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मेडिकल कालेज में बजट खत्म, जांचें बंद
ब्यूरो
Updated Fri, 18 Dec 2015 01:10 AM IST
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। सरकार की ओर से गरीबों के लिए मुफ्त जांचों की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन उनके लिए जरूरी संसाधनों का अभाव होने से मरीजों को मिल नहीं पारही हैं।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में झांसी समेत आसपास के जनपदों के हजारों मरीज इलाज कराने के लिए आते है, जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की संख्या सर्वाधिक होती है। प्राइवेट अस्पतालों का खर्च वहन न कर पाने के चलते निर्धन मरीज मेडिकल कॉलेज से मुफ्त दवाएं और जांचें होने की उम्मीद लगाए रहते हैं लेकिन यहां भी उनकी उम्मीद टूटती जा रही है। दवाओं की किल्लत से मरीज बाहर से इनकी खरीद करने को मजबूर हैं ही, अब जांचों के लिए भी उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में बीते कई दिनों से एक्सरे, एमआरआई व सीटी स्कैन की फिल्में खत्म हो गई हैं। इससे रोजाना दर्जनों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से बीपीएल कार्ड धारकों की तीनों जांचें मुफ्त करने के निर्देश हैं। वहीं, अन्य मरीजों को भी जांचों में प्राइवेट के मुकाबले काफी रियायत दी गई है।
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सस्ते इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीज प्राइवेट केंद्रों पर जाकर जांच करवाने को मजबूर हैं। इससे प्राइवेट केंद्र वालों की चांदी हो रही है और मरीजों को आर्थिक चोट पहुंच रही है।
डिजिटल एक्सरे मशीन खराब
मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था किस तरह चौपट है इसकी गवाही खराब मशीन भी दे रही हैं। कोई न कोई मशीन खराब होने का रोना मेडिकल कॉलेज में हमेशा रहता है। मौजूदा समय में अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन खराब है।
यह है रुपये का अंतर
जांच-मेडिकल कॉलेज-प्राइवेट केंद्र
एमआरआई-2,000-4,500
एक्सरे-44-150
डिजिटल एक्सरे-115-250
सीटी स्कैन-600-1500-2000
बजट खत्म हो जाने के कारण फिल्मों की खरीद नहीं हो पा रही है। जैसे ही बजट मिलेगा फिल्म खरीद ली जाएंगी। डिजिटल एक्सरे मशीन को भी जल्द सुधरवा लिया जाएगा। - डॉ. हरीश चंद्र आर्या, सीएमएस
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में झांसी समेत आसपास के जनपदों के हजारों मरीज इलाज कराने के लिए आते है, जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की संख्या सर्वाधिक होती है। प्राइवेट अस्पतालों का खर्च वहन न कर पाने के चलते निर्धन मरीज मेडिकल कॉलेज से मुफ्त दवाएं और जांचें होने की उम्मीद लगाए रहते हैं लेकिन यहां भी उनकी उम्मीद टूटती जा रही है। दवाओं की किल्लत से मरीज बाहर से इनकी खरीद करने को मजबूर हैं ही, अब जांचों के लिए भी उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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मेडिकल कॉलेज में बीते कई दिनों से एक्सरे, एमआरआई व सीटी स्कैन की फिल्में खत्म हो गई हैं। इससे रोजाना दर्जनों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से बीपीएल कार्ड धारकों की तीनों जांचें मुफ्त करने के निर्देश हैं। वहीं, अन्य मरीजों को भी जांचों में प्राइवेट के मुकाबले काफी रियायत दी गई है।
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सस्ते इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीज प्राइवेट केंद्रों पर जाकर जांच करवाने को मजबूर हैं। इससे प्राइवेट केंद्र वालों की चांदी हो रही है और मरीजों को आर्थिक चोट पहुंच रही है।
डिजिटल एक्सरे मशीन खराब
मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था किस तरह चौपट है इसकी गवाही खराब मशीन भी दे रही हैं। कोई न कोई मशीन खराब होने का रोना मेडिकल कॉलेज में हमेशा रहता है। मौजूदा समय में अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन खराब है।
यह है रुपये का अंतर
जांच-मेडिकल कॉलेज-प्राइवेट केंद्र
एमआरआई-2,000-4,500
एक्सरे-44-150
डिजिटल एक्सरे-115-250
सीटी स्कैन-600-1500-2000
बजट खत्म हो जाने के कारण फिल्मों की खरीद नहीं हो पा रही है। जैसे ही बजट मिलेगा फिल्म खरीद ली जाएंगी। डिजिटल एक्सरे मशीन को भी जल्द सुधरवा लिया जाएगा। - डॉ. हरीश चंद्र आर्या, सीएमएस