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Jhansi News: प्राकृतिक खेती बना किसानों की आय बढ़ाने का मॉडल
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- पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
समथर। मोंठ ब्लॉक के ग्राम साकिन में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत कृषि सखी सीआरपी पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। जो चार जून से आठ जून तक चलेगा। गो आधारित प्राकृतिक खेती के मॉडल के बारे में जानकारी दी गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना के अंतर्गत संचालित प्राकृतिक खेती केंद्र का जिला झांसी के किसानों को जैविक खेती के बारे में प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह ने विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न तरीकों का अध्ययन किया और स्थानीय किसानों से संवाद किया।
ग्राम साकिन का यह फार्म गो आधारित प्राकृतिक खेती का आदर्श मॉडल बन चुका है, जहां स्थानीय प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह ने अपनी मेहनत और नवाचार से न केवल उपज को कई गुना बढ़ाया है बल्कि किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने हैं।
इस मॉडल में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ और आटे के मिश्रण से बनी जैविक खाद का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता और उत्पादन क्षमता दोनों में बढ़ोतरी हो रही है। अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि एक ग्राम देसी गोबर में तीन से पांच करोड़ सकारात्मक बैक्टीरिया होते हैं, जो खेत को उर्वर बनाने में सहायक हैं। जब इस गोबर में गुड़, आटा और गोमूत्र मिलाकर खेत में डाला जाता है, तो यह 18 दिन में प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाता है।
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उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा विकसित ‘सिक्स इन वन – एकल लल्ला किसान सिस्टम’ मॉडल में आधा एकड़ भूमि में 10 देसी गाय, गोबर गैस प्लांट, स्प्रिंकलर सिस्टम तथा 25% भूमि पर फलदार वृक्ष लगाने की विधि अपनाई जाती है। इससे छह माह में किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाती है और दूसरे वर्ष में यह तीन से चार गुना तक बढ़ सकती है।
केंद्र पर स्थापित देसी गायों की डेरी, गोबर गैस प्लांट, सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर तथा फलदार पौधों की व्यवस्था परस्पर पूरक हैं। इनसे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है बल्कि पशुओं को भी पौष्टिक आहार मिलता है। जब गाय प्राकृतिक आहार खाती हैं, तो उनके गोबर से तैयार खाद भी अधिक प्रभावी होती है। इस अवसर पर ब्लॉक बंगरा, बबीना, बड़गांव, मऊरानीपुर से आए किसान जिसमें रिंस जैन, भारत सिंह नन्ने राजा, रणजीत सिंह, उर्मिला राजपूत, सीताराम झां, विक्रम सिंह परिहार, महेश राजपूत उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
समथर। मोंठ ब्लॉक के ग्राम साकिन में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग योजना के तहत कृषि सखी सीआरपी पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। जो चार जून से आठ जून तक चलेगा। गो आधारित प्राकृतिक खेती के मॉडल के बारे में जानकारी दी गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना के अंतर्गत संचालित प्राकृतिक खेती केंद्र का जिला झांसी के किसानों को जैविक खेती के बारे में प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह ने विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के विभिन्न तरीकों का अध्ययन किया और स्थानीय किसानों से संवाद किया।
ग्राम साकिन का यह फार्म गो आधारित प्राकृतिक खेती का आदर्श मॉडल बन चुका है, जहां स्थानीय प्रगतिशील किसान अवधेश प्रताप सिंह ने अपनी मेहनत और नवाचार से न केवल उपज को कई गुना बढ़ाया है बल्कि किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने हैं।
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इस मॉडल में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इसके स्थान पर देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़ और आटे के मिश्रण से बनी जैविक खाद का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता और उत्पादन क्षमता दोनों में बढ़ोतरी हो रही है। अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि एक ग्राम देसी गोबर में तीन से पांच करोड़ सकारात्मक बैक्टीरिया होते हैं, जो खेत को उर्वर बनाने में सहायक हैं। जब इस गोबर में गुड़, आटा और गोमूत्र मिलाकर खेत में डाला जाता है, तो यह 18 दिन में प्राकृतिक खाद में परिवर्तित हो जाता है।
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उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा विकसित ‘सिक्स इन वन – एकल लल्ला किसान सिस्टम’ मॉडल में आधा एकड़ भूमि में 10 देसी गाय, गोबर गैस प्लांट, स्प्रिंकलर सिस्टम तथा 25% भूमि पर फलदार वृक्ष लगाने की विधि अपनाई जाती है। इससे छह माह में किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाती है और दूसरे वर्ष में यह तीन से चार गुना तक बढ़ सकती है।
केंद्र पर स्थापित देसी गायों की डेरी, गोबर गैस प्लांट, सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर तथा फलदार पौधों की व्यवस्था परस्पर पूरक हैं। इनसे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है बल्कि पशुओं को भी पौष्टिक आहार मिलता है। जब गाय प्राकृतिक आहार खाती हैं, तो उनके गोबर से तैयार खाद भी अधिक प्रभावी होती है। इस अवसर पर ब्लॉक बंगरा, बबीना, बड़गांव, मऊरानीपुर से आए किसान जिसमें रिंस जैन, भारत सिंह नन्ने राजा, रणजीत सिंह, उर्मिला राजपूत, सीताराम झां, विक्रम सिंह परिहार, महेश राजपूत उपस्थित रहे।