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Jhansi News: झांसी में चार साल के भीतर दूध का उत्पादन बढ़कर हुआ चार गुना

Sat, 01 Jun 2024 04:23 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Jun 2024 04:23 AM IST
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Milk production in Jhansi increased four times within four years
दुग्ध दिवस पर विशेष
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पिछले चार साल के भीतर झांसी में दुग्ध उत्पादन चार गुना बढ़ गया है। हालांकि जरूरत के लिहाज से अभी भी यह करीब पचास प्रतिशत कम है। दुग्ध अफसरों का कहना है यहां दुग्ध प्लांट स्थापित करने की कवायद चल रही है। प्लांट लगने से हालत में सुधार होगा।

बुंदेलखंड डेयरी परियोजना के जरिए सरकार ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने की कवायद शुरू की थी। इसके तहत गाय की देसी नस्ल में सुधार करने के साथ ही थार पारकर नस्ल की गाय को यहां बढ़ावा दिया गया। दुग्ध अफसरों के मुताबिक 2020 में यहां करीब 60-65 हजार लीटर दूध का उत्पादन होता था लेकिन, अब उत्पादन बढ़कर 2.50 लाख लीटर रोजाना हो गया। गर्मियों के बाद उत्पादन बढ़कर चार लाख लीटर तक पहुंच जाता है हालांकि मांग के लिहाज से यह अभी भी काफी कम है।
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राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के आंकड़ों की मानें तब झांसी में दूध की रोजाना खपत करीब 5.10 लाख लीटर है। बाकी की खपत पूरा करने को यहां कानपुर, ग्वालियर, दतिया समेत आसपास के इलाकों से दूध आता है। इसके बावजूद मानक की मात्रा के मुताबिक लोगों को दूध नहीं मिलता। महाप्रबंधक आरजे वर्मा का कहना है खपत के मुताबिक दूध उत्पादन बढ़ाने को प्रयास किए जा रहे हैं।
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इनसेट
दुधारू पशुओं की संख्या
गाय- 206928
भैंस- 299012


इनसेट

दूध ने बदल दी बुंदेलखंड के 69 हजार परिवारों की किस्मत

पर्याप्त हरा चारा न होने एवं देसी नस्ल की गाय के दूध कम देने से बुंदेलखंड हमेशा दुग्ध उत्पादन के मामले में पिछड़ा रहा लेकिन, हाल के कुछ वर्षों में इसमें सुधार देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की मदद से बलनी दुग्ध उत्पादक समूह की शुरूआत हुई। इस सहकारी समिति के जरिए गांव-गांव से दूध एकत्र किया जाता है। इससे बुंदेलखंड (झांसी, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, जालौन) में 69 हजार परिवार अभी जुड़े हैं। अब इन लोगों को नियमित तौर पर पैसा मिलता है। निदेशक ओपी सिंह के मुताबिक झांसी में 450 गांव के 39 हजार परिवार इससे जुड़े हैं जबकि पूरे बुंदेलखंड में 1164 गांव के 69 हजार परिवार इसके सदस्य हैं। इस दफा समिति ने 525 करोड़ रुपये का काम किया। इसका 84 प्रतिशत पैसा किसानों को दिया जाता है। इसके साथ लाभांश में किसानों की हिस्सेदारी रहती है। उनका कहना है कि अब यहां मिल्क प्लांट लगाने की कवायद की जा रही है।
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