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मुकर गई थी पत्नी, फोरेंसिक रिपोर्ट बनी बड़ा आधार
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मुकर गई थी पत्नी, फोरेंसिक रिपोर्ट बनी बड़ा आधार
झांसी। मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या करने वाले पिता को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट बड़ा आधार बनी। वरना, हत्यारे पिता की पत्नी तो मुकदमे के दौरान अपने बयान से पलट गई थी। साथ ही गवाहों ने भी पल्ला झाड़ लिया था। मासूम को इंसाफ बंदूक पर पाए गए हत्यारे पिता की हथेलियों के निशान ने दिलाया। घटना को अंजाम देने के बाद बृजेंद्र वहां से भाग गया। 12 मार्च 2017 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। बृजेंद्र की निशानदेही पर पुलिस ने उसके पास से घटना में प्रयुक्त की गई बंदूक भी बरामद कर ली थी, जो आगे चलकर मुकदमे का अहम सुबूत साबित हुई। न्यायालय में चले मुकदमे के दरम्यान आरोपी की पत्नी संध्या अपने बयानों से पलट गई थी। गवाहों ने भी कन्नी काट ली थी। लेकिन, आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त किए गया हथियार बरामद हुआ था और विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हुई जांच में बंदूक पर उसके हाथों के निशान पर पाए गए थे। ये सुबूत बेरहम पिता को उम्र कैद की सजा दिलाने में अहम साबित हुए।
बचने के लिए मानसिक संतुलन बिगड़ने का किया था नाटक
झांसी। बेटी की हत्या के बाद सजा से बचने की बृजेंद्र यादव ने पूरी कोशिश की। यहां तक कि उसने मानसिक संतुलन बिगड़ने तक का नाटक किया था। उसने अदालत में दलील दी थी कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। साथ ही उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। यह उसका पहला अपराध है। लेकिन, अदालत ने इसका परीक्षण कराया, जिसमें उसकी मानसिक स्थिति एकदम ठीक पाई गई।
बच्ची के किसी और की संतान होने का था शक
झांसी। घटना से दो साल पहले बृजेंद्र की शादी भोगनीपुर की संध्या से हुई थी। शुरुआत में सबकुछ ठीक चलता रहा। लेकिन, बाद के दिनों में वो पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा था। पत्नी का कहीं जाना या किसी से बात करना भी उसे नागवार गुजरता था। इसे लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा भी होता था। यहां तक कि उसे शक था कि बच्ची उसकी संतान नहीं है। यही वजह रही कि मासूम की हत्या से पहले उसने एक बार भी नहीं सोचा।
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झांसी। मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या करने वाले पिता को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट बड़ा आधार बनी। वरना, हत्यारे पिता की पत्नी तो मुकदमे के दौरान अपने बयान से पलट गई थी। साथ ही गवाहों ने भी पल्ला झाड़ लिया था। मासूम को इंसाफ बंदूक पर पाए गए हत्यारे पिता की हथेलियों के निशान ने दिलाया। घटना को अंजाम देने के बाद बृजेंद्र वहां से भाग गया। 12 मार्च 2017 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। बृजेंद्र की निशानदेही पर पुलिस ने उसके पास से घटना में प्रयुक्त की गई बंदूक भी बरामद कर ली थी, जो आगे चलकर मुकदमे का अहम सुबूत साबित हुई। न्यायालय में चले मुकदमे के दरम्यान आरोपी की पत्नी संध्या अपने बयानों से पलट गई थी। गवाहों ने भी कन्नी काट ली थी। लेकिन, आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त किए गया हथियार बरामद हुआ था और विधि विज्ञान प्रयोगशाला में हुई जांच में बंदूक पर उसके हाथों के निशान पर पाए गए थे। ये सुबूत बेरहम पिता को उम्र कैद की सजा दिलाने में अहम साबित हुए।
बचने के लिए मानसिक संतुलन बिगड़ने का किया था नाटक
झांसी। बेटी की हत्या के बाद सजा से बचने की बृजेंद्र यादव ने पूरी कोशिश की। यहां तक कि उसने मानसिक संतुलन बिगड़ने तक का नाटक किया था। उसने अदालत में दलील दी थी कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। साथ ही उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। यह उसका पहला अपराध है। लेकिन, अदालत ने इसका परीक्षण कराया, जिसमें उसकी मानसिक स्थिति एकदम ठीक पाई गई।
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बच्ची के किसी और की संतान होने का था शक
झांसी। घटना से दो साल पहले बृजेंद्र की शादी भोगनीपुर की संध्या से हुई थी। शुरुआत में सबकुछ ठीक चलता रहा। लेकिन, बाद के दिनों में वो पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा था। पत्नी का कहीं जाना या किसी से बात करना भी उसे नागवार गुजरता था। इसे लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़ा भी होता था। यहां तक कि उसे शक था कि बच्ची उसकी संतान नहीं है। यही वजह रही कि मासूम की हत्या से पहले उसने एक बार भी नहीं सोचा।
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