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कार्यकारिणी चुनाव को लेकर महापौर की प्रतिष्ठा फंसी
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झांसी। नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों का कार्यकाल कल खत्म हो जाएगा। इसके पहले ही निगम के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। भाजपा के सामने जहां कार्यकारिणी में दबदबा बरकरार रखने की चुनौती है वहीं, विपक्षी खेमा इस वर्चस्व को तोड़ने की जुगत में है। कार्यकारिणी में भाजपा की दमदार मौजूदगी बनाए रखने के लिए महापौर रामतीर्थ सिंघल की प्रतिष्ठा दांव पर है।
बारह सदस्यीय कार्यकारिणी में दो वर्ष पूरा करने पर तीस जनवरी को उपसभापति अनिल सोनी समेत लखन कुशवाहा, अविनाश यादव, विद्या प्रकाश दुबे (भाजपा), विकास खत्री (कांग्रेस) एवं जुगल किशोर (सपा) बाहर हो जाएंगे। इनसे रिक्त हुई छह सीटों को कब्जाने के लिए पार्षदोें में होड़ शुरू हो गई। कार्यकारिणी में दबदबा बरकरार रखने को भाजपा जहां चार उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है वहीं, कांग्रेस, बसपा, सपा एवं निर्दलीय पार्षद भी चार सीटों पर दावा ठोंक रहे हैं। इसे देखते हुए मतदान होना तय है।
संख्या बल के लिहाज से सदन में 21 पार्षदों के साथ सबसे मजबूत स्थिति में भाजपा है। उसके पास एक सांसद, विधायक, महापौर एवं कुछ निर्दलियों के समर्थन की वजह से खाते में 35 वोट हैं। इनकी मदद से तीन सीट वह आसानी से जीत सकती है जबकि चौथी सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा। यही चौथी सीट जीतना ही महापौर के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। चौथी सीट के लिए वोट का इंतजाम करने का पूरा दारोमदार उन्हीं पर होगा। वहीं, इस बार विपक्षी खेमा भी कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। उसकी ओर से चार सीटों पर दावेदारी की जा रही। इसमें कांग्रेस, बसपा, सपा एवं निर्दलीय पार्षद एक-एक सीट की दावेदारी कर रहे हैं। विपक्षी खेमा अगर लामबंद रहा तब उसके पास भी करीब 30 वोट हो जाएंगे लेकिन, उनके सामने सबसे अधिक चुनौती अपने वोट सहेजने की होगी।
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पुराने सदस्यों पर ही दांव आजमाएगी भाजपा
चुनाव की आहट शुरू होते ही भाजपा पार्षदों के बीच टिकट को लेकर होड़ शुरू हो गई। टिकट के लिए पार्षदों ने वरिष्ठ नेताओं की गणेश परिक्रमा भी शुरू कर दी। उपसभापति अनिल सोनी भी कार्यकारिणी से बाहर होंगे, इसलिए उपसभापति का भी चुनाव होगा। इसे देखते हुए भी भाजपा में टिकट को लेकर सबसे अधिक मारामारी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पूर्व के कुछ कार्यकारिणी सदस्यों को फिर से मौका दिया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस भी अपने पूर्व सदस्य को भी मैदान में उतारने की तैयारी में है। निर्दलीय खेमे से कोई नाम आगे नहीं आया है।
12 को कराया जाएगा चुनाव
रिक्त छह सीटों के लिए 12 फरवरी को मतदान तिथि तय की गई है। हालांकि अगर छह प्रत्याशी ही नामांकन करेंगे तब मतदान की नौबत नहीं आएगी लेकिन, अगर उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी तब मतदान होना तय है। निगम के भीतर राजनीतिक महौल को देखते हुए इस बार मतदान की संभावना अधिक दिखती है। महापौर रामतीर्थ सिंघल के मुताबिक 12 फरवरी को प्रक्रिया आरंभ होगी। उसी दिन निर्णय हो जाएगा।
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बारह सदस्यीय कार्यकारिणी में दो वर्ष पूरा करने पर तीस जनवरी को उपसभापति अनिल सोनी समेत लखन कुशवाहा, अविनाश यादव, विद्या प्रकाश दुबे (भाजपा), विकास खत्री (कांग्रेस) एवं जुगल किशोर (सपा) बाहर हो जाएंगे। इनसे रिक्त हुई छह सीटों को कब्जाने के लिए पार्षदोें में होड़ शुरू हो गई। कार्यकारिणी में दबदबा बरकरार रखने को भाजपा जहां चार उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है वहीं, कांग्रेस, बसपा, सपा एवं निर्दलीय पार्षद भी चार सीटों पर दावा ठोंक रहे हैं। इसे देखते हुए मतदान होना तय है।
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संख्या बल के लिहाज से सदन में 21 पार्षदों के साथ सबसे मजबूत स्थिति में भाजपा है। उसके पास एक सांसद, विधायक, महापौर एवं कुछ निर्दलियों के समर्थन की वजह से खाते में 35 वोट हैं। इनकी मदद से तीन सीट वह आसानी से जीत सकती है जबकि चौथी सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा। यही चौथी सीट जीतना ही महापौर के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। चौथी सीट के लिए वोट का इंतजाम करने का पूरा दारोमदार उन्हीं पर होगा। वहीं, इस बार विपक्षी खेमा भी कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। उसकी ओर से चार सीटों पर दावेदारी की जा रही। इसमें कांग्रेस, बसपा, सपा एवं निर्दलीय पार्षद एक-एक सीट की दावेदारी कर रहे हैं। विपक्षी खेमा अगर लामबंद रहा तब उसके पास भी करीब 30 वोट हो जाएंगे लेकिन, उनके सामने सबसे अधिक चुनौती अपने वोट सहेजने की होगी।
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पुराने सदस्यों पर ही दांव आजमाएगी भाजपा
चुनाव की आहट शुरू होते ही भाजपा पार्षदों के बीच टिकट को लेकर होड़ शुरू हो गई। टिकट के लिए पार्षदों ने वरिष्ठ नेताओं की गणेश परिक्रमा भी शुरू कर दी। उपसभापति अनिल सोनी भी कार्यकारिणी से बाहर होंगे, इसलिए उपसभापति का भी चुनाव होगा। इसे देखते हुए भी भाजपा में टिकट को लेकर सबसे अधिक मारामारी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पूर्व के कुछ कार्यकारिणी सदस्यों को फिर से मौका दिया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस भी अपने पूर्व सदस्य को भी मैदान में उतारने की तैयारी में है। निर्दलीय खेमे से कोई नाम आगे नहीं आया है।
12 को कराया जाएगा चुनाव
रिक्त छह सीटों के लिए 12 फरवरी को मतदान तिथि तय की गई है। हालांकि अगर छह प्रत्याशी ही नामांकन करेंगे तब मतदान की नौबत नहीं आएगी लेकिन, अगर उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी तब मतदान होना तय है। निगम के भीतर राजनीतिक महौल को देखते हुए इस बार मतदान की संभावना अधिक दिखती है। महापौर रामतीर्थ सिंघल के मुताबिक 12 फरवरी को प्रक्रिया आरंभ होगी। उसी दिन निर्णय हो जाएगा।