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स्मार्ट सिटी : तीन साल में 200 करोड़ में से सिर्फ तीन करोड़ का हो सका काम
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झांसी। तीन साल पहले महानगर का स्मार्ट सिटी योजना में चयन किया गया तो लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए। स्मार्ट सिटी के लोगों को स्मार्ट बनने की ओर बढ़ने के लिए भी तमाम वादे किए गए, लेकिन काम की रफ्तार पिछड़ती चली गई। आलम यह है कि स्मार्ट सिटी तीन साल में महज तीन कदम ही बढ़ सकी है। एक साल में जहां 200 करोड़ रुपये के काम होने थे, लेकिन तीन साल में महज तीन करोड़ रुपये परियोजना में खर्च हो सके। नतीजतन स्मार्ट सिटी रैंकिंग में पिछड़ गई। साथ ही हाल में इंडियन स्मार्ट सिटी अवार्ड भी झांसी के हाथ से निकल गया।
केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में झांसी का चयन 23 जून 2017 को हुआ था। इसके लिए सरकार की ओर से हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का बजट भी मुहैया कराया गया। मगर निगम के अधिकारी बजट को खर्च करने में कंजूसी दिखाते रहे। आलम यह हुआ कि तीन साल में महज तीन कामों पर तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए। समय-समय पर जारी की गई रैंकिंग में भी झांसी पिछड़कर 83 रैंक पर आ गई। अब फिर झांसी के हाथ से इंडियन स्मार्ट सिटी अवार्ड निकल गया है। देश के 100 शहरों में से प्रदेश के अलीगढ़, आगरा, सहारनपुर और वाराणसी को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि यह अवार्ड शहरी क्षेत्र के सतत विकास के लिए काम करने पर केंद्रीय शहरी एवं विकास मंत्रालय द्वारा दिया जाता है। ऐसे में एक बार फिर स्मार्ट सिटी के दावों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि अफसरों का दावा है कि मौजूदा समय में 374 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मगर इनमें से कई परियोजनाएं समय से काफी देरी से चल रही हैं।
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एक हजार करोड़ रुपये होने हैं खर्च
महानगर में स्मार्ट सिटी के तहत एक हजार करोड़ रुपये की लागत से 63 परियोजनाओं को पूरा किया जाना है। मगर अब तक धीमी चल रही रफ्तार के चलते परियोजनाएं पिछड़ रही हैं। ऐसे में जल्द जारी होने वाली सालाना रैंकिंग में भी झांसी पिछड़ सकती है।
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इन परियोजनाओं को पूरा किया गया
- मैथिलीशरण गुप्त पार्क में तिरंगा ध्वज - 13 लाख
- दो पार्कों में ओपन जिम- 18 लाख
- सात पिंक शौचालयों का निर्माण- 2.70 करोड़
मौजूदा समय में स्मार्ट सिटी की 16 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। पूरी कोशिश की जा रही है कि स्मार्ट सिटी के काम समय पर पूरे कराए जाएं। साथ ही नई परियोजनाओं की भी डीपीआर तैयार कराई जा रही है।
अमित शर्मा, नोडल अधिकारी स्मार्ट सिटी
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केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में झांसी का चयन 23 जून 2017 को हुआ था। इसके लिए सरकार की ओर से हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का बजट भी मुहैया कराया गया। मगर निगम के अधिकारी बजट को खर्च करने में कंजूसी दिखाते रहे। आलम यह हुआ कि तीन साल में महज तीन कामों पर तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए। समय-समय पर जारी की गई रैंकिंग में भी झांसी पिछड़कर 83 रैंक पर आ गई। अब फिर झांसी के हाथ से इंडियन स्मार्ट सिटी अवार्ड निकल गया है। देश के 100 शहरों में से प्रदेश के अलीगढ़, आगरा, सहारनपुर और वाराणसी को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि यह अवार्ड शहरी क्षेत्र के सतत विकास के लिए काम करने पर केंद्रीय शहरी एवं विकास मंत्रालय द्वारा दिया जाता है। ऐसे में एक बार फिर स्मार्ट सिटी के दावों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। हालांकि अफसरों का दावा है कि मौजूदा समय में 374 करोड़ रुपये की 16 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मगर इनमें से कई परियोजनाएं समय से काफी देरी से चल रही हैं।
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एक हजार करोड़ रुपये होने हैं खर्च
महानगर में स्मार्ट सिटी के तहत एक हजार करोड़ रुपये की लागत से 63 परियोजनाओं को पूरा किया जाना है। मगर अब तक धीमी चल रही रफ्तार के चलते परियोजनाएं पिछड़ रही हैं। ऐसे में जल्द जारी होने वाली सालाना रैंकिंग में भी झांसी पिछड़ सकती है।
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इन परियोजनाओं को पूरा किया गया
- मैथिलीशरण गुप्त पार्क में तिरंगा ध्वज - 13 लाख
- दो पार्कों में ओपन जिम- 18 लाख
- सात पिंक शौचालयों का निर्माण- 2.70 करोड़
मौजूदा समय में स्मार्ट सिटी की 16 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। पूरी कोशिश की जा रही है कि स्मार्ट सिटी के काम समय पर पूरे कराए जाएं। साथ ही नई परियोजनाओं की भी डीपीआर तैयार कराई जा रही है।
अमित शर्मा, नोडल अधिकारी स्मार्ट सिटी