{"_id":"617af77a201b42551933e378","slug":"money-started-reaching-farmers-bank-accounts-jhansi-news-jhs2076951189","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों के बैंक खाातों में पहुंचने लगा पैसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों के बैंक खाातों में पहुंचने लगा पैसा
विज्ञापन
झांसी। वित्तीय वर्ष 2021-22 में हुई तेज बारिश से पिछले दिनों जिले की खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ था। मुख्यमंत्री ने इस नुकसान के पैसे को जारी कर दिया है। नुकसान का सर्वे करने के बाद किसानों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन किया जा रहा है। जैसे- जैसे ब्योरा अपडेट हो रहा है, किसानों के बैंक खातों में पैसा पहुंचाया जाने लगा है। कुल नुकसान 61.75 करोड़ रुपये में से अब तक साढ़े छह करोड़ रुपये किसानों के बैंक खाते में पहुंच गए हैं। 31 अक्तूबर तक किसानों के डाटा की फीडिंग कंपलीट हो जाएगी।
खरीफ फसल सीजन में अगस्त में भारी बारिश हुई थी। इसमें किसानों को तिल, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मक्का आदि फसलों में भारी नुकसान हुआ था। इस पर प्रशासन ने फसलों के नुकसान का सर्वे कराया था। इसमें 61 करोड़ 75 लाख के नुकसान का आकलन किया गया था। नुकसान का सर्वे होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेज दी गई थी। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों नुकसान का पैसा राज्य आपदा मोचक निधि से जारी कर दिया है।
कुल 836 गांवों में 1,28,099 किसानों का 61.75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसमें सबसे अधिक मोंठ तहसील के 218 गांव, झांसी तहसील के 163 गांव, मऊरानीपुर तहसील के 153 गांव, गरौठा तहसील के 153 गांव और टहरौली तहसील के सबसे कम 149 गांव में फसलों का नुकसान हुआ था। इन किसानों का डाटा एनआईसी में कृषि विभाग की वेबसाइट पर फीड किया जा रहा है। इसके लिए तहसीलवार दस- दस कंप्यूटर ऑपरेटर लगाए गए हैं। तहसीलदार और लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। 1.28 लाख किसानों में से अब तक 84 हजार किसानों का डाटा ई- कुबेर साफ्टवेयर से फीड हो चुका है।
विज्ञापन
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि 31 अक्तूबर तक सभी किसानों का डाटा कंपलीट कर लिया जाएगा। इसके बाद उनके बैंक खाते में पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा।
आधार कार्ड और पास बुक से किया जा रहा मिलान
कई किसानों के आधार कार्ड और बैंक खाता में नाम में गड़बड़ियां हैं। किसानों के डाटा में मिस मैच होने के कारण फीडिंग में दिक्कत आ रही है। लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है कि जल्दी से जल्दी डाटा मिलान कर फीडिंग कराएं।
विज्ञापन
खरीफ फसल सीजन में अगस्त में भारी बारिश हुई थी। इसमें किसानों को तिल, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मक्का आदि फसलों में भारी नुकसान हुआ था। इस पर प्रशासन ने फसलों के नुकसान का सर्वे कराया था। इसमें 61 करोड़ 75 लाख के नुकसान का आकलन किया गया था। नुकसान का सर्वे होने के बाद शासन को रिपोर्ट भेज दी गई थी। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों नुकसान का पैसा राज्य आपदा मोचक निधि से जारी कर दिया है।
विज्ञापन
कुल 836 गांवों में 1,28,099 किसानों का 61.75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इसमें सबसे अधिक मोंठ तहसील के 218 गांव, झांसी तहसील के 163 गांव, मऊरानीपुर तहसील के 153 गांव, गरौठा तहसील के 153 गांव और टहरौली तहसील के सबसे कम 149 गांव में फसलों का नुकसान हुआ था। इन किसानों का डाटा एनआईसी में कृषि विभाग की वेबसाइट पर फीड किया जा रहा है। इसके लिए तहसीलवार दस- दस कंप्यूटर ऑपरेटर लगाए गए हैं। तहसीलदार और लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। 1.28 लाख किसानों में से अब तक 84 हजार किसानों का डाटा ई- कुबेर साफ्टवेयर से फीड हो चुका है।
विज्ञापन
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि 31 अक्तूबर तक सभी किसानों का डाटा कंपलीट कर लिया जाएगा। इसके बाद उनके बैंक खाते में पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा।
आधार कार्ड और पास बुक से किया जा रहा मिलान
कई किसानों के आधार कार्ड और बैंक खाता में नाम में गड़बड़ियां हैं। किसानों के डाटा में मिस मैच होने के कारण फीडिंग में दिक्कत आ रही है। लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है कि जल्दी से जल्दी डाटा मिलान कर फीडिंग कराएं।