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नुकसान से बचने के लिए बहु फसली खेती करें किसान
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झांसी /ललितपुर । शनिवार को अमर उजाला फेसबुक लाइव रीडर कनेक्ट कार्यक्रम के तहत उप्र किसान समृद्धि आयोग के सदस्य व प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने किसानों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने किसानों की कृषि से जुड़ीं विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा किसानों को बहु फसली खेती करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दैवी आपदाओं से होने वाले नुकसान की वजह से किसान एकाएक टूट जाता है, लेकिन बहु फसली खेती किसानों को इन हालातों से बचा सकती है। कार्यक्रम में झांसी और ललितपुर के दो सैकड़ा से अधिक किसानों ने ऑनलाइन सहभागिता की।
कार्यक्रम में किसान प्रेम सिंह ने कहा कि खेतों में मिट्टी के आधार पर ही अनाज बोएं, जिससे बेहतर उत्पादन किया जा सके। इस दौरान किसानों ने कमेंट बॉक्स में अपने सवाल किए, जिनका जवाब प्रगतिशील किसान ने विधिवत तरीके से दिया।
ललितपुर के ह्देश गोस्वामी ने सवाल किया कि बुंदेलखंड में आज भी किसान परंपरागत ढंग से खेती करते हैं। जिले के किसान उन्नत पैदावार प्राप्त करें, इसके लिए उन्हें क्या करना चाहिए? जवाब में उन्होंने कहा कि ललितपुर में कई स्थानों पर खेतों के चारों ओर पेड़ लगाए गए हैं। खेतों पर 33 प्रतिशत पेड़ लगाना चाहिए। खेतों में जानवरों को चारागाह को भी स्थान देना चाहिए। खेत के एक तिहाई हिस्सा में खेती करने से संतुलन बना रहता है।
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झांसी के किसान महावीर शरण ने पूछा कि बुंदेलखंड की जमीन को औषधि खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन ये कब की जा सकती है और उपज की बिक्री कहां की जा सकती है?
उन्होंने उन्नत खेती और पारंपरिक खेती के बारे में जानकारी देकर बताया कि ज्यादा उत्पादन किसान के मन का फितूर है। अधिक लाभ मिलेगा, इसकी गारंटी नहीं है। अधिक पैदावार से रेट गिर जाते हैं और बाजार विपरीत हो जाता है। इसलिए एक प्रकार की खेती से बचना चाहिए। सभी प्रकार की खेती को करना चाहिए। रबी में तीन-चार प्रकार व खरीफ में पांच-छह प्रकार की खेती करनी चाहिए। कावर मिट्टी में धान, गेहूं और जल धारण करने वाली फसलें बोनी चाहिए। बरुआ मिट्टी में अरहर, चना ज्वार, मक्का, बाजरा, तिल, मूंग, उड़द एक साथ बोने से प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकता है। साथ ही घर में खाने को सभी प्रकार की वस्तुएं मिल जाएंगी। बाजार जाने से बचा जा सकता है।
किसान सिंचाई के लिए आधुनिक यंत्रों का प्रयोग करें। खाद व बीज खुद तैयार करें। इससे किसान समृद्ध होंगे।
इन्होंने भी पूछे सवाल
- शिक्षक पुष्पेंद्र जैन ने प्रश्न किया कि खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में कैसे सहेज कर रखा जा सकता है। बुंदेलखंड में भरपूर पानी कैसे हो व किसान कैसे समृद्ध बनें। क्या उपाय करना चाहिए ?
- अरविंद्र मिश्रा ने मेरी भूमि रोहणी डैम के नजदीक है, इस समय कौन सी फसल की बुवाई करना लाभकारी होगी। इसके अलावा दो वर्ष पहले मैंने अपने बगीचे में करीब सौ अमरूद के पेड़ लगाए थे जिनमें अधिकतर पौधों के पत्ते सूखने की कगार पर हैं, क्या करना चाहिए, ताकि इन्हें बचाया जा सके ?
- चंद्रप्रताप सिंह ने सवाल किया कि किसान अपनी फसल को वनरोज से कैसे बचाएं ?
