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बीस हजार से ज्यादा किसान कर रहे मुआवजे की मांग, प्रशासन की रिपोर्ट-केवल मऊरानीपुर में नुकसान
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झांसी। ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों के मुआवजे के लिए किसान भले ही हर रोज प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों को ओलावृष्टि से खत्म हुईं फसलों की तस्वीरें दिखा रहे हैं लेकिन प्रशासनिक रिपोर्ट में नुकसान केवल मऊरानीपुर तहसील में ही माना गया है। यहां के 13 गांवों के 2600 किसान ही मुआवजे के हकदार हैं। अफसरों का कहना है कि बाकी जगह क्षति 33 फीसदी से भी कम है जो मुआवजे की श्रेणी में नहीं आती।
रविवार की सुबह जिले के ग्रामीण इलाकों में ओले आफत बनकर बरसे थे। मऊरानीपुर के साथ टहरौली और गरौठा तहसील के दर्जनों गांवों में रबी की फसल को भारी नुकसान हुआ था। चंद मिनटों की ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया था। किसान सरकार से मुआवजे की आस लगाए बैठे थे। गरौठा व मऊरानीपुर के विधायक ने भी क्षेत्र में भारी क्षति बताते हुए सरकार से मुआवजे की मांग की थी। प्रशासन ने नुकसान के आकलन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को दी थी। विभाग ने रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें मऊरानीपुर तहसील के मगरपुर, खिसदीखुर्द, खिसनी बुजुर्ग, कनौरा, पठा-करका, चौकरी, गैराहा, रमपुरा, उल्दन, सकरार समेत 13 गांवों में फसलों में 33 फीसदी अधिक क्षति बताई गई है। नियमानुसार दैवी आपदा में 33 फीसदी से अधिक क्षति होने पर ही मुआवजा देने का प्रावधान है। जबकि, गरौठा तहसील के ही बछेही, अस्ता, फरीदा, खिरिया, छिरौरा, बरगांय, मड़पुरा, अजनेरी, सुट्टा, सिंगार, भस्नेह, अड़जरा, लौड़ी, आमली, रानापुरा, भड़ोकर आदि गांवों में ओले गिरने से भारी क्षति हुई थी, लेकिन यहां 12 प्रतिशत का ही नुकसान माना गया है। टहरौली में 20-22 प्रतिशत तथा झांसी व मोंठ तहसील में नुकसान न के बराबर ही माना गया है।
ऐसे में पीड़ित किसान अपने को ठगा से महसूस कर रहे हैं। कुदरत पहले ही उन्हें धोखा दे चुकी है और अब प्रशासन ने भी उनका साथ छोड़ दिया है।
ओलावृष्टि से चना, मटर, गेहूं, सरसों, जौ की फसल बुरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसान मुआवजे के हकदार हैं। प्रशासन उन्हें उनके हक से वंचित कर रहा है।
- सूरज माते, खिरिया
बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और लागत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। सभी पीड़ित किसानों को समान मुआवजा दिया जाना चाहिए।
- श्याम सिंह, अस्ता
पहले बारिश और उसके बाद चंद मिनटों की ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया था। किसान सरकार से मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।
- भगत सिंह यादव, फरीदा
दैवी आपदा ने गरौठा तहसील के गांव-गांव में तबाही मचाई है। लेकिन, प्रशासन ये मानने को तैयार नहीं है। ये स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
- रणवीर सिंह यादव, बछेह
मऊरानीपुर के 13 नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों में बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। सभी पीड़ित किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
- शिवनारायण सिंह परिहार, अध्यक्ष - किसान कांग्रेस
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रविवार की सुबह जिले के ग्रामीण इलाकों में ओले आफत बनकर बरसे थे। मऊरानीपुर के साथ टहरौली और गरौठा तहसील के दर्जनों गांवों में रबी की फसल को भारी नुकसान हुआ था। चंद मिनटों की ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया था। किसान सरकार से मुआवजे की आस लगाए बैठे थे। गरौठा व मऊरानीपुर के विधायक ने भी क्षेत्र में भारी क्षति बताते हुए सरकार से मुआवजे की मांग की थी। प्रशासन ने नुकसान के आकलन की जिम्मेदारी राजस्व विभाग को दी थी। विभाग ने रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें मऊरानीपुर तहसील के मगरपुर, खिसदीखुर्द, खिसनी बुजुर्ग, कनौरा, पठा-करका, चौकरी, गैराहा, रमपुरा, उल्दन, सकरार समेत 13 गांवों में फसलों में 33 फीसदी अधिक क्षति बताई गई है। नियमानुसार दैवी आपदा में 33 फीसदी से अधिक क्षति होने पर ही मुआवजा देने का प्रावधान है। जबकि, गरौठा तहसील के ही बछेही, अस्ता, फरीदा, खिरिया, छिरौरा, बरगांय, मड़पुरा, अजनेरी, सुट्टा, सिंगार, भस्नेह, अड़जरा, लौड़ी, आमली, रानापुरा, भड़ोकर आदि गांवों में ओले गिरने से भारी क्षति हुई थी, लेकिन यहां 12 प्रतिशत का ही नुकसान माना गया है। टहरौली में 20-22 प्रतिशत तथा झांसी व मोंठ तहसील में नुकसान न के बराबर ही माना गया है।
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ऐसे में पीड़ित किसान अपने को ठगा से महसूस कर रहे हैं। कुदरत पहले ही उन्हें धोखा दे चुकी है और अब प्रशासन ने भी उनका साथ छोड़ दिया है।
ओलावृष्टि से चना, मटर, गेहूं, सरसों, जौ की फसल बुरी तरह से बर्बाद हो गई है। किसान मुआवजे के हकदार हैं। प्रशासन उन्हें उनके हक से वंचित कर रहा है।
- सूरज माते, खिरिया
बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और लागत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। सभी पीड़ित किसानों को समान मुआवजा दिया जाना चाहिए।
- श्याम सिंह, अस्ता
पहले बारिश और उसके बाद चंद मिनटों की ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत और लागत पर पानी फेर दिया था। किसान सरकार से मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं।
- भगत सिंह यादव, फरीदा
दैवी आपदा ने गरौठा तहसील के गांव-गांव में तबाही मचाई है। लेकिन, प्रशासन ये मानने को तैयार नहीं है। ये स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
- रणवीर सिंह यादव, बछेह
मऊरानीपुर के 13 नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों में बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। सभी पीड़ित किसानों को मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
- शिवनारायण सिंह परिहार, अध्यक्ष - किसान कांग्रेस