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मिट्टी खत्म, भटक रहे कुम्हार... दिवाली पर दीयों के लिए कैसे घूमे चाक

Fri, 14 Oct 2022 11:51 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 11:51 PM IST
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Mitti khatm kumhar paresan
झांसी। मिट्टी खत्म हो जाने से कुम्हार भटक रहे हैं, क्योंकि 15 साल पहले हुए पट्टे की मिट्टी खत्म हो गई है। नया पट्टा मिला नहीं है। ऐसे में इनके सामने बड़ा संकट ये खड़ा हो गया है कि दीपावली पर दीये बनाने के लिए चाक कैसे घूमे। इन दिनों सिर्फ छह-सात परिवार ही दीये बना रहे हैं। झांसी समेत आसपास के जिलों में इन दीयों की सप्लाई होती है।
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कोछाभांवर में मिट्टी काली होती है। कहा जाता है कि इस मिट्टी से बनने वाला मटका कभी चटकता नहीं है। साथ ही खूब ठंडाता भी है। इसलिए दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई राज्यों में यहां से बने मटकों की सप्लाई होती है। इस बार भी गर्मी में यहां के मटके खूब बिके। बड़े-बड़े कारोबारी यहां से काफी संख्या में मटके ले गए और देशभर में इनकी बिक्री की। गर्मी कम होते ही कोछाभांवर के कुम्हारों ने मटके बनाने का काम बंद कर दिया और दिवाली पर निगाहें टिक गईं। मगर दीयों के कारोबार संकट में आ गया है। कुम्हारों ने बताया कि कई साल पहले उन्हें मिट्टी के पट्टा हुआ था, जिसकी मिट्टी अब लगभग खत्म हो गई है। इसलिए सिर्फ छह-सात परिवार ही दीये बना रहे हैं। उनकी प्रशासन से मांग है कि मिट्टी के लिए नया पट्टा आवंटित किया जाए।
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ये भाव बेच रहे दीये
- 100 रुपये के सौ
- 700-800 रुपये के एक हजार
ये भी जानें
कोछाभांवर में पिछले सौ साल से मटके, दीये बनाने का काम 50 से अधिक परिवार के लोग करते आ रहे हैं। मौजूदा समय में इन परिवारों में लगभग 250 सदस्य हैं। पट्टे की मिट्टी खत्म हो जाने से कई लोगों ने मटके, दीये बनाने का काम छोड़कर मजदूरी करनी शुरू कर दी है।
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ये बोले कुम्हार
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सालों पहले जो पट्टा आवंटित हुआ था, उसकी मिट्टी खत्म हो गई है। ऐसे में सिर्फ छह-सात परिवार ही दिवाली पर दीये बना पा रहे हैं। प्रशासन से कई बार नया पट्टा करने की मांग की जा चुकी है। - हरिकिशन प्रजापति।
दीपावली पर दीयों की अच्छी बिक्री होने की उम्मीद लगाए बैठे थे मगर ज्यादा मिट्टी नहीं होने से कम दीये बन पा रहे हैं। पट्टे की बची मिट्टी भी बारिश में गीली होने से निकालने में दिक्कत हो रही है। - जगदीश प्रजापति।

अगर हाथ से मिट्टी खोद रहे हैं और दो मीटर से अधिक खुदाई नहीं कर रहे हैं तो पट्टी की कोई जरूरत नहीं है। कई वर्षों पहले पट्टे की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। - बीपी यादव, जिला खनिज अधिकारी।
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