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जन्म तो नहीं दिया पर ‘मां यशोदा’ कम नहीं हैं ये

Sat, 09 May 2020 11:27 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2020 11:27 PM IST
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mothers day
खातीबाबा स्थित​ शिशु विहार में बच्चों की देखभाल करतीं सिस्टर।
झांसी। महानगर में कई सिस्टर ऐसी भी हैं जो मां यशोदा की तरह बच्चों का पालन पोषण कर रही हैं। उनका सेवा भाव मां से बढ़कर है। बच्चों की हर जरूरत और उनकी हर परेशानी दूर करना उनका पहला काम है। बच्चे ही उनका परिवार हैं और उनका पालन पोषण ही पहला उद्देश्य है। वे बच्चों को पढ़ाने से लेकर खिलाने और उनको योग्य बनाने का जिम्मा संभाल रही हैं। महानगर के खातीबाबा स्थित शिशु विहार में बच्चों को पालन पोषण करने वाली ये सिस्टर बिना किसी स्वार्थ के तमाम बच्चों का सहारा बनी हुई हैं।
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महानगर के खाती बाबा स्थित शिशु विहार में मौजूदा समय में 38 बच्चों का पालन पोषण हो रहा है। ये बच्चे हैं, जिनका कोई नहीं है। कभी प्रशासन इनको यहां भिजवाता है, तो कभी लोग यहां बच्चों को लेकर आते हैं। यहां हर बच्चे का पूरे उत्साह से स्वागत किया जाता है। बच्चों को शिशु विहार में रहने वाली सिस्टर ही पालती-पोसती हैं। बच्चों के इलाज से लेकर उनके खाने और पढ़ाने का इंतजाम भी खुद ही करती हैं। हर बच्चे का पूरा ब्योरा रखा जाता है। आलम यह है कि सिस्टर बच्चों की हर जरुरत को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश करती हैं। बच्चों को संस्कारों का बोध भी कराती हैं।
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कहती हैं सिस्टर
शिशु विहार में हर अनाथ बच्चे को सहारा दिया जाता है। बच्चे ईश्वर का अनमोल तोहफा होते हैं। इन बच्चों को संस्कारित करने और उनको पालने का जिम्मा हमें मिला है। इस पर गर्व होता है।
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सिस्टर जेटा
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बच्चों की हर जरुरत को पूरा करते हैं। उनके इलाज की भी व्यवस्था कराते हैं। बच्चों को यहां बिल्कुल अकेलापन न लगे, इसके लिए पूरा पारिवारिक माहौल देने की कोशिश करते हैं।
सिस्टर राजिता
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शिशु विहार में बच्चों का पूरा ख्याल रखते हैं। हम देश के भविष्य को संवारने का काम करते हैं। बच्चों के बीच रहकर काम करने में अच्छा लगता है। उनके हंसते चेहरे खुशी देते हैं।
सिस्टर नित्या
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बच्चों की हर जरूरत को पूरा करती हूं। उनका ख्याल रखना अच्छा लगता है। बच्चों का कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पूरी मेहनत करती हूं। बच्चों की खुशी में ही सबकुछ है।
मिस पोली
डॉक्टर बेटे को देती हैं सजग रहने की सलाह
शहर के नरसिंहराव टोरिया निवासी रेखा धुलेकर भी अपने बेटे देवेश धुलेकर को हौसला देती हैं। उनका बेटा सिडनी के अस्पताल में डॉक्टर है। कोरोना संक्रमण आस्ट्रेलिया में भी है। इसलिए रेखा समय-समय पर फोन और वीडियो कॉल के जरिए बेटे का हाल जानती रहती हैं। वे कहती हैं कि इस दौर में बेटे को पूरी सजगता बरतने की सलाह दे रहे हैं। मां हूं, तो कभी-कभी डर लगता है, लेकिन बेटे से बात कर परेशानी कम हो जाती है।
तीन साल की बेटी को कर दिया खुद से दूर
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में तैनात स्टाफ नर्स रितु शर्मा ने तीन साल की बेटी को खुद से दूर कर दिया है। क्वारंटीन के दौरान वह एक कमरे में रहती हैं। बेटी को जब याद सताती है, तो वह थोड़ी विचलित हो जाती हैं। वह बताती हैं कि पहले कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगी थी तो बेटी से दूरी बनाकर रखती थी। अब भी ओपीडी से लौटने के बाद बेटी को खुद से दूर रखती हूं।

परदेशी बेटे को दे रहीं सावधानी बरतने की सलाह
शहर के बंसल कॉलोनी निवासी वनिता खानवलकर का बेटा देवेश खानवलकर यूके में डॉक्टर हैं। इन दिनों यूके में भी कोरोना संक्रमण फैल रहा है। इस दौर में वह बेटे से वीडियो कॉल के जरिए बात करती हैं। वह बेटे और बहू को सावधानी से मरीजों की देखभाल करने की सलाह देती हैं। वह कहती हैं कि देश की सेवा करना बड़ा फर्ज है। गर्व है कि बच्चे पूरे मनायोग से फर्ज निभा रहे हैं।
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