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सावन के तीसरे सोमवार को मनाई जाएगी नाग पंचमी
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सावन के तीसरे सोमवार को मनाई जाएगी नाग पंचमी
झांसी। भगवान शिव के प्रिय पावन महीने सावन के तीसरा सोमवार (5 अगस्त) को नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और कन्या राशि का चंद्रमा होने के कारण इस दिन महादेव और नाग देवता की पूजा का विशेष लाभ प्राप्त होगा। धार्मिक विद्वानों के अनुसार 125 साल बाद सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी का पर्व पड़ रहा है।
सनातन धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। जगह - जगह भक्त भोले बाबा की भक्ति में विभोर हो जाते हैं। सावन में ही नाग पंचमी का भी पर्व मनाया जाता है। नाग देवता को भगवान शिव अपने गले में धारण किए हैं। इससे श्रद्धालुओं में नाग देवता की नाग पंचमी पर पूजा विशेष रूप से की जाती है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यता है कि काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए नाग पंचमी पर पूजा एवं अनुष्ठान करना विशेष फलदायी रहता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी पर हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग व कन्या राशि का चंद्रमा है। इससे पहले 125 साल पूर्व सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया गया था। उनके अनुसार नाग पंचमी की तिथि चार अगस्त को शाम 6 बजकर 48 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो सोमवार की शाम 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इस अवधि में नाग देवता की पूजा लाभकारी होगी।
कालसर्प दोष की पूजा होती है नाग पंचमी पर
कालसर्प दोष कुंडली में एक ऐसा योग है, जिससे व्यक्ति आर्थिक एवं शारीरिक रूप से काफी पीड़ित रहता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दोष से पीड़ित व्यक्ति नाग पंचमी पर पूजा एवं अनुष्ठान करवाकर इससे निवारण पा सकता है। वहीं इस दिन नाग की बामी की भी पूजा की जाती है। नाग पंचमी को श्रेष्ठ पंचमी भी माना जाता है।
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झांसी। भगवान शिव के प्रिय पावन महीने सावन के तीसरा सोमवार (5 अगस्त) को नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग और कन्या राशि का चंद्रमा होने के कारण इस दिन महादेव और नाग देवता की पूजा का विशेष लाभ प्राप्त होगा। धार्मिक विद्वानों के अनुसार 125 साल बाद सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी का पर्व पड़ रहा है।
सनातन धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। जगह - जगह भक्त भोले बाबा की भक्ति में विभोर हो जाते हैं। सावन में ही नाग पंचमी का भी पर्व मनाया जाता है। नाग देवता को भगवान शिव अपने गले में धारण किए हैं। इससे श्रद्धालुओं में नाग देवता की नाग पंचमी पर पूजा विशेष रूप से की जाती है। धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यता है कि काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए नाग पंचमी पर पूजा एवं अनुष्ठान करना विशेष फलदायी रहता है। महंत विष्णु दत्त स्वामी के अनुसार सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी पर हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग व कन्या राशि का चंद्रमा है। इससे पहले 125 साल पूर्व सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया गया था। उनके अनुसार नाग पंचमी की तिथि चार अगस्त को शाम 6 बजकर 48 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो सोमवार की शाम 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इस अवधि में नाग देवता की पूजा लाभकारी होगी।
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कालसर्प दोष की पूजा होती है नाग पंचमी पर
कालसर्प दोष कुंडली में एक ऐसा योग है, जिससे व्यक्ति आर्थिक एवं शारीरिक रूप से काफी पीड़ित रहता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दोष से पीड़ित व्यक्ति नाग पंचमी पर पूजा एवं अनुष्ठान करवाकर इससे निवारण पा सकता है। वहीं इस दिन नाग की बामी की भी पूजा की जाती है। नाग पंचमी को श्रेष्ठ पंचमी भी माना जाता है।
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