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पुलिस की पाठशाला में एसएसपी ने बताए साइबर ठगी से बचने के तीन मंत्र
नीरज नरवरिया
Updated Fri, 30 Oct 2026 10:22 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले शुक्रवार को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि एसएसपी विकास कुमार ने साइबर अपराध की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को ठगी से बचाव के तीन अहम मंत्र बताए। उन्होंने कहा कि साइबर जालसाज कभी लालच देकर तो कभी डर दिखाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ऐसे में लालच से बचें, भयभीत न हों और खुद को जागरूक रखें। थोड़ी सी सतर्कता साइबर ठगी से बचा सकती है।
एसएसपी ने कहा कि साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे आम लोगों के साथ देश की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को साइबर अपराध के तरीकों को समझना और सतर्क रहना जरूरी है।
उन्होंने ऑनलाइन शिकायत पोर्टल की जानकारी देते हुए साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल शिकायत करने की अहमियत समझाई। कहा कि साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान शिकायत करने से ठगी गई रकम को वापस दिलाने की संभावना बढ़ सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने की। संचालन डॉ. ओम शंकर चौरसिया ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. डॉ. आराधना कनकने ने पुष्पगुच्छ भेंटकर किया। इस दौरान क्षेत्राधिकारी मोंठ सुशील कुमार शर्मा, साइबर थाना प्रभारी सत्येंद्र यादव और साइबर टीम मौजूद रही।
विद्यार्थियों के सवाल और एसएसपी के जवाब
सवाल: मरीजों की केस हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और एक्स-रे या एमआरआई की तस्वीरें मोबाइल या सोशल मीडिया पर साझा करना क्या साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है?
जवाब: मरीज की पहचान उजागर करने वाली जानकारी बेहद संवेदनशील होती है। उसकी अनुमति के बिना केस हिस्ट्री, रिपोर्ट, फोटो या मेडिकल रिकॉर्ड सोशल मीडिया पर साझा नहीं करना चाहिए। मेडिकल शिक्षा और शोध में भी मरीज की गोपनीयता और सहमति का ध्यान रखना जरूरी है।
सवाल: ई-मेल और लिंक में असली और फर्जी की पहचान कैसे करें?
जवाब: किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले वेबसाइट और ई-मेल भेजने वाले की प्रामाणिकता जांचें। आकर्षक ऑफर, जल्द चयन का दावा या तत्काल फीस जमा करने का दबाव संदेह पैदा करता है। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क कर पुष्टि करें।
सवाल: सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करना कितना सुरक्षित है?
जवाब: सार्वजनिक वाई-फाई पर संवेदनशील जानकारी खोलने या भेजने से बचना चाहिए। अस्पताल के अधिकृत और सुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करें। मरीजों के रिकॉर्ड को निजी ई-मेल, अनजान वेबसाइट या असुरक्षित मोबाइल एप पर अपलोड नहीं करना चाहिए।
सवाल: मोबाइल पर अनजान लिंक खोलने के बाद फोन हैक हो जाए तो क्या करें?
जवाब: ऐसी स्थिति में इंटरनेट कनेक्शन बंद करें। दूसरे सुरक्षित डिवाइस से अपने महत्वपूर्ण खातों के पासवर्ड बदलें। बैंकिंग से जुड़ी जानकारी खतरे में हो तो बैंक को तत्काल सूचित करें। संदिग्ध एप हटवाने और डिवाइस की जांच कराने के साथ पुलिस में शिकायत भी करें।
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