{"_id":"610aed918ebc3ec35b78fe9d","slug":"master-plan-expansion-of-road-transport-jhansi-news-jhs201174848","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क, बस, परिवहन का लैंडयूज तीन फीसदी बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क, बस, परिवहन का लैंडयूज तीन फीसदी बढ़ा
विज्ञापन
झांसी। शहर के विस्तार को लेकर बन रही नई महायोजना-2031 में सड़क परिवहन सुविधाओं मेें बढ़ोतरी के लिए भी इंतजाम किए गए हैं। पिछली बार परिवहन से जुड़ी सेवाओं के लिए कुल क्षेत्रफल का महज 12 प्रतिशत भू-उपयोग सुरक्षित किया गया था लेकिन, नई योजना में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 15 फीसदी कर दिया गया है। अधिकतम इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा।
पिछले दस वर्षों के दौरान शहर का विस्तार तेजी से हुआ। पहले जेडीए सीमा में सिर्फ 39 गांव थे लेकिन, अब इनकी संख्या बढ़कर 101 हो चुकी। आठ साल पहले जेडीए की परिधि महज 320 वर्ग किमी थी जो अब बढ़कर 690 वर्ग किमी हो चुकी। अब यहां के लिए भी आवास विकास के प्रावधानों के मुताबिक योजनाएं तैयार होंगी। भू-उपयोग के इस्तेमाल के लिए नई महायोजना बनाई जा रही है। आने वाले समय में जेडीए इसी के मुताबिक नक्शे पास करेगा। इसमें पिछली बार के मुकाबले न सिर्फ आवासीय रकबे में बढ़ोतरी हुई बल्कि आबादी को देखते हुए परिवहन को भी तवज्जो दी गई है। पिछली महायोजना में परिवहन को कुल 1131 हेक्टेयर क्षेत्रफल सुरक्षित किया गया जबकि नई महायोजना में इसके लिए न्यूनतम 15 फीसदी जबकि अधिकतम 20 फीसदी तय किया है। अब इस भू-उपयोग में नई सड़कें, बस अड्डे समेत अन्य परिवहन सेवाएं विकसित की जाएंगीं। वहीं, सहयुक्त नियोजक एनके पुष्कर्णा के मुताबिक शासनादेश के मुताबिक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द बनाकर इसे जेडीए बोर्ड में पेश कर दिया जाएगा।
दोगुना हो जाएंगे व्यवसायिक इलाके
नई महायोजना में व्यवसायिक भू-उपयोग 3-5 प्रतिशत सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है, जो पिछली बार के मुकाबले करीब दोगुना है। पिछली महायोजना में सिर्फ 120 हेक्टेयर भू-उपयोग व्यवसायिक तय हुआ था। इसी तरह नई महायोजना में इंडिस्ट्रयल भू-उपयोग 6-8 प्रतिशत, अस्पताल, शिक्षण संस्थान समेत अन्य के लिए 10-12 प्रतिशत भू-उपयोग सुरक्षित किया गया है। हरित पट्टिका भी बढ़ाकर 18 प्रतिशत की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले दस वर्षों के दौरान शहर का विस्तार तेजी से हुआ। पहले जेडीए सीमा में सिर्फ 39 गांव थे लेकिन, अब इनकी संख्या बढ़कर 101 हो चुकी। आठ साल पहले जेडीए की परिधि महज 320 वर्ग किमी थी जो अब बढ़कर 690 वर्ग किमी हो चुकी। अब यहां के लिए भी आवास विकास के प्रावधानों के मुताबिक योजनाएं तैयार होंगी। भू-उपयोग के इस्तेमाल के लिए नई महायोजना बनाई जा रही है। आने वाले समय में जेडीए इसी के मुताबिक नक्शे पास करेगा। इसमें पिछली बार के मुकाबले न सिर्फ आवासीय रकबे में बढ़ोतरी हुई बल्कि आबादी को देखते हुए परिवहन को भी तवज्जो दी गई है। पिछली महायोजना में परिवहन को कुल 1131 हेक्टेयर क्षेत्रफल सुरक्षित किया गया जबकि नई महायोजना में इसके लिए न्यूनतम 15 फीसदी जबकि अधिकतम 20 फीसदी तय किया है। अब इस भू-उपयोग में नई सड़कें, बस अड्डे समेत अन्य परिवहन सेवाएं विकसित की जाएंगीं। वहीं, सहयुक्त नियोजक एनके पुष्कर्णा के मुताबिक शासनादेश के मुताबिक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। जल्द बनाकर इसे जेडीए बोर्ड में पेश कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
दोगुना हो जाएंगे व्यवसायिक इलाके
नई महायोजना में व्यवसायिक भू-उपयोग 3-5 प्रतिशत सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है, जो पिछली बार के मुकाबले करीब दोगुना है। पिछली महायोजना में सिर्फ 120 हेक्टेयर भू-उपयोग व्यवसायिक तय हुआ था। इसी तरह नई महायोजना में इंडिस्ट्रयल भू-उपयोग 6-8 प्रतिशत, अस्पताल, शिक्षण संस्थान समेत अन्य के लिए 10-12 प्रतिशत भू-उपयोग सुरक्षित किया गया है। हरित पट्टिका भी बढ़ाकर 18 प्रतिशत की गई।
विज्ञापन