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भारत के मुकाबले यूक्रेन में आधे खर्च पर ही हो जाती मेडिकल की पढ़ाई

Fri, 04 Mar 2022 12:44 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 12:44 AM IST
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Medical education is done in Ukraine at half the cost as compared to India
झांसी। भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कम सीटें और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की भारी भरकम फीस के चलते भारतीय छात्र यूक्रेन समेत विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। छात्रों का कहना है कि भारत की तुलना में महज 50 प्रतिशत पैसा खर्च करने ही पर यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई पूरी हो जाती है।
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भारत में नीट एंट्रेंस एग्जाम होता है, जो सिर्फ मेडिकल छात्रों के लिए संचालित किया जाता है। अगर कोई अंडर ग्रेजुएट छात्र एमबीबीएस/बीडीएस या फिर पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स जैसे कि एमडी/एमडीएस करना चाहता है तो इसके लिए नीट की परीक्षा पास करनी जरूरी होती है। लेकिन, यूक्रेन समेत कई देशों में इस तरह की परीक्षा नहीं कराई जाती है। कुछ यूनिवर्सिटी अपनी आंतरिक परीक्षा कराती हैं, जबकि कुछ सीधे इंटरव्यू के जरिए प्रवेश ले लेती हैं। साक्षात्कार में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। वहां से झांसी लौटे छात्र अक्षेंद्र बादल ने बताया कि यूक्रेन में 18 से 20 मेडिकल यूनिवर्सिटी हैं। किसी यूनिवर्सिटी में 300 तो किसी में 400 सीटों पर एमबीबीएस में प्रवेश मिलता है। ऐसे में लगभग छह से सात हजार छात्रों को यूक्रेन में एमबीबीएस में प्रवेश मिल जाता है। वहां पर फीस भी भारत की तुलना में काफी कम है। यूक्रेन में सरकारी चिकित्सा संस्थानों में दो से तीन लाख रुपये सालाना फीस लगती है। चार-पांच लाख रुपये सालाना रहने-खाने का खर्च आ जाता है। जबकि, भारत के निजी मेडिकल संस्थान 15 से 20 लाख रुपये तक सालाना फीस लेते हैं। कुछ जगहों पर भारी-भरकम डोनेशन भी देना पड़ता है। वहीं, यूक्रेन से तालबेहट लौटे योगेश झा ने बताया कि भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई जहां एक करोड़ में पूरी हो पाती है। वहीं, यूक्रेन में 50 लाख में हो जाती है। वहां की फैकल्टी और सुविधाएं भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से कहीं बेहतर हैं।
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पढ़ाई के क्या हैं फायदे
- यूक्रेन में पढ़ाई करने के बाद छात्रों के पास यूरोपियन देशों में प्रैक्टिस करने का मौका होता है।
- यूक्रेन से पढ़ने के बाद एक परीक्षा देकर यूके और यूनाइटेड स्टेट में भी नौकरी मिल सकती है।
भारत में लाइसेंस के लिए टेस्ट पास करना जरूरी
यूक्रेन से पढ़ने के बाद भारत में मान्यता के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट देना होता है। जो छात्र इस परीक्षा को पास कर देते हैं, उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने के लिए मान्यता मिल जाती है। जबकि, विशेषज्ञों का कहना है इस टेस्ट में हर साल लगभग 20 प्रतिशत छात्र पास हो पाते हैं। बाकियों की डिग्री भारत में मान्य नहीं हो पाती। हालांकि, कई बार ये टेस्ट देने का मौका होता है।
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