तो लिबास बचा था और न ही मांस। आग ने अरमानों और खुशियों को तो राख किया ही साथ ही चारों शवों की पहचान तक छीन ली। पारीछा ओवरब्रिज पर कार में लगी आग बुझने के बाद जब कार का दरवाजा खुला तो दूल्हा समेत चारों मृतकों के शवों की केवल हड्डियां ही निकलीं। दूल्हे का मासूम भतीजा तो अपने पापा की गोद में बैठे-बैठे ही राख हो गया। पुलिसकर्मी भी एकबारगी शवों का हाल देख सिहर गए। कार के भीतर से खुरचकर जैसे-तैसे शव के हिस्से इकट्ठा किए गए। जब शवों का पोस्टमार्टम हुआ तो मां की पहनाई सोने की चेन ने दूल्हे आकाश की पहचान कराई। वहीं हाथ में चिपके बैग से दूल्हे के भाई आशीष को पहचाना जा सका।
शुक्रवार रात 12 बजे पारीछा ओवर ब्रिज पर दर्दनाक हादसे में कार के अंदर जलकर मरे गांव करके की विलायटी निवासी दूल्हा आकाश (25), उसके बड़े भाई आशीष (30), भतीजा मयंक (4) और चालक जयकरन (32) के शव इतनी बुरी तरह से जल गए थे कि उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी। बचाव कार्य में लगे पुलिसकर्मियों का कहना है कि कार के अंदर का दृश्य बेहद वीभत्स था। भीषण दुर्गंध आ रही थी। शव गाड़ी में जगह जगह चिपके हुए थे। मृतकों के सिर, हाथ, पांव में मांस ही नहीं बचा था। सिर्फ हड्डियां ही दिख रही थीं। परिवार वालों ने बताया कि जब दूल्हा आकाश बरात लेकर घर से निकल रहा था तब बरात की विदाई से पहले उसकी मां विमलेश ने शगुन के रूप में सोने की चेन पहनाई थी। पोस्टमार्टम के दौरान यही सोने की चेन उसकी गले की हड्डियों से चिपकी मिली। इसी चेन से आकाश को पहचाना गया।
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दूल्हे के भाई आशीष और चालक जयकरन के शव भी पहचान में नहीं आ रहे थे। बरात निकलने से पहले आशीष ने हाथ में काले रंग का बैग लिया था। आशीष के हाथ में वही बैग चिपका मिला। इसी काले रंग के बैग से आशीष की पहचान हुई। इसके बाद चालक जयकरन और आशीष के बेटे मयंक की पहचान की गई। वैसे तो पोस्टमार्टम के लिए शवों में कुछ बचा नहीं था लेकिन फिर भी प्रक्रिया को पूरा किया गया। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह के मुताबिक जल जाने की वजह से शव काफी हद तक नष्ट हो गए थे।
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गांव में मचा रहा कोहराम
गांव करके की विलायटी में मृतकों के घर पर रविवार को भी कोहराम मचा रहा। मां विमलेश एवं आशीष की पत्नी अर्चना का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजन समेत गांव के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे। मां विमलेश दोनों बेटों और पोते को याद करके बार-बार बेहोश हो जा रहीं थी। परिवार के लोग उनको किसी तरह संभालते रहे। वहीं गांवभर में गमगीन माहौल रहा।