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पार्क की जमीन पर कब्जा करने वाले सिपाही के आगे नगर निगम और जेडीए ने किया सरेंडर
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झांसी। महानगर में एक पार्क की जमीन पर कब्जा करने वाले सिपाही के आगे नगर निगम और प्राधिकरण ने सरेंडर कर दिया है। हफ्ते भर से कब्जा हटवाने के लिए केवल कागजी कवायद हो रही है। कभी निगम वाले पैमाइश करने पहुंच जाते हैं तो कभी जेडीए के अफसर निगम को पत्र लिखकर जानकारी मांगने लगते हैं। दोनों विभाग जान रहे हैं कि जमीन पर कब्जा है लेकिन एक्शन लेने की जगह निरीक्षण हो रहे हैं। अब ऐसे तो कब्जा हटने से रहा।
दरअसल झांसी विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1991 में वीरांगना नगर को विकसित किया था। कॉलोनी में अलग-अलग प्रकारों के भूखंडों को आवंटित किया गया। कॉलोनी बसते ही कॉलोनी के पार्क की जमीन पर एक पुलिसकर्मी ने कब्जा जमा लिया था। तब से लेकर अब तक पुलिसकर्मी का कब्जा है। इसे लेकर पिछले दिनों अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच और भूमि की पैमाइश की थी। इसके बाद भूमि के नक्शे को लेकर जेडीए को पत्र लिखा गया। उधर, झांसी विकास प्राधिकरण ने नगर निगम को पार्क की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए पत्र लिखा है। दोनों विभाग आपस में पत्र व्यवहार कर रहे हैं, लेकिन जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं की है। इससे साफ है कि जब नगर निगम एक सिपाही से पार्क की जमीन को कब्जा मुक्त करा नहीं पा रहा है, तो महानगर में तमाम अवैध कब्जे कैसे दूर होेंगे? निगम और जेडीए की सुस्ती को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आए दिन चला अभियान, नहीं दिखा कब्जा
नगर निगम की टीम आए दिन मेडिकल और वीरांगना नगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान चला चुकी है, लेकिन आज तक नगर निगम को पार्क की जमीन पर कब्जा नजर नहीं आया। वहीं निगम संपत्तियों की सुरक्षा का दावा करता है, लेकिन अवैध कब्जे इसकी कहानी कह रहे हैं। बताया जाता है कि नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ही सिपाही जमीन पर कब्जा जमाए है।
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पार्क की जमीन को लेकर जेडीए से जानकारी मांगी गई है। इसके बाद कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।
शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त
नगर निगम को पत्र लिखकर कब्जा मुक्त कराने व पार्क का निर्माण कराने के लिए कहा गया है।
सर्वेश कुमार, उपाध्यक्ष, जेडीए
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दरअसल झांसी विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1991 में वीरांगना नगर को विकसित किया था। कॉलोनी में अलग-अलग प्रकारों के भूखंडों को आवंटित किया गया। कॉलोनी बसते ही कॉलोनी के पार्क की जमीन पर एक पुलिसकर्मी ने कब्जा जमा लिया था। तब से लेकर अब तक पुलिसकर्मी का कब्जा है। इसे लेकर पिछले दिनों अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच और भूमि की पैमाइश की थी। इसके बाद भूमि के नक्शे को लेकर जेडीए को पत्र लिखा गया। उधर, झांसी विकास प्राधिकरण ने नगर निगम को पार्क की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए पत्र लिखा है। दोनों विभाग आपस में पत्र व्यवहार कर रहे हैं, लेकिन जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं की है। इससे साफ है कि जब नगर निगम एक सिपाही से पार्क की जमीन को कब्जा मुक्त करा नहीं पा रहा है, तो महानगर में तमाम अवैध कब्जे कैसे दूर होेंगे? निगम और जेडीए की सुस्ती को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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आए दिन चला अभियान, नहीं दिखा कब्जा
नगर निगम की टीम आए दिन मेडिकल और वीरांगना नगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान चला चुकी है, लेकिन आज तक नगर निगम को पार्क की जमीन पर कब्जा नजर नहीं आया। वहीं निगम संपत्तियों की सुरक्षा का दावा करता है, लेकिन अवैध कब्जे इसकी कहानी कह रहे हैं। बताया जाता है कि नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ही सिपाही जमीन पर कब्जा जमाए है।
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पार्क की जमीन को लेकर जेडीए से जानकारी मांगी गई है। इसके बाद कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग को भी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।
शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त
नगर निगम को पत्र लिखकर कब्जा मुक्त कराने व पार्क का निर्माण कराने के लिए कहा गया है।
सर्वेश कुमार, उपाध्यक्ष, जेडीए