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चारा का वैकल्पिक स्त्रोत है कांटा रहित नागफनी

Tue, 25 Aug 2020 10:51 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 10:51 PM IST
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Nagfani source to agriculture
झांसी। बुंदेलखंड जैसे अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में गर्मी और सूखे के हालात में पशुओं को हरे चारा की कमी रहती है। ऐसी विषम परिस्थिति में कांटा रहित नागफनी चारे का महत्वपूर्ण वैकल्पिक स्त्रोत है। यह बुंदेलखंड की भूमि के लिए बिल्कुल मुफीद है। इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती और यह ऊबड़-खाबड़, बंजर भूमि में भी लगाया जा सकता है।
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पांच साल पहले इकार्ड नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था के सहयोग से ग्रासलैंड में कांटा रहित नागफनी को गैर पारंपरिक चारा के स्त्रोत के रूप में मूल्यांकन किया जा रहा है। शुरूआत में इकार्डा से प्राप्त जननद्रव्य (इटली, ब्राजील एवं मोरक्को उत्पत्ति वाले) के पौष्टिक गुणों, स्थापना, वृद्धि एवं उत्पादन तकनीक का ग्रासलैंड में अध्ययन किया। साथ ही उपयोगिता देखी गई। ग्रासलैंड के निदेशक डॉ. विजय कुमार यादव ने बताया कि कांटा रहित नागफनी प्रचलित कांटे वाली नागफनी से भिन्न है। इसमें
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कांटे नहीं होते, पत्ते अधिक पोषक तत्व से पूर्ण व रसीले होते हैं। यही नहीं, 7-9 % अपरिष्कृत प्रोटीन व 85- 92% पानी होता है, जो ग्रीष्मकाल सूखे व सर्दियों में चारे की कमी के अवधि के दौरान एक महत्वपूर्ण चारे का स्त्रोत बन गया है। इसे समुचित जल निकास वाली जगहों में लगाकर 50-70 टन / हेक्टेयर हरा चारा लिया जा सकता है। इसमें प्रति पौधा 80 किलोग्राम ताजे वजन (3 वर्ष के रोपण) के उत्पादन की क्षमता है और नागफनी की एक मीटर की दूरी पर लगाए गए 100 मीटर की पंक्ति ए पशुधन के लिए चार महीने का चारा प्रदान कर सकती है।
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डेयरी किसानों, गोशालाओं में काफी मांग
बुंदेलखंड क्षेत्र के तीन जिलों (दतिया, झांसी एवं टीकमगढ़) और पांच गोशालाओं में आईसीएआर-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी द्वारा लगभग 100 किसानों के खेतों में इसे ले जाया गया है। यह राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र जैसे अन्य क्षेत्रों में बहुत तेजी से विस्तार कर रहा है। हाल ही में ओडिशा के छह आदिवासी में नागफनी को बेकार और निम्नीकृत पहाड़ी भूमि में रोपण के लिए भेजे गए हैं। इसकी किसानों, गैर सरकारी संगठनों, डेयरी किसानों, गोशालाओं, कृषि विश्वविद्यालय (बांदा, राहुरी, आरवीएसकेवीवी, ग्वालियर और पीजेटीएयू, हैदराबाद), एनडीडीबी आनंद, बीएआईएफ पुणे से बहुत मांग है।
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