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किसान कर रहे विधायक के वायदे पूरे होने का इंतजार, जुझारपुरा बांध अब तक अधूरा

Tue, 28 Sep 2021 01:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Sep 2021 01:24 AM IST
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MLA ji, understand the problem of the public....the crop is getting ruined, water is not getting
गुरसराय। गरौठा विधानसभा का इलाका सूखे से सर्वाधिक परेशान है। बतौर किसान नेता जवाहर लाल राजपूत के विधायक बनने से किसानों को उम्मीदें बंधीं। चुनाव के दौरान बतौर उम्मीदवार उन्होंने खेतों तक पानी पहुंचाने के तमाम वायदे किए, लेकिन उनके विधायक बनने के करीब साढ़े चार साल बाद भी तमाम वायदे हवा में हैं। किसानों को जुझारपुरा बांध (एरच) से काफी उम्मीदें थीं पर साढ़े चार साल बाद भी इस बांध का काम पूरा नहीं हुआ।
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गरौठा विधानसभा में खेती-किसानी ही मुख्य व्यवसाय है। मोंठ, समथर जैसे कुछ चुनिंदा इलाके छोड़कर तकरीबन पूरा विधानसभा क्षेत्र सूखे की चपेट में रहता है। यहां पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 2015 में 650 करोड़ की लागत से जुझारपुर बांध परियोजना आरंभ हुई। इससे डिफेंस कॉरिडोर को पानी उपलब्ध कराने समेत करीब 6000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई एवं तकरीबन 5 लाख लोगों को पीने का पानी मुहैया कराना था। सरकार ने वर्ष 2018 तक कुल 401 करोड़ खर्च कर दिए लेकिन, जांच में फंस जाने से काम आगे नहीं बढ़ा। विधायक ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के वायदे भी किए लेकिन, बात नहीं बन सकी।
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गुरसराय मुख्य नहर की दशा भी सुधारने के चुनाव के दौरान वायदे हुए थे लेकिन, आज भी नहर की जस की तस है। नहर की दुर्दशा की वजह से टेल तक पानी नहीं पहुंचता। खेतों के पलेवा के लिए भी किसान परेशान रहते हैं। किसानों का कहना है हर साल भूख हड़ताल पर बैठने के बाद ही यह नहर चालू होती है। मरम्मत न होने से यह नहर पूरी क्षमता से नहीं चलती। बड़वार बांध का भी यही हाल है। इस नहर से भी किसान मायूस हैं। स्थानीय किसानों का कहना है उनसे वायदा किया गया था कि इसे भसनेह झील से मिलाया जाएगा लेकिन, यह काम भी नहीं हुआ। विधानसभा के रामपुरा, गौना, ककरवई, घटियारी, वेहतर, धनौरा, गोकुल, पहरा, कुड़री, कुरैठा, अहरोरा, सुट्टा, सिंगार, बामौर समेत दर्जनों गांव में पानी न मिलने से खेती बुरी तरह प्रभावित होती है। किसानों का कहना है अगर चुनावी वायदे के मुताबिक खेतों को पानी मिलने लगे तब किसान आत्मनिर्भर हो जाते।
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गरौठा इलाके में पानी न होना सबसे बड़ी समस्या है। विधानसभा चुनाव के दौरान इस समस्या को खत्म कराने के वायदे हुए थे लेकिन, आज भी हालात जस के तस हैं
जगराम सिंह
जुझारपुरा बांध के तैयार होने से इलाके का काफी भला हो जाता। इसके लिए कोशिश नहीं की गई। सिंचाई के रकबे में बढ़ोतरी नहीं हुई। किसान सिंचाई के लिए पानी न मिलने से परेशान हैं।
रामू पाल
ट्यूबवेल एवं बिजली कनेक्शन पर सब्सिडी दिलाने का वायदा किया था। अब कोई सुनवाई नहीं होती। सिर्फ चुनाव के समय ही यह बात कही जाती है।
सुरेंद्र
जुझारपुरा बांध की काफी जरूरत है। अस्ता तालाब के विकास पर पैसा खर्च हुआ लेकिन, इसका कोई भी फायदा हम लोगों को नहीं मिला। नहरों की दुरुस्त कराने की बात कही गई थी। हालत आज भी जस की तस है।
पप्पू पुरैनियां
टेल तक पानी नहीं पहुंचता था। चुनाव में टेल तक पानी दिलाने की बात कही गई लेकिन, आज भी नहरों की सिल्ट सफाई नहीं होती। ऐसे में टेल तक पानी कैसे पहुंचेगा।
हरनाथ सिंह
बामौर में पशु चिकित्सा सहायता केंद्र खुलवाने का वायदा किया था। आज तक यह काम नहीं हुआ। इस वजह से पशुपालक परेशान होते हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं है।
हरिओम
खेती के समय नहर में पानी नहीं मिलता। पानी के लिए किसानों को नहर के अंदर बैठकर अनशन करना पड़ता है। वायदे के बावजूद सिंचाई की सहूलियत नहीं बढ़ी। एरच बांध शुरू कराने की कोई कोशिश नहीं हुई।

प्रशांत यादव
बोले विधायक
पानी के लिए ही लड़ी निर्णायक लड़ाई
गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत का कहना है कि उन्होंने पीने के पानी के साथ ही सिंचाई के पानी के लिए भी पूरे साढ़े चार साल तक कोशिश की। तालाबों पर भू-माफियाओं के अतिक्रमण को खत्म कराया। मोंठ के प्राचीन तालाब को पाटकर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया था। उसे खत्म कराकर तालाब का सुंदरीकरण कराया। इस तालाब से लोगों को मदद मिल रही है। इसी तरह गुरसराय के बड़ी मातन के प्राचीन तालाब को संवारा गया । इससे भी आसपास के लोगों को पानी मिल सका। इसी तरह गुरसराय मुख्य नहर से झील को भरने के लिए पोषक नहर भी बना दी गई है। गुरसराय-गरौठा पेयजल आपूर्ति योजना भी शुरू कराई है। सिंचाई की क्षमता भी पिछले साढ़े चार साल के दौरान बढ़ाई है।
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