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मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगा सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का ट्रायल
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जल्द ही सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का ट्रायल शुरू होगा। ये इंजेक्शन हाइपोवोलेमिक शॉक (आघात) में चले गए मरीजों को लगाया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि दूसरी इंजेक्शनों की तुलना में सेंथाक्विन सिट्रेट से मरीजों की 15 से 20 फीसदी तेजी से रिकवरी होती है। एक इंजेक्शन की कीमत नौ हजार रुपये है।
सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का तीन चरणों का ट्रायल पूरा हो चुका है। अब डीजीसीआई की मंजूरी के बाद महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में चौथे चरण का ट्रायल शुरू होने वाला है। ट्रायल के सहायक अनुवेशक डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि हाइपोवोलेमिक शॉक में गए मरीजों का ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। उन्हें जब ये इंजेक्शन दिया जाता है तो बीपी में सुधार होने लगता है। अब तक इस इंजेक्शन के कोई गंभीर साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों के परिजनों से पूछकर ही ये इंजेक्शन लगाया जाएगा। इससे पहले उनसे सहमति पत्र भरवाया जाएगा। बताया गया कि चौथे चरण का ट्रायल पूरा होने के बाद पूरी तरह ये साफ हो जाएगा कि इंजेक्शन के कोई साइड इफेक्ट हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि हाइपो वॉल्यूमिक शॉक में गए रोगियों को ये इंजेक्शन 15 से 20 फीसदी तेजी से रिकवर करता है।
इन कारणों से शॉक में जाते मरीज
डॉक्टरों ने बताया कि दुर्घटना का शिकार होने पर यदि व्यक्ति का ज्यादा खून बह जाए या उल्टी-दस्त होने, सर्जरी के दौरान ज्यादा रक्त निकलने आदि के चलते मरीज हाइपो वॉल्यूमिक शॉक में चला जाता है।
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सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का चौथे चरण का ट्रायल मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों पर किया जाएगा। बाजार में इसकी कीमत करीब नौ हजार है। रजामंदी देने वाले रोगियों को ये इंजेक्शन नि:शुल्क लगाया जाएगा। इसके कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आए हैं। - डॉ. अंशुल जैन, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का तीन चरणों का ट्रायल पूरा हो चुका है। अब डीजीसीआई की मंजूरी के बाद महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में चौथे चरण का ट्रायल शुरू होने वाला है। ट्रायल के सहायक अनुवेशक डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि हाइपोवोलेमिक शॉक में गए मरीजों का ब्लड प्रेशर काफी कम हो जाता है। उन्हें जब ये इंजेक्शन दिया जाता है तो बीपी में सुधार होने लगता है। अब तक इस इंजेक्शन के कोई गंभीर साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों के परिजनों से पूछकर ही ये इंजेक्शन लगाया जाएगा। इससे पहले उनसे सहमति पत्र भरवाया जाएगा। बताया गया कि चौथे चरण का ट्रायल पूरा होने के बाद पूरी तरह ये साफ हो जाएगा कि इंजेक्शन के कोई साइड इफेक्ट हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि हाइपो वॉल्यूमिक शॉक में गए रोगियों को ये इंजेक्शन 15 से 20 फीसदी तेजी से रिकवर करता है।
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इन कारणों से शॉक में जाते मरीज
डॉक्टरों ने बताया कि दुर्घटना का शिकार होने पर यदि व्यक्ति का ज्यादा खून बह जाए या उल्टी-दस्त होने, सर्जरी के दौरान ज्यादा रक्त निकलने आदि के चलते मरीज हाइपो वॉल्यूमिक शॉक में चला जाता है।
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सेंथाक्विन सिट्रेट इंजेक्शन का चौथे चरण का ट्रायल मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों पर किया जाएगा। बाजार में इसकी कीमत करीब नौ हजार है। रजामंदी देने वाले रोगियों को ये इंजेक्शन नि:शुल्क लगाया जाएगा। इसके कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आए हैं। - डॉ. अंशुल जैन, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।