- रानू तिवारी ने प्रश्न किया कि इस साल बारिश कैसी होगी और आगे कौन सी फसल बोई जाए, इस बारे में कोई जानकारी दी जाए ?
- किसान नेता नवनीत शर्मा ने धान के प्रकार की जानकारी का प्रश्न किया।
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कार्यक्रम में किसान प्रेम सिंह ने कहा कि खेतों में मिट्टी के आधार पर ही अनाज बोएं, जिससे बेहतर उत्पादन किया जा सके। इस दौरान किसानों ने कमेंट बॉक्स में अपने सवाल किए, जिनका जवाब प्रगतिशील किसान ने विधिवत तरीके से दिया।
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ललितपुर के ह्देश गोस्वामी ने सवाल किया कि बुंदेलखंड में आज भी किसान परंपरागत ढंग से खेती करते हैं। जिले के किसान उन्नत पैदावार प्राप्त करें, इसके लिए उन्हें क्या करना चाहिए? जवाब में उन्होंने कहा कि ललितपुर में कई स्थानों पर खेतों के चारों ओर पेड़ लगाए गए हैं। खेतों पर 33 प्रतिशत पेड़ लगाना चाहिए। खेतों में जानवरों को चारागाह को भी स्थान देना चाहिए। खेत के एक तिहाई हिस्सा में खेती करने से संतुलन बना रहता है।
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झांसी के किसान महावीर शरण ने पूछा कि बुंदेलखंड की जमीन को औषधि खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है, लेकिन ये कब की जा सकती है और उपज की बिक्री कहां की जा सकती है?
उन्होंने उन्नत खेती और पारंपरिक खेती के बारे में जानकारी देकर बताया कि ज्यादा उत्पादन किसान के मन का फितूर है। अधिक लाभ मिलेगा, इसकी गारंटी नहीं है। अधिक पैदावार से रेट गिर जाते हैं और बाजार विपरीत हो जाता है। इसलिए एक प्रकार की खेती से बचना चाहिए। सभी प्रकार की खेती को करना चाहिए। रबी में तीन-चार प्रकार व खरीफ में पांच-छह प्रकार की खेती करनी चाहिए। कावर मिट्टी में धान, गेहूं और जल धारण करने वाली फसलें बोनी चाहिए। बरुआ मिट्टी में अरहर, चना ज्वार, मक्का, बाजरा, तिल, मूंग, उड़द एक साथ बोने से प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकता है। साथ ही घर में खाने को सभी प्रकार की वस्तुएं मिल जाएंगी। बाजार जाने से बचा जा सकता है।
किसान सिंचाई के लिए आधुनिक यंत्रों का प्रयोग करें। खाद व बीज खुद तैयार करें। इससे किसान समृद्ध होंगे।
इन्होंने भी पूछे सवाल
- शिक्षक पुष्पेंद्र जैन ने प्रश्न किया कि खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में कैसे सहेज कर रखा जा सकता है। बुंदेलखंड में भरपूर पानी कैसे हो व किसान कैसे समृद्ध बनें। क्या उपाय करना चाहिए ?
- अरविंद्र मिश्रा ने मेरी भूमि रोहणी डैम के नजदीक है, इस समय कौन सी फसल की बुवाई करना लाभकारी होगी। इसके अलावा दो वर्ष पहले मैंने अपने बगीचे में करीब सौ अमरूद के पेड़ लगाए थे जिनमें अधिकतर पौधों के पत्ते सूखने की कगार पर हैं, क्या करना चाहिए, ताकि इन्हें बचाया जा सके ?
- चंद्रप्रताप सिंह ने सवाल किया कि किसान अपनी फसल को वनरोज से कैसे बचाएं ?
- रानू तिवारी ने प्रश्न किया कि इस साल बारिश कैसी होगी और आगे कौन सी फसल बोई जाए, इस बारे में कोई जानकारी दी जाए ?
- किसान नेता नवनीत शर्मा ने धान के प्रकार की जानकारी का प्रश्न किया।