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मानसिक रोगी ने स्टार्ट किया रेल इंजन, हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Oct 2016 01:05 AM IST
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railway news jhansi
- फोटो : demo pic
शनिवार को रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म सात पर खड़े शंटिंग इंजन में एक मानसिक रोगी चढ़ गया और इधर - उधर हाथ मारकर उसने इंजन स्टार्ट कर दिया। गनीमत रही कि इंजन आगे नहीं बढ़ा, वरना हादसा हो सकता था। बड़ी मशक्कत के बाद उसे इंजन से उतारा जा सका। इस दौरान वह घायल भी हो गया।
समस्तीपुर के चक सिकंदर निवासी प्रमोद कुमार अपने मानसिक रोगी भाई का इलाज कराने मंगलौर गया था। उसका एक साथी भी साथ था। शनिवार की सुबह तीनों मंगलौर से झांसी आए। झांसी से उन्हें ट्रेन बदलकर समस्तीपुर जाना था। वे तीनों प्लेटफार्म नंबर सात पर बैठे हुए थे। इसी बीच मानसिक रोगी उठा और प्लेटफार्म सात पर खड़े खाली इंजन पर चढ़ गया। उस समय इंजन की शंटिंग कर रहा चालक पास ही कहीं खड़ा हुआ था। मानसिक रोगी इंजन में चढ़ा और इधर- उधर बटन दबाने शुरू कर दिए। इसी बीच अचानक इंजन स्टार्ट हो गया। तब सभी का ध्यान उस पर गया। जैसी ही लोगों ने अंदर मानसिक रोगी को उल्टे- सीधे बटन दबाते देखा तो वे अवाक रह गए। सूचना पर रेल कर्मी और आरपीएफ मौके पर पहुंच र्गइं। वहां भीड़ लग गई। परिजनों ने मानसिक रोगी को इंजन से उतारने का प्रयास किया, मगर वे सफल नहीं हो सके। बाद में बड़ी मशक्कत से उसे इंजन से उतारा गया। विरोध करने पर वह घायल भी हो गया। इसके बाद रेलवे चिकित्सक को बुलाकर उसे आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। चिकित्सक की सलाह पर उसे मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया। अगर इंजन आगे बढ़ जाता तो वह निश्चित ही पटरी से उतर जाता।
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समस्तीपुर के चक सिकंदर निवासी प्रमोद कुमार अपने मानसिक रोगी भाई का इलाज कराने मंगलौर गया था। उसका एक साथी भी साथ था। शनिवार की सुबह तीनों मंगलौर से झांसी आए। झांसी से उन्हें ट्रेन बदलकर समस्तीपुर जाना था। वे तीनों प्लेटफार्म नंबर सात पर बैठे हुए थे। इसी बीच मानसिक रोगी उठा और प्लेटफार्म सात पर खड़े खाली इंजन पर चढ़ गया। उस समय इंजन की शंटिंग कर रहा चालक पास ही कहीं खड़ा हुआ था। मानसिक रोगी इंजन में चढ़ा और इधर- उधर बटन दबाने शुरू कर दिए। इसी बीच अचानक इंजन स्टार्ट हो गया। तब सभी का ध्यान उस पर गया। जैसी ही लोगों ने अंदर मानसिक रोगी को उल्टे- सीधे बटन दबाते देखा तो वे अवाक रह गए। सूचना पर रेल कर्मी और आरपीएफ मौके पर पहुंच र्गइं। वहां भीड़ लग गई। परिजनों ने मानसिक रोगी को इंजन से उतारने का प्रयास किया, मगर वे सफल नहीं हो सके। बाद में बड़ी मशक्कत से उसे इंजन से उतारा गया। विरोध करने पर वह घायल भी हो गया। इसके बाद रेलवे चिकित्सक को बुलाकर उसे आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। चिकित्सक की सलाह पर उसे मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया। अगर इंजन आगे बढ़ जाता तो वह निश्चित ही पटरी से उतर जाता।
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