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विद्यालयों में गूंज रही शहनाई
jhansi
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:30 AM IST
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स्कूल
- फोटो : demo pic
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सहालग में पैसा कमाने के लिए कुछ विद्यालय विवाहघर में तब्दील हो गए हैं। इससे पठन-पाठन प्रभावित है। प्रबंधन को न तो विद्यार्थियों की पढ़ाई की परवाह है और न ही नियम और कानून का डर। जिन पर नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है, उनकी बात को विद्यालयों का प्रबंधतंत्र हल्के में लेता है, नतीजा शिक्षा के मंदिर में शहनाइयां गूंज रही हैं और बच्चे माथा पीट रहे हैं।
ये स्थिति किसी एक स्कूल की नहीं है। शहर के अधिकांश विद्यालयों का यही हाल है। शिक्षा के यह मंदिर अब किसी के दांपत्य जीवन की शुरूआत के गवाह बनने लगे हैं। स्कूल चलाने वालों को इस बात की कतई चिंता नहीं है कि उन पर युवा पीढ़ी का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है। शादी समारोह की बुकिंग मिलने पर विद्यालयों के प्रबंधक छुट्टी कर देते है और मनमाना किराया वसूल कर आयोजन कराते हैं। अधिकांश विद्यालयों के प्रबंधक यह तर्क देते हैं कि पढ़ाई सुबह होती है और कार्यक्रम रात में होना है। लेकिन, आयोजन की तैयारियों के दौरान होने वाले शोरगुल से विद्यालय की पढ़ाई प्रभावित होने की बात पर वह चुप हो जाते हैं।
बच्चे और उनके अभिभावक आपत्ति दर्ज कराते हैं, प्रधानाचार्य भी नानुकुर करते हैं, लेकिन प्रबंधकों की मनमानी के आगे उनकी सुनवाई नहीं होती है। अपनी जेबें गर्म करने के लिए वह विद्यालयों को विवाहघर बनाने पर तुले हुए हैं।
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ये है नुकसान
किसी विद्यालय में यदि शादी होती है तो दो से तीन दिन पहले से पंडाल लगाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। सजावट का सामान लाने के लिए तिपहिया और चार पहिया वाहनों का आवागमन बढ़ जाता है। गाड़ियों के शोर के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। कई बार तो बच्चों की बेवजह छुट्टी कर दी जाती है। बच्चों का पढ़ाई से ध्यान बंटता है, क्योंकि वह उन दिनों में गाड़ियाें के आने-जाने तथा सजावट पर ज्यादा ध्यान देते हैं। छमाही और वार्षिक परीक्षा के समय यदि विद्यालय में शहनाई गूंजती है तो इससे बच्चों की परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है।
इंसेट
जानिए नियम
- नियमत: किसी भी विद्यालय में शादी या अन्य सांस्कृतिक समारोह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
- यदि विद्यालय में कोई शादी का आयोजन करता है और विद्यालय की छुट्टी कर दी जाती है तो प्रधानाचार्य को निलंबित भी किया जा सकता है।
जांच के लिए चलेगा अभियान
शासन के निर्देश यही हैं कि विद्यालय में शादियां या अन्य समारोह न हो। लेकिन, विद्यालय इसका पालन नहीं कर रहे हैं। जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। नियमों का पालन न करने वाले विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डा. नीरज पांडेय
जिला विद्यालय निरीक्षक
गलत है, लेकिन मजबूर
विद्यालय में शादी या समारोह कराना गलत है। कार्यक्रम के बाद पूरे परिसर में गंदगी फैल जाती है। शोर भी होता है। रविवार को लोक सेवा आयोग की परीक्षा है, लेकिन परिसर में शादी के कारण गंदगी फैली है। मैनेजमेंट को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- योगेंद्र मिश्रा
प्रधानाचार्य, श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर इंटर कॉलेज
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ये स्थिति किसी एक स्कूल की नहीं है। शहर के अधिकांश विद्यालयों का यही हाल है। शिक्षा के यह मंदिर अब किसी के दांपत्य जीवन की शुरूआत के गवाह बनने लगे हैं। स्कूल चलाने वालों को इस बात की कतई चिंता नहीं है कि उन पर युवा पीढ़ी का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है। शादी समारोह की बुकिंग मिलने पर विद्यालयों के प्रबंधक छुट्टी कर देते है और मनमाना किराया वसूल कर आयोजन कराते हैं। अधिकांश विद्यालयों के प्रबंधक यह तर्क देते हैं कि पढ़ाई सुबह होती है और कार्यक्रम रात में होना है। लेकिन, आयोजन की तैयारियों के दौरान होने वाले शोरगुल से विद्यालय की पढ़ाई प्रभावित होने की बात पर वह चुप हो जाते हैं।
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बच्चे और उनके अभिभावक आपत्ति दर्ज कराते हैं, प्रधानाचार्य भी नानुकुर करते हैं, लेकिन प्रबंधकों की मनमानी के आगे उनकी सुनवाई नहीं होती है। अपनी जेबें गर्म करने के लिए वह विद्यालयों को विवाहघर बनाने पर तुले हुए हैं।
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ये है नुकसान
किसी विद्यालय में यदि शादी होती है तो दो से तीन दिन पहले से पंडाल लगाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। सजावट का सामान लाने के लिए तिपहिया और चार पहिया वाहनों का आवागमन बढ़ जाता है। गाड़ियों के शोर के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। कई बार तो बच्चों की बेवजह छुट्टी कर दी जाती है। बच्चों का पढ़ाई से ध्यान बंटता है, क्योंकि वह उन दिनों में गाड़ियाें के आने-जाने तथा सजावट पर ज्यादा ध्यान देते हैं। छमाही और वार्षिक परीक्षा के समय यदि विद्यालय में शहनाई गूंजती है तो इससे बच्चों की परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है।
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जानिए नियम
- नियमत: किसी भी विद्यालय में शादी या अन्य सांस्कृतिक समारोह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
- यदि विद्यालय में कोई शादी का आयोजन करता है और विद्यालय की छुट्टी कर दी जाती है तो प्रधानाचार्य को निलंबित भी किया जा सकता है।
जांच के लिए चलेगा अभियान
शासन के निर्देश यही हैं कि विद्यालय में शादियां या अन्य समारोह न हो। लेकिन, विद्यालय इसका पालन नहीं कर रहे हैं। जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। नियमों का पालन न करने वाले विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डा. नीरज पांडेय
जिला विद्यालय निरीक्षक
गलत है, लेकिन मजबूर
विद्यालय में शादी या समारोह कराना गलत है। कार्यक्रम के बाद पूरे परिसर में गंदगी फैल जाती है। शोर भी होता है। रविवार को लोक सेवा आयोग की परीक्षा है, लेकिन परिसर में शादी के कारण गंदगी फैली है। मैनेजमेंट को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- योगेंद्र मिश्रा
प्रधानाचार्य, श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर इंटर कॉलेज