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एमपी पुलिस से बढ़ाया जाएगा तालमेल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 May 2016 12:26 AM IST
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police prees barta , jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। अपराधी कहीं भी अपराध कर सकता है और कहीं भी छुप सकता है। इसलिए पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की पुलिस से और अच्छा तालमेल बैठाया जाएगा। जल्द ही मीटिंग होगी ताकि अपराधी पुलिस के हाथों से बच नहीं सके। आईजी ग्वालियर से भी बात की जाएगी। कानपुर जोन में अपराध का ग्राफ बढ़ा है, जिस पर अंकुश लगाने के लिए टारगेट दिए गए हैं। औचक निरीक्षण करने झांसी पहुंचे आईजी कानपुर जोन जकी अहमद ने उक्त बातें कहीं।
आईजी ने कहा कि जोन में हाइवे पर ट्रक व चौपहिया वाहनों से लूट की वारदात तेजी से बढ़ी है। इसकी रोकथाम के लिए हाइवे पर पुलिस पेट्रोलिंग को बढ़ाया गया है। बदमाशों की धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। अधीनस्थों से स्पष्ट कह दिया गया है कि अपराध पर अंकुश लगाने के ठोस परिणाम चाहिए।
झांसी के मध्यप्रदेश की सीमा से घिरे होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अधीनस्थों को सीमावर्ती जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ मीटिंग करनी चाहिए, ताकि अपराधी को छुपने का स्थान नहीं मिल सके। जब सीमावर्ती जिलों की पुलिस सक्रिय होगी तो बदमाश ज्यादा दूर भाग नहीं सकेगा। इस बाबत वह आईजी ग्वालियर से बात करके आगे की रणनीति बनाएंगे।
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उन्होंने बताया कि अब टारगेटेड सिस्टम चला रखा है, जिसके तहत पुलिस कप्तानों को एनएसए, गुंडा एक्ट में कार्रवाई आदि के लिए लक्ष्य दिए जा रहे हैं। इससे कई अपराधियों को जेल भेजा जा चुका है। ‘एक नंबर भरोसा’ के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसकी कोई ज्यादा जरूरत नहीं हैं क्योंकि फरवरी माह से शासन ने आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम) चला रखा है। इसके तहत आ रही शिकायतों पर प्रभावी रूप से कार्रवाई की जा ही है।
जून में होगी सीमावर्ती थानेदारों के साथ बैठक
एसएसपी मनोज तिवारी ने आईजी कानपुर जोन को बताया कि जून में सीमावर्ती जिलों के थानेदारों के साथ मीटिंग रखी गई है, जो झांसी में होगी। मीटिंग का मकसद सीमावर्ती थानेदारों से अच्छा समन्वय स्थापित करना है ताकि वारदात होने के बाद सीधे थानेदार बातचीत करके चौतरफा घेराबंदी कर सकें।
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आईजी ने कहा कि जोन में हाइवे पर ट्रक व चौपहिया वाहनों से लूट की वारदात तेजी से बढ़ी है। इसकी रोकथाम के लिए हाइवे पर पुलिस पेट्रोलिंग को बढ़ाया गया है। बदमाशों की धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। अधीनस्थों से स्पष्ट कह दिया गया है कि अपराध पर अंकुश लगाने के ठोस परिणाम चाहिए।
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झांसी के मध्यप्रदेश की सीमा से घिरे होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अधीनस्थों को सीमावर्ती जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ मीटिंग करनी चाहिए, ताकि अपराधी को छुपने का स्थान नहीं मिल सके। जब सीमावर्ती जिलों की पुलिस सक्रिय होगी तो बदमाश ज्यादा दूर भाग नहीं सकेगा। इस बाबत वह आईजी ग्वालियर से बात करके आगे की रणनीति बनाएंगे।
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उन्होंने बताया कि अब टारगेटेड सिस्टम चला रखा है, जिसके तहत पुलिस कप्तानों को एनएसए, गुंडा एक्ट में कार्रवाई आदि के लिए लक्ष्य दिए जा रहे हैं। इससे कई अपराधियों को जेल भेजा जा चुका है। ‘एक नंबर भरोसा’ के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसकी कोई ज्यादा जरूरत नहीं हैं क्योंकि फरवरी माह से शासन ने आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम) चला रखा है। इसके तहत आ रही शिकायतों पर प्रभावी रूप से कार्रवाई की जा ही है।
जून में होगी सीमावर्ती थानेदारों के साथ बैठक
एसएसपी मनोज तिवारी ने आईजी कानपुर जोन को बताया कि जून में सीमावर्ती जिलों के थानेदारों के साथ मीटिंग रखी गई है, जो झांसी में होगी। मीटिंग का मकसद सीमावर्ती थानेदारों से अच्छा समन्वय स्थापित करना है ताकि वारदात होने के बाद सीधे थानेदार बातचीत करके चौतरफा घेराबंदी कर सकें।