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चांद के दीदार का इंतजार

Mon, 06 Jun 2016 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 06 Jun 2016 12:14 AM IST
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Moon await Deedar
ramjan, jhansi news - फोटो : demo
झांसी। चांद के दीदार के बाद सात जून को रमजान शरीफ माह का पहला रोजा रखा जाएगा। वहीं, पवित्र रमजान माह को लेकर महानगर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तैयारियां अपने अंतिम दौर में है। मुस्लिम धर्मगुरुओं के अनुसार चांद दिखने के बाद ही अगले दिन रोजा रखा जाएगा।
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मुफ्ती साबिर कासमी के मुताबिक पाक रमजान के रोजे रखना प्रत्येक बालिग महिला व पुरुष के लिए अनिवार्य है। जो रोजे नहीं रखता है वह गुनाहगार है। रोजा का मकसद अपने दिल को पाक साफ करना है और बुराईयों से दूर रहना है। उनके अनुसार इफ्तार के वक्त जो दुआ की जाती है, वह कुबूल होती है।
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वहीं, तरावीह में कुरान पाक को पढ़ना एवं सुनना जरूरी है। पैगंबर साहब ने भीफरमाया है कि कुरान पाक व रोजा कयामत के दिन खुदा से आपकी सिफारिश करेगा। इसलिए हर मुसलमान को रोजा व कुरान का हक अदा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि झांसी की चांद कमेटी छह जून को बिसाती बाजार मस्जिद में बैठक करेगी, जिसमें चांद देखने के बाद पहला रोजा रखने का फैसला कमेटी के अध्यक्ष मौलाना आमिल साहब व सदस्य करेंगे।
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सहरी का समय है खास
रमजान में सहरी का समय महत्वपूर्ण होता है और रोजेदारों को जगाने के लिए मोअज्जिम की भूमिका अहम होती है। जो सहरी से डेढ़ घंटा पूर्व मोहल्लों में लोगों को जगाते हैं। इस दौरान वह ‘उठो सहरी का वक्त हो गया है’ की आवाज भी बुलंद करते हैं।

अजवह खजूर है विशेष
रमजान में खजूर से इफ्तार करना सुन्नत है। खजूरों में सबसे अच्छा अजवह माना जाता है। जो धार्मिक एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

इन मस्जिदों में चलेगी पूरे माह तरावीह
रमजान माह में तरावीह मस्जिदों के अलावा अन्य विभिन्न स्थलों पर भी आयोजित होगी। लेकिन, मस्जिदों में तरावीह पढ़ने का ज्यादा शबाब है। बिसाती बाजार स्थित मस्जिद, मरकजी मस्जिद, मुकरयाना मस्जिद, सुल्तानिया मस्जिद, सीपरी बाजार स्थित जामा मस्जिद, नगरा जामा मस्जिद में पूरे माह तरावीह पढ़ी जाएगी।

दुकानों में सज गईं सेवइयां
महानगर के बाजारों में सेवइयों एवं दूध फैनी की दुकानें सज गई हैं। इस वर्ष सेवइयों व दूध फैनी के दामों में दस रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। बिसाती बाजार में दुकान लगाए मोहम्मद दिलशाद के मुताबिक दूध फैनी सौ रुपये तथा सेवइयां 60 रुपये किलो हैं। वहीं, पैकिंग में बनारसी सेवइयां (किमाम सेर्वइं) 150 रुपये किलो से प्रारंभ है।


उनके अनुसार दूध फैनी दो कलर व डबल सिंकाई में उपलब्ध है। वहीं, ईरानी खजूरों के अलावा मुंबई तथा इंदौर से लाए खजूरों की जानकारी पर दुकानदार बृज किशोर साहू ने बताया कि खजूर में कई किस्म हैं। इनकी कीमत 100 रुपये किलो से लेकर एक हजार रुपये किलो तक है।
